पर्युषण महापर्व के दूसरे दिन डोरंडा जैन मंदिर में गूंजे धर्म के संदेश, 11 कर्तव्यों का बताया महत्व
रांची के डोरंडा जैन मंदिर में पर्युषण महापर्व पर 11 कर्तव्यों और जिन-दर्शन का महत्व बताया गया। धर्म-आराधना को जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया गया।
रांची. पर्युषण महापर्व के दूसरे दिन डोरंडा स्थित जैन मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया. इस अवसर पर धार्मिक वक्ता धैर्य पीयूष भाई धामी और तीर्थ धर्मवीर भाई शाह ने अष्टाह्निका ग्रंथ के माध्यम से श्रावक जीवन के वार्षिक 11 कर्तव्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि इन 11 कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करने से जीवन में आत्मिक शक्ति और सकारात्मकता का संचार होता है. प्रवचन के दौरान वक्ताओं ने बताया कि पर्युषण के शुरुआती तीन दिनों में अष्टाह्निका ग्रंथ का श्रवण किया जाता है. इसके बाद के पांच दिनों में कल्पसूत्र ग्रंथ और बारसा सूत्र ग्रंथ के प्रवचनों का वाचन होता है. इन आठ दिनों में श्रद्धालु पूरे भाव के साथ धर्म-आराधना और संयम की क्रियाएं संपन्न करते हैं. कल्पसूत्र ग्रंथ के माध्यम से 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के संपूर्ण जीवन-चरित्र और जैन धर्म के गूढ़ सिद्धांतों का श्रवण करने का अवसर मिलता है.
चैतन्य परिपाटी और तीर्थ यात्रा का महत्ववक्ताओं ने पर्युषण पर्व में ''चैतन्य परिपाटी'' के विशेष महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं को सभी जिन मंदिरों का दर्शन-वंदन करना चाहिए. इसके साथ ही जीवन में वर्ष में कम से कम एक बार तीर्थ यात्रा अवश्य करनी चाहिए, जिसका मानव जीवन पर गहरा और सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. पर्युषण में की जाने वाली यह भाव-भक्ति केवल आठ दिनों तक सीमित न रहकर जीवनभर अपनाई जानी चाहिए.
अनुष्ठान में इनकी रही मौजूदगीधार्मिक अनुष्ठान के दौरान विनोद भंडारी, अनिल कोठारी, राजू राजरामपुरिया, अजय कोठारी, उषा कोठारी, सुशीला सेठिया, सुभाष बोथरा, दिनेश भाई सेठ, ऋषभ चंद भंसाली, प्रभा बोथरा, कुसुम पारख सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु उपस्थित थे.
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