बीजिंग. शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में भारत और पाकिस्तान के शामिल होने की संभावना के बीच चीन ने बुधवार को कहा कि वह अशांत अफगानिस्तान में स्थिरता के लिए दोनों देशों के साथ सहयोग करने का इच्छुक है. एससीओ के संस्थापक के तौर पर चीन छह सदस्यीय इस संगठन में काफी प्रभाव रखता है. इसमें भारत और पाकिस्तान का प्रवेश ऐसे समय में हो रहा है, जब चीन अमेरिकी और नाटो सैनिकों की वापसी से पहले अफगानिस्तान में एक अहम भूमिका निभा रहा है. हुआ ने कहा कि एससीओ के विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग के साथ यह दुनिया में कहीं अधिक प्रभावशाली हो गया है. आतंकवाद से लड़ने, मादक पदार्थ तथा सीमा पार के अपराध का मुकाबला करने और अर्थव्यवस्था को विकसित करने का एससीओ के पास काफी अनुभव तथा क्षमता है. पिछले साल दुशांबे सम्मेलन में पारित दस्तावेजों के आधार पर उफा सम्मेलन विस्तार प्रक्रिया को आगे बढ़ायेगा और एससीओ के सदस्य के रूप में भारत और पाकिस्तान को शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूर करेगा. इस महीने भारत और पाकिस्तान एसएसीओ में शामिल होने की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू कर देंगे. एससीओ अधिकारियों के मुताबिक, भारत और पाक अगले साल औपचारिक रूप से इसके सदस्य बन जायेंगे. ‘2009 से, एससीओ ने अफगानिस्तान से कई बार संपर्क किया है. हम अफगान मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के साथ सहयोग करने के इच्छुक हैं. हमें इस दिशा में एक रचनात्मक भूमिका निभाये जाने की उम्मीद है. अफगानिस्तान एक महत्वपूर्ण देश है और एससीओ का पर्यवेक्षक भी है तथा इसकी स्थिति मध्य एशिया मंे सुरक्षा और स्थिरता पर टिकी हुई है.हुआ चुनयिंग, प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय, चीन
अफगानिस्तान मुद्दे पर भारत, पाक के साथ सहयोग का चीन इच्छुक
बीजिंग. शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में भारत और पाकिस्तान के शामिल होने की संभावना के बीच चीन ने बुधवार को कहा कि वह अशांत अफगानिस्तान में स्थिरता के लिए दोनों देशों के साथ सहयोग करने का इच्छुक है. एससीओ के संस्थापक के तौर पर चीन छह सदस्यीय इस संगठन में काफी प्रभाव रखता है. इसमें […]
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