रांची : मंत्रिमंडल निगरानी सचिव को लोकायुक्त ने किया शो-कॉज

Updated at : 04 Dec 2019 9:29 AM (IST)
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रांची : मंत्रिमंडल निगरानी सचिव को लोकायुक्त ने किया शो-कॉज

पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप रांची : लोकायुक्त जस्टिस डीएन उपाध्याय ने दो मामलों में मंत्रिमंडल निगरानी सचिव अजय कुमार सिंह को शो-कॉज किया है. कहा है कि मामले में मंत्रिमंडल निगरानी सचिव द्वारा आरोपी लोकसेवकों के खिलाफ शिकायत को महत्व नहीं दिया जाना, एसीबी को आरोपी लोकसेवक के खिलाफ जांच करने की अनुमति नहीं […]

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पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप
रांची : लोकायुक्त जस्टिस डीएन उपाध्याय ने दो मामलों में मंत्रिमंडल निगरानी सचिव अजय कुमार सिंह को शो-कॉज किया है. कहा है कि मामले में मंत्रिमंडल निगरानी सचिव द्वारा आरोपी लोकसेवकों के खिलाफ शिकायत को महत्व नहीं दिया जाना, एसीबी को आरोपी लोकसेवक के खिलाफ जांच करने की अनुमति नहीं देना और संबंधित विभाग से मंतव्य मांगना एकदम अनुचित है.
इस कृत्य को लोकायुक्त के कार्य क्षेत्र में हस्तक्षेप के तौर पर देखा जा सकता है. ऐसे में क्यों न आपके खिलाफ लोकायुक्त के आदेश का उल्लंघन कर आरोपी लोकसेवकाें के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने के लिए कार्रवाई प्रारंभ की जाये. सचिव को पत्र प्राप्ति के एक माह के अंदर स्पष्टीकरण का जवाब देने को कहा गया है.
सरकारी राशि के दुरुपयोग मामले में नहीं दिया जांच का आदेश : पूर्वी वन प्रमंडल रांची के लालखटंगा स्थित जैव विविधता पार्क में निर्माण कार्य के लिए 20 करोड़ रुपये आवंटित किये गये थे. इस मामले में संजय तिवारी ने लोकायुक्त से शिकायत की थी.
कहा था कि पार्क के निर्माण कार्य में पांच करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च नहीं की गयी. जबकि 10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का गबन विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से कर लिया गया. जो कि सरकारी राशि के सीधे-सीधे दुरुपयोग का उदाहरण है. पार्क निर्माण के लिए आवंटित राशि खर्च करने के लिए रेंजर सुरेश टोप्पो को पदस्थापित कर दिया गया, जो कि कुछ महीनों बाद ही सेवानिवृत्त हो रहे थे. यह भी आरोप है कि रेंजर द्वारा सरकारी राशि का गबन कर 25 करोड़ से अधिक की संपत्ति अर्जित की गयी है. इन पर आय से अधिक संपत्ति का भी मामला बनता है.
आरोपों की गंभीरता को देखते हुए 24 जून 2019 को एसीबी को पीइ दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया गया था. इसके बाद एसीबी ने मामले में मंत्रिमंडल निगरानी विभाग को पत्र भेजा. इसके बाद मंत्रिमंडल निगरानी सचिव ने वन विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर यह प्रतिवेदन मांगा कि यदि प्रशासी विभाग मामले की निगरानी से जांच कराना आवश्यक समझाता है, तो विभागीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त कर विधिवत मंत्रिमंडल निगरानी को प्रस्ताव भेजें.
तीन अभियंताओं के खिलाफ जांच की नहीं दी अनुमति : लोकायुक्त ने दो अगस्त 2019 को नहर संरचना रूपांकन प्रमंडल संख्या-3, जल भवन, डोरंडा के कार्यपालक अभियंता विजय शंकर, प्रमंडल संख्या-2 के कार्यपालक अभियंता जीतन दास, प्रमंडल संख्या-1 के सहायक अभियंता विमल कुमार झा के खिलाफ पीइ दर्ज कर जांच करने का निर्देश एसीबी को दिया था.
एसीबी ने मामले में मंत्रिमंडल निगरानी से अनुमति मांगी. अनुमति देने की जगह मंत्रिमंडल निगरानी ने जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव को परिवाद पत्र में लगाये गये आरोप के संबंध में तीनों पदाधिकारियों के विरुद्ध पीइ दर्ज कर स्पष्ट मंतव्य उपलब्ध कराने का अनुरोध किया.
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