लागू हो गयी आदर्श चुनाव आचार संहिता : जानिए क्या करें, क्या नहीं करें

Updated at : 02 Nov 2019 9:14 AM (IST)
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लागू हो गयी आदर्श चुनाव आचार संहिता : जानिए क्या करें, क्या नहीं करें

रांची : चुनाव की घोषणा के साथ ही झारखंड में तत्काल प्रभाव से आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो गयी है. ऐसे में दलों, प्रत्याशियों के साथ-साथ एक-एक मतदाता के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि आखिर चुनाव आचार संहिता है क्या. यह भी कि इसके लागू होने के बाद क्या करना चाहिए और […]

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रांची : चुनाव की घोषणा के साथ ही झारखंड में तत्काल प्रभाव से आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो गयी है. ऐसे में दलों, प्रत्याशियों के साथ-साथ एक-एक मतदाता के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि आखिर चुनाव आचार संहिता है क्या. यह भी कि इसके लागू होने के बाद क्या करना चाहिए और क्या नहीं. कोई प्रत्याशी या दल इसका उल्लंघन करता है, तो इसे भी सामने लाने की जरूरत है, जिससे निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित हो और जनता की अपनी सरकार बने. मतदाता, प्रत्याशी और राजनीतिक दल जानें कि उन्हें क्या करना है और क्या नहीं.
मतदाताओं को लुभानेवाले सभी काम प्रतिबंधित
– चुनाव की तिथि घोषित होने के बाद सत्ताधारी दल या प्रत्याशी किसी भी तरह का प्रलोभन मतदाता को नहीं देंगे. नयी योजनाओं की घोषणा या शिलान्यास जैसे काम नहीं होने चाहिए. ऐसा कोई काम नहीं किया जाना चाहिए, जिससे वोटरों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचे
– पार्टी या उम्मीदवार मतभेद, परस्पर घृणा या जातियों और समुदायों, धार्मिक या भाषाई तनाव बनाने के लिए न तो कोई भाषण देगा, न ही कोई ऐसा काम करेगा, जिससे तनाव उत्पन्न हो
– विभिन्न राजनीतिक दलों की आलोचना, उनकी नीतियों और कार्यक्रम, पिछले रिकॉर्ड और काम तक ही सीमित रखा जायेगा. दल और उम्मीदवार किसी के निजी जीवन के पहलुओं, नेताओं या अन्य दलों के कार्यकर्ताओं के सार्वजनिक क्रिया-कलापों से जुड़ी आलोचना नहीं करेंगे. ऐसे आरोप, जिनकी पुष्टि नहीं हुई है या विकृति के आधार पर अन्य दलों या उनके कार्यकर्ताओं की आलोचना से बचे
– वोट हासिल करने के लिए जातीय या सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने के लिए कोई अपील नहीं की जायेगी. मसजिदों, चर्चों, मदिरों या पूजा के अन्य स्थानों को चुनाव प्रचार के लिए मंच के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जायेगा
– सभी दल और उम्मीदवार मतदाताओं को किसी तरह की धमकी, मतदान के लिए प्रलोभन नहीं दे सकते हैं. बूथों के 100 मीटर के भीतर मतदान अवधि में सार्वजनिक बैठक नहीं की जा सकेगी. मतदान के 48 घंटे पूर्व बिना पास के मतदान केेंद्रों की ओर नहीं जाया जा सकेगा
– शांतिपूर्ण और गुप्त मतदान हर व्यक्ति का अधिकार है. राजनीतिक दल या उम्मीदवार अपने राजनीतिक विचारों या गतिविधियों को किसी पर थोपने का प्रयास नहीं करेंगे. वह अपनी राय या गतिविधियों का प्रदर्शन अपने विरोधियों के घर के समीप नहीं कर सकेेंगे. उम्मीदवार से विरोध जताने के लिए धरना – प्रर्दशन भी नहीं कर सकते हैं
– दल या उम्मीदवार अपने प्रचार के लिए बिना संबंधित व्यक्ति की अनुमति के उस व्यक्ति की भूमि, भवन या परिसर की दीवार आदि का इस्तेमाल नहीं कर सकता है. झंडा, बैनर, पोस्टर, नोटिस चिपकाने, नारे लिगाने आदि के लिए संबंधित व्यक्ति की अनुमति आवश्यक है
सत्ताधारी दल के लिए
– सत्ताधारी दल अपने चुनाव अभियान के उद्देश्यों और मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए अपने सरकारी पद का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं
– चुनाव प्रचार के लिए मंत्री या सरकार में शामिल लोग सरकारी यात्रा, सरकारी मशीनरी अथवा सरकारी कर्मचारियों का इस्तेमाल नहीं करेंगे
– सत्ताधारी दल द्वारा चुनाव के लिए सरकार के हेलीकॉप्टर, हवाई जहाज, वाहन और मशीनरी का उपयोग सर्वथा वर्जित है. पार्टी के हित में सरकारी कर्मचारियों का इस्तेमाल नहीं किया जायेगा
– सार्वजनिक स्थानों पर चुनावी बैठकों के आयोजन के लिए, स्थानों और संसाधन के उपयोग के लिए सत्ताधारी दल या प्रत्याशी का एकाधिकार नहीं होगा. ऐसे स्थानों पर, जिनका उपयोग सत्ताधारी दलों द्वारा किया जाता रहा है, वहां भी अनुमति के बाद ही बैठक या सभा का आयोजन किया जा सकता है
– अतिथिशाला, डाक बंगला या अन्य सरकारी आवास के उपयोग के लिए सत्ता पक्ष को निष्पक्ष तरीके से निर्णय लेना चाहिए. सत्ताधारी पक्ष के अलावा विपक्षी पार्टियां या उसके उम्मीदवारों को पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से सरकारी संसाधनों के उपयोग की अनुमति दी जानी चाहिए. किसी पार्टी या उम्मीदवार के पास इनके उपयोग का एकाधिकार नहीं होगा
– चुनाव की घोषणा के बाद किसी तरह की योजना की मंजूरी, अनुदान या भुगतान नहीं किया जायेगा
– सत्तारूढ़ दल के नेताओं और मंत्रियों द्वारा कोई नयी घोषणा नहीं की जायेगी
– किसी भी रूप में किसी भी वित्तीय अनुदान की घोषणा नहीं की जायेगी
बैठकों या सभा के लिए क्या करें
– राजनीतिक दल और उम्मीदवार अपने विरोधियों के खिलाफ उनकी सभा में किसी तरह प्रकार की गड़बड़ी करने की कोशिश नहीं कर सकते हैं. एक पक्ष की बैठक में अन्य पक्ष का उम्मीदवार या उसके समर्थक किसी तरह की बाधा नहीं पहुंचा सकते हैं
– पार्टी या उम्मीदवार किसी भी तरह की प्रस्तावित बैठक के बारे में स्थानीय पुलिस या सक्षम अधिकारियों को सूचित करेंगे, ताकि यातायात को नियंत्रित करने और शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिए पुलिस काम कर सके
– अगर किसी स्थान पर बैठक के लिए कोई प्रतिबंध या निषेधात्मक आदेश है, तो पार्टी या उम्मीदवार अग्रिम में यह सुनिश्चित करेगा कि ऐसे आदेशों का कड़़ाई से अनुपालन किया जाये. यदि संबंधित स्थान पर किसी समय बैठक करने की छूट दी जाती हो, तो भी बैठक के पूर्व आदेश प्राप्त करना जरूरी है
– बैठकों में किसी भी तरह की सुविधा के उपयोग के लिए पार्टी या उम्मीदवार अनुमति या लाइसेंस संबंधित एजेंसी से प्राप्त कर सकते हैं
– बैठक के दौरान किसी किस्म की समस्या आने पर या किसी के द्वारा परेशानी उत्पन्न करने पर पुलिस की सहायता लेनी चाहिए. आयोजक स्वयं ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेंगे
जुलूस निकालने के पहले क्या करें
– एक पार्टी या उम्मीदवार जुलूस के आयोजन के लिए समय और जगह तय करेगा. जुलूस की शुरुआत, मार्ग और समय का पूरा-पूरा पालन होना चाहिए. तय समय से कार्यक्रम का विचलन नहीं किया जायेगा
– आयोजकों को अपने कार्यक्रम की सूचना स्थानीय पुलिस अधिकारियों को देनी होगी. यातायात व सुरक्षा की आवश्यक व्यवस्था करने के लिए अग्रिम सूचना देनी होगी
– अगर क्षेत्र में किसी भी तरह का प्रतिबंधात्मक आदेश लागू है, तो जुलूस निकालने के लिए आयोजक सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रतिबंध से छूट मिलने तक सभा या जुलूस नहीं निकालेंगे. दल, उम्मीदवार या कार्यकर्ता ट्रैफिक नियमों या प्रतिबंधों का सावधानी से पालन करेंगे
– जुलूस के मार्ग में यातायात या किसी तरह की बाधा हो, तो व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए प्रयास किया जाना चाहिए. इसके लिए भारी ट्रैफिक से बचने के लिए मार्ग परिवर्तित किया जा सकता है
– जुलूस के दौरान यातायात व्यवस्थित रखने का पूरा प्रयास होना चाहिए. जुलूस जितना हो सके, सड़क की दाहिनी ओर से निकाला जाना चाहिए
– यदि दो या अधिक राजनैतिक दलों या प्रत्याशियों को एक ही रास्ते व समय पर जुलूस निकालना हो, तो आयोजकों को आपस में अग्रिम संपर्क स्थापित करना चाहिए. आपसी टकराव या यातायात में बाधा होने पर स्थानीय पुलिस की सहायता ली जानी चाहिए
– राजनीतिक दल या उम्मीदवारों द्वारा आयोजित जुलूस या सभा में अवांछनीय तत्वों द्वारा व्यवधान उत्पन्न किया जा सकता है. उस स्थिति पर नियंत्रण करने के लिए पुलिस या प्रशासन के अलावा किसी अन्य का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए. राजनीतिक दलों या प्रत्याशियों से अपेक्षा की जाती है कि वे उत्तेजना के क्षणों को नियंत्रण में रखने का प्रयास करें
– पुतला जला कर या सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन नहीं होने चाहिए. सार्वजनिक प्रदर्शन या पुतला जलाने में राजनीतिक दलों, उनके नेताओं या कार्यकर्ताओं का प्रतिनिधित्व भी नहीं होना चाहिए
आचार संहिता का उल्लंघन हो, तो शिकायत करें
रांची : आचार संहिता का उल्लंघन होने की स्थिति में कोई भी आम नागरिक चुनाव आयोग से शिकायत कर सकता है. सी विजिल नाम के मोबाइल एप पर फोटो और वीडियो डाल कर भी आयोग के पास आचार संहिता उल्लंघन की शिकायत की सकती है. चुनाव आयोग के टोल फ्री नंबर 1950 पर भी शिकायत दर्ज करायी जा सकती है. इसके अलावा चुनाव आयोग, राज्य चुनाव पदाधिकारी, जिला निर्वाचन पदाधिकारी व चुनाव पर्यवेक्षक के पास भी शिकायत की जा सकती है.
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