रांची : अधिकारियों को कार्रवाई की चेतावनी

Updated at : 25 Jun 2019 9:11 AM (IST)
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रांची : अधिकारियों को कार्रवाई की चेतावनी

कम बारिश होने की स्थिति में खेतों में दो फसल लगायें किसान पिछले चार दिनों में राज्य में कमजोर मॉनसून देखा जा रहा है, जतायी चिंता रांची : झारखंड में माॅनसून प्रवेश का सही समय 15 जून है. लेकिन इस बार करीब आठ दिन देर से प्रवेश हुआ है. पिछले चार दिनों में राज्य में […]

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कम बारिश होने की स्थिति में खेतों में दो फसल लगायें किसान
पिछले चार दिनों में राज्य में कमजोर मॉनसून देखा जा रहा है, जतायी चिंता
रांची : झारखंड में माॅनसून प्रवेश का सही समय 15 जून है. लेकिन इस बार करीब आठ दिन देर से प्रवेश हुआ है. पिछले चार दिनों में राज्य में कमजोर मॉनसून देखा जा रहा है. राज्य की करीब 80 प्रतिशत खेती वर्षा पर आधारित है.
माॅनसून की यह स्थिति किसानों के लिए चिंता का विषय है. बिरसा कृषि विवि के डीन एग्रीकल्चर डॉ एमएस यादव के अनुसार खरीफ मौसम में अल्पवृष्टि किसानों के मन में आगामी वर्षापात एवं फसल बोआई के लिए आशंकाएं पैदा करती है. डॉ यादव ने अतिवृष्टि या अल्पवृष्टि की परिस्थिति की अवस्था में किसानों को कई सुझाव दिये हैं.
उन्होंने किसानों को टांड़ जमीन बोआई का समय हो जाने की वजह से धान, मूंग, मूंगफली, सोयाबीन एवं अरहर आदि की बोआई जल्द करने को कहा है. अल्पवृष्टि की स्थिति में दो फसल की बोआई करने को कहा है. बोआई से पहले खेतों में अच्छी तरह सड़ी गोबर का खाद तथा चार क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से बूझा चूना का प्रयोग करने की सलाह दी है.
असमान वर्षापात को देखते हुए फफूंदनाशी दवा (कर्बेंडाजाईम दवा 2.5 ग्राम) के साथ वेवीस्टीन दवा 2.5 ग्राम को प्रति किलो बीज में अच्छी तरह मिलाकर ही बोआई करनी चाहिये. इससे अंकुरण अच्छा तथा बीजों के सड़ने का भय नहीं होगा. किसानों को फसल की बोआई जुलाई में करनी हो तो, खेतों में मेढ़ बनाकर मेढ़ के ऊपर बोआई करनी चाहिये, ताकि वर्षापात के अतिवृष्टि के समय नलियों से पानी का निकास हो सके. देर तक माॅनसून की बेरूखी की स्थिति में किसानों को मध्यम जमीन में धान की सीधी बोआई कर देनी चाहिये.
इससे बिचड़ा उगाने और लगाने की समस्या से बचा जा सकता है. डॉ यादव ने कहा कि राज्य में सामान्यत: खेतों में आद्रा नक्षत्र में बोआई का प्रचलन है. किसानों को इसका पालन करना चाहिए तथा बोआई के तुरंत बाद खेतों की मेढ़ बंदी कर देनी चाहिये. इससे कम वर्षा में खेतों में फसल वृद्धि में वर्षा जल के नमी का उपयोग हो जाता है.
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