रांची : आइओ एक भी मालिक का नाम तक पता नहीं कर पाये

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रांची : हजारीबाग के बड़कागांव थाना क्षेत्र में अवैध बालू खनन मामले में वहां के एसडीपीओ अनिल कुमार सिंह ने 14 फरवरी 2019 को एक जेसीबी और नौ हाइवा को पकड़ा था. लेकिन बड़कागांव थाने में प्राथमिकी 20 फरवरी को दर्ज की गयी थी. इसके बाद मामला काफी दिनों तक विवादों में रहा था. अब […]

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रांची : हजारीबाग के बड़कागांव थाना क्षेत्र में अवैध बालू खनन मामले में वहां के एसडीपीओ अनिल कुमार सिंह ने 14 फरवरी 2019 को एक जेसीबी और नौ हाइवा को पकड़ा था. लेकिन बड़कागांव थाने में प्राथमिकी 20 फरवरी को दर्ज की गयी थी.
इसके बाद मामला काफी दिनों तक विवादों में रहा था. अब इस मामले में एक और बात सामने आयी है. अनुसंधानकर्ता ने कोर्ट में केस डायरी सुपुर्द की है.
कोर्ट में सुपुर्द की गयी डायरी में कहा है कि मामले से जुड़ी कांड संख्या 35/19 की जांच के लिए घटनास्थल पर शस्त्र बल के साथ जाकर एक जेसीबी और नौ हाइवा के वाहन मालिकों और चालक का नाम, पता का सत्यापन किया गया, लेकिन लोगों ने कहा कि सभी वाहन इचाक के हैं.
इसलिए तुरंत पता नहीं चल पायेगा. एक दो दिनों में नाम पता कर बता देंगे. आगे डायरी में अनुसंधानकर्ता ने कहा है कि अनुसंधान जारी है. जबकि वाहन के नंबर के आधार पर उसके मालिक का नाम जिला परिवहन कार्यालय से आसानी से पता किया जा सकता था. इधर, इस मामले में वाहन मालिकों ने बेल के लिए कोर्ट में आवेदन दिया हुआ है.
गौरतलब है कि घटना के दिन पुलिस ने जेसीबी चालक संतोष कुमार को पकड़ा था. इसने मामले में हजारीबाग रेंज डीआइजी पंकज कंबोज और एसपी कन्हैया मयूर पटेल के समक्ष बयान दिया था कि जबरन मारपीट कर हाइवा में एसडीपीओ ने बालू लोड करवाया था. फिर पकड़ कर थाने ले गये. वहां पर 600 रुपये लेने के बाद शाम में छोड़ दिया. ऐसे में पुलिस की जांच पर सवाल उठ रहे हैं.
क्या था जेसीबी मालिक का बयान
जेसीबी के मालिक दीपू नायक ने डीआइजी और एसपी को बयान दिया था कि 14 फरवरी की सुबह छह बजे एसडीपीओ अनिल कुमार सिंह हमलोगों को जेसीबी के साथ बहबलपुर बुलवाये. फिर जबरन खाली डंपरों में बालू लोड करवाये. उन्होंने हमलोगों के साथ मारपीट भी की.
हमें और चालक को लाठी से मारा गया. फिर मेरी जेसीबी मशीन थाने ले गये. चालक को भी पकड़ लिया. उसी दिन पैसा देने पर उन्होंने चालक को छोड़ दिया. फिर सभी हाइवा मालिक और मैंने जेसीबी छोड़ने के एवज में मिल कर छह लाख रुपये एकत्र कर चंदन सिंह नामक व्यक्ति के माध्यम से दिया, लेकिन उन्होंने वाहन नहीं छोड़ा. उल्टे मामला मीडिया में आने पर 20 फरवरी को बड़कागांव थाने में केस भी दर्ज करा दिया.
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