पोषाहार का अलग मंत्रालय बनाया जाये

Updated at : 10 Jun 2014 1:23 AM (IST)
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पोषाहार का अलग मंत्रालय बनाया जाये

रांची: भारत में हरितक्रांति के जनक प्रो एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में गठित न्यूट्रिशन को-एलिशन के संयोजक डॉ राजीव टंडन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि पोषाहार का अलग मंत्रालय (होम फॉर न्यूट्रिशन) होना चाहिए. उन्होंने कहा है कि देश की कुल आबादी में से 60 करोड़ की आबादी कुपोषण की समस्या […]

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रांची: भारत में हरितक्रांति के जनक प्रो एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में गठित न्यूट्रिशन को-एलिशन के संयोजक डॉ राजीव टंडन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि पोषाहार का अलग मंत्रालय (होम फॉर न्यूट्रिशन) होना चाहिए. उन्होंने कहा है कि देश की कुल आबादी में से 60 करोड़ की आबादी कुपोषण की समस्या से जूझ रही है. ऐसे में स्वास्थ्य, खाद्य वितरण, महिला व बाल कल्याण मंत्रालय और अन्य विभागों के बीच समन्वय स्थापित करन्यूट्रिशन सेल को अधिक कारगर बनाना चाहिए.

डॉ टंडन दो दिवसीय झारखंड दौरे पर सोमवार को रांची पहुंचे. वह मंगलवार को ऊषा मार्टिन की सहयोगी इकाई कृषि ग्रामीण विकास केंद्र (केजीवीके) के कार्यक्रमों का जायजा लेंगे. उन्होंने कहा कि दलित, आदिवासी महिलाएं और अन्य में कुपोषण की समस्या अधिक पायी जा रही है. इसलिए प्रधानमंत्री को कुपोषण रोकने के लिए स्वंय हस्तक्षेप करना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय विकास परिषद (एनडीसी) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होती है, इसमें सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव हिस्सा लेते हैं. एनडीसी की तर्ज पर ही राष्ट्रीय प्रखंड विकास परिषद (एनबीडीसी) का गठन किया जाना चाहिए.

इसकी बैठक एनडीसी की बैठक के दूसरे दिन बुलायी जानी चाहिए, जिसमें छह हजार प्रखंडों के प्रखंड विकास पदाधिकारियों से प्रधानमंत्री सीधे रू-ब-रू हों. तभी देश भर में पोषण की दिशा में बेहतर और कारगर कदम उठाये जा सकेंगे. उन्होंने कहा कि सभी राज्यों में न्यूट्रिशन मिशन सेल स्थापित होना चाहिए, इसमें मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव खुद शामिल रहें. इस मिशन में आदिवासियों, दलितों के लिए चलाये जानेवाले कल्याणकारी कार्यक्रमों पर पारदर्शिता के साथ निर्णय लिया जाना चाहिए.

डॉ टंडन ने कहा कि केंद्र सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं जैसे राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यक्रम, राष्ट्रीय आजीविका मिशन, खाद्य सुरक्षा और अन्य के लिए संस्थागत सोसल ऑडिट होना चाहिए. उन्होंने योजना आयोग से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति को आधार मान कर न्यूट्रिशन पॉलिसी भी तय करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि योजना आयोग की सभी योजनाओं में स्वास्थ्य और पोषाहार से जुड़े कम से कम 25 प्रतिशत कार्यक्रम अनुसूचित जाति, जनजाति के लिए होनी चाहिए. प्रखंडों को एक इकाई के रूप में विकसित करने पर भी सोचा जाना चाहिए. वित्त मंत्रालय की ओर से भी जिलावार सोसाइटियों के लिए लक्ष्य आधारित बजट तय करना चाहिए. राज्यों के अनुसूचित जाति, जनजाति समुदायों के लिए स्वास्थ्य, सामाजिक सहकारिता मंत्रालय , स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत होनी चाहिए. दलितों और आदिवासियों के लिए चलायी जानेवाली समेकित बाल विकास कार्यक्रमों में आंगनबाड़ी केंद्रों और खाद्यान्न बैंक की जरूरत को और प्रमुखता देने की जरूरत है. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लोगों को स्वास्थ्य और पोषाहार कार्यक्रम से जोड़ने पर भी उन्होंने बल दिया. दलित उद्यमियों को न्यूट्रिशन कार्यक्रम में कम से कम 25 प्रतिशत की भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए. इसके अलावा किचन गार्डेनिंग, बागवानी और अन्य कृषि उत्पादन के क्षेत्र में अनुसूचित जाति, जनजाति के बीच पोषाहार का अधिक प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए. सभी आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए आंगनबाड़ी डिगिAटी दिवस का भी आयोजन किया जाना चाहिए, जिसमें ग्राम सभा की भी भागीदारी होनी चाहिए.

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