सीबीसीआइ की संस्था की जमीन खरीद की होगी सीआइडी जांच

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रांची : कैथोलिक बिशप कांफ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआइ) से जुड़ी संस्था सोसाइटी फॉर एजुकेशन नाॅर्थ इंडिया की ओर से रातू थाना क्षेत्र के होचर में चार एकड़ 44 डिसमिल और खूंटी के फूदी में 124 एकड़ 95 डिसमिल जमीन खरीदने की जांच अब सीआइडी से करायी जायेगी. पुलिस मुख्यालय ने इससे संबंधित आदेश जारी कर […]

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रांची : कैथोलिक बिशप कांफ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआइ) से जुड़ी संस्था सोसाइटी फॉर एजुकेशन नाॅर्थ इंडिया की ओर से रातू थाना क्षेत्र के होचर में चार एकड़ 44 डिसमिल और खूंटी के फूदी में 124 एकड़ 95 डिसमिल जमीन खरीदने की जांच अब सीआइडी से करायी जायेगी. पुलिस मुख्यालय ने इससे संबंधित आदेश जारी कर दिया है.
सोसाइटी फॉर एजुकेशन नाॅर्थ इंडिया पर आरोप है कि उसने चर्च व धर्म के प्रचार के नाम पर जमीन की खरीद कर लोगों के साथ गड़बड़ी की. जमीन खरीद से जुड़े तीन अलग-अलग मामले विभिन्न थानों में दर्ज है़ इनमें रांची के लोअर बाजार थाने में कांड संख्या 298/15, रातू थाने में कांड संख्या 99/18 और कोतवाली थाने में दर्ज कांड संख्या 114/18 दर्ज है़
फूदी में जमीन खरीदने का मामला : सीबीसीआइ ने नवंबर 2009 में सोसाइटी फॉर एजुकेशन नार्थ इंडिया के नाम से एनजीओ का रजिस्ट्रेशन कराया था. इसकी नियमावली में कहा गया है कि एनजीओ के सदस्य पांच या 10 रुपये महीने में योगदान करेंगे. बोर्ड में नौ में दो सदस्य कार्डिनल तेलेस्फोर पी टोप्पो और बिशप चार्ल्स सोरेंगे झारखंड से हैं.
इस एनजीओ ने जुलाई 2010 में खूंटी के फूदी में 124 एकड़ 95 डिसमिल जमीन खरीदी थी. एनजीओ ने जमीन खरीद के डीड में बताया है कि इसकी कीमत 2.26 करोड़ रुपये है. एनजीओ बनाने के साल भर में इतनी बड़ी कीमत की जमीन खरीदी गयी.
लेकिन चहारदीवारी के दौरान ग्रामीणों के विरोध करने पर जमीन बेचनेवाले संजय कुजूर पर सीबीसीआइ ने रांची के लोअर बाजार थाना में कांड संख्या 298/15 दर्ज करा दिया. आरोप लगाया गया कि जमीन के एवज में संस्था की ओर से संजय कुजूर को आठ करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. पैसे इंडियन ओवरसीज बैंक के चेक के माध्यम से दिये गये. पुलिस ने जांच में मामला सही पाया. जबकि डीड में उक्त जमीन की कीमत 2.26 करोड़ बतायी गयी थी. मामले का आरोपी संजय कुजूर फरार है.
अभी स्थिति बहुत खराब नहीं है. इसके बावजूद जिला कृषि पदाधिकारियों को आकस्मिक फसल योजना की तैयारी करने को कहा गया है. अगर अगले 10-15 दिनों तक बारिश की स्थिति ठीक नहीं रही, तो विकल्प पर विचार किया जायेगा. किसानों को चिंतित होने की जरूरत नहीं है.
– रमेश घोलप, निदेशक कृषि
मॉनसून के देर से आने के कारण खेती कुछ प्रभावित हुई है. अभी किसान एसआरआइ विधि से कम समय वाले बिचड़े का भी रोपा कर सकते हैं. धान के विकल्प पर भी किसान विचार कर सकते हैं.
– डॉ ए बदूद, कृषि निदेशक
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