जेन-जी के बीच गजल को लोकप्रिय बनाने में जुटे हैं रंजीत राजवाड़ा
गजल के युवा उस्ताद रंजीत राजवाड़ा- | Prabhat Khabar Network
प्रिंस ऑफ गजल रंजीत राजवाड़ा ने बताया कि कैसे वे जेन-जी के बीच गजल को लोकप्रिय बना रहे हैं। झारखंड के श्रोताओं के प्रति अपना खास लगाव भी साझा किया।
रामगढ़: गजल के युवा उस्ताद और ‘प्रिंस ऑफ गजल’ के नाम से प्रसिद्ध जयपुर (राजस्थान) के रंजीत राजवाड़ा ने कहा कि जेन-जी के जज्बात और उनके जज्बात काफी मेल खाते हैं. यही वजह है कि वे जेन-जी के प्रति अपने प्रेम और अपनापन को सहजता से महसूस और व्यक्त कर पाते हैं. उन्होंने कहा कि उनकी गजलों से जेन-जी को शांति, अपनापन और जीवन में खुशी मिले, इसका वे हमेशा प्रयास करते हैं.
रंजीत राजवाड़ा हजारीबाग में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे. उन्होंने सारेगामा 2010 के शो में प्रमुख गजल गायक के रूप में भी प्रसिद्धि हासिल की. देश-विदेश के मंचों पर गजल सुनने वाले श्रोताओं के बीच वे काफी लोकप्रिय हो रहे हैं. उन्होंने प्रभात खबर से गजल गायकी, आज के दौर में संगीत सुनने के माध्यम और श्रोताओं की पसंद समेत कई मुद्दों पर बातचीत की. अपनी सफलता को लेकर रंजीत राजवाड़ा ने एक शेर का जिक्र किया, जो उनकी फिक्र को ऊंची उड़ान देता है.
सवाल : युवा उस्ताद गजल को जेन-जी के बीच लोकप्रिय कैसे बना रहे हैं? जवाब : मेरी उम्र जेन-जी के करीब है, इसलिए मैं उनके मन-मस्तिष्क को आसानी से समझ पाता हूं. गजलों की कंपोजिशन मैं बेहद सरल तरीके से करता हूं. युवाओं को अपनापन महसूस हो, इसके लिये शब्दों का चयन भी उसी अनुरूप करता हूं और प्यार भरी गजलें प्रस्तुत करता हूं. लाइव कार्यक्रमों और रिकॉर्डिंग प्लेटफॉर्म पर मेरे दर्शकों में युवाओं की संख्या काफी अधिक है. नयी युवा पीढ़ी का गजल के प्रति लगाव बढ़ा है.
सवाल : झारखंड में आयोजित कार्यक्रमों में गजल के श्रोताओं से कितना प्यार मिलता है? जवाब : प्रभात खबर के कार्यक्रमों के तहत मैं पहले भी झारखंड के कई शहरों में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल रहा हूं. झारखंड के श्रोता गजल गायकी का खूब आनंद लेते हैं. लाइव परफॉर्मेंस में नयी गजलों के साथ पुराने एलबम और अन्य गजलों को भी श्रोता सुनना पसंद करते हैं.
सवाल : देश-विदेश के किन मंचों को आप अपने लिये यादगार मानते हैं? जवाब : हाल के दिनों में यूके के पांच शहरों में आयोजित लाइव कॉन्सर्ट में शामिल होकर गजल को ग्लोबल लेवल तक पहुंचाने का अवसर मिला. मैं भारत का पहला सिंगर बन गया हूं, जिसने लॉयड्स ऑफ लंदन में परफॉर्म किया है. इसके अलावा अमेरिका, मॉरीशस समेत देश-विदेश के कई मंचों पर परफॉर्म कर रहा हूं.
सवाल : युवा संगीत को करियर के रूप में चुन रहे हैं. एक अच्छे गायक और सफल कलाकार के बीच सबसे बड़ा अंतर आप क्या मानते हैं? जवाब : सबसे बड़ा अंतर सीखने का है. भजन, गजल, ठुमरी और बॉलीवुड संगीत, सभी विधाओं में सबसे पहले संगीत की बुनियादी समझ हासिल करना जरूरी है. मैं पिछले 22 वर्षों से संगीत सीख रहा हूं. संगीत प्रभु की ऐसी कृपा है, जो हर किसी को नहीं मिलती. युवाओं से मेरी अपील है कि संगीत सीखें और इसका आनंद लें. संगीत और गजलों को आखिरी सांस तक अपने साथ लेकर चलें.
सवाल : गजल और संगीत के बड़े कलाकारों से मिलने और उनके साथ काम करने का आपका अनुभव कैसा रहा? जवाब : उस्ताद गुलाम अली के साथ परफॉर्म किया है. लता मंगेशकर को अपनी गजल सुनाने का अवसर मिला. फिल्म ‘लब्जों में प्यार’ में कंपोजर के रूप में भी मेरा योगदान रहा. ये सभी हमारे जीवन के यादगार पल रहे हैं. इस जीवन में मुझे बहुत सारा आशीर्वाद मिला है. बस कोशिश है कि इस जिम्मेदारी को अच्छे से निभाता रहूं.
सवाल : गजल गायकी के अलावा अपनी जीवनशैली से युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे? जवाब : मेरी पहली प्राथमिकता है कि जीवन को स्वस्थ रखते हुए अपनी पसंद का खाना खाएं. संघर्ष के दिनों के साथियों को हमेशा याद रखें और उनके लिये भी समय निकालें. जिस चीज के प्रति आपका लगाव है, उसी रास्ते पर लगातार आगे बढ़ते रहें.
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