नई सड़क में छह महीने में दरार, ग्रामीण बोले- रात में मंडरा रहा हादसे का खतरा

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छह महीने में ही सड़क पर दिखने लगीं दरारें | Prabhat Khabar Network

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पाटन प्रखंड की गम्हेथा जाने वाली सड़क निर्माण के महज छह महीने बाद ही दरारें पड़ने लगी हैं. सड़क की गिरती गुणवत्ता से राहगीरों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है.

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रामनरेश तिवारी की रिपोर्ट

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पाटन (पलामू): जिले के पाटन प्रखंड के गम्हेथा जाने वाली सड़क निर्माण के महज छह महीने बाद ही जगह-जगह दरारें पड़ने लगी हैं. सड़क की मौजूदा स्थिति को देखकर निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. सड़क पर उभरी दरारें जहां निर्माण में बरती गई अनियमितता की ओर इशारा कर रही हैं, वहीं राहगीरों के लिए दुर्घटना का खतरा भी बढ़ गया है.

रात में बढ़ जाता है दुर्घटना का खतरा

ग्रामीणों का कहना है कि दिन के समय सड़क पर पड़ी दरारें दिखाई दे जाती हैं, लेकिन रात में इनका पता नहीं चलने के कारण बाइक सवार और अन्य वाहन चालक दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं. ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से सड़क की जांच कराने और निर्माण में गड़बड़ी मिलने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है.

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जिप सदस्य ने जतायी नाराजगी

पाटन पश्चिमी के जिला परिषद सदस्य जयशंकर सिंह उर्फ संग्राम सिंह ने सड़क की स्थिति पर नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपए की लागत से बनी सड़क छह माह में ही दरक गई. इससे स्पष्ट है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों और प्राक्कलन की अनदेखी की गई है. उन्होंने कहा कि यदि सड़क निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन किया गया होता, तो इतनी कम अवधि में सड़क पर दरारें नहीं पड़तीं.

बोले- पदाधिकारी बदलते हैं, समस्या जस की तस

जिप सदस्य ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा, "हर डाल पर उल्लू बैठा है, अंजाम-ए-गुलिस्तां क्या होगा." उन्होंने कहा कि शिकायत करने के बावजूद यदि सुनवाई नहीं होती है, तो आखिर ग्रामीण अपनी समस्या लेकर कहां जायें. पदाधिकारी बदलते रहते हैं, लेकिन व्यवस्था जस की तस बनी रहती है. उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण के नाम पर सरकारी राशि की बंदरबांट की गई है.

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तकनीकी जांच की मांग, आंदोलन की चेतावनी

जयशंकर सिंह ने कहा कि अब आंदोलन ही एकमात्र रास्ता बचा है. वे सड़क की स्थिति से उपायुक्त को अवगत करायेंगे और निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग करेंगे. उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण में प्राक्कलन के अनुरूप कार्य हुआ है या नहीं, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. जांच में अनियमितता सामने आने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए.

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