लोहरदगा : 25 साल की मंजू और 5 साल की दिव्यांग आकांक्षा को नहीं मिल रहा सरकारी लाभ, प्रशासन से गुहार
मानसिक रूप से बीमार बच्ची | Prabhat Khabar Network
लोहरदगा के मेरले गांव में दो बच्चियां भूख और बीमारी से जूझ रही हैं. दस्तावेजों के अभाव में सरकारी योजनाओं से वंचित इन बच्चियों को प्रशासन की मदद का इंतजार है.
किस्को (लोहरदगा). किस्को प्रखंड की हिसरी पंचायत के मेरले गांव से सामने आई दो बच्चियों की स्थिति ने सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित लोगों की मुश्किलों को सामने ला दिया है. एक ओर करीब 25 वर्षीय मंजू कुमारी अपने माता-पिता की मौत के बाद अकेले जीवन गुजार रही हैं, वहीं दूसरी ओर 5 वर्षीय आकांक्षा उरांव जन्म से ही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और दिव्यांगता से जूझ रही है. दोनों ही परिवारों की स्थिति ऐसी है कि जरूरी दस्तावेज नहीं होने के कारण उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है.
अकेली जिंदगी गुजार रही मंजू
मेरले के जुमरा टोली निवासी मंजू कुमारी, पिता स्व. जगदीश उरांव, शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर हैं. ग्रामीणों के अनुसार वह ठीक से बातचीत भी नहीं कर पाती हैं. उनके माता-पिता का निधन हो चुका है. एक बहन की शादी हो चुकी है, जबकि दो भाई रोजगार की तलाश में बाहर चले गए हैं.
देखभाल करने वाला कोई नहीं
ऐसे में मंजू की देखभाल करने वाला कोई नहीं है. उनके रहने का भी कोई निश्चित ठिकाना नहीं है और वह गांव में इधर-उधर भटकती रहती हैं. ग्रामीणों के मुताबिक कई बार उन्हें भोजन के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है. सबसे बड़ी परेशानी यह है कि मंजू के पास आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र और राशन कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेज नहीं हैं. इस वजह से वह सरकारी योजनाओं से नहीं जुड़ पाई हैं.
पीएलबी ने लिया मामले का संज्ञान
मामले की जानकारी मिलने के बाद सोमवार को पीएलबी शाहिद हुसैन और कलिंदर उरांव ने मंजू से मुलाकात कर उनकी स्थिति की जानकारी ली. उन्होंने बताया कि मामले की रिपोर्ट जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) को भेजी जाएगी, ताकि मंजू को संरक्षण, इलाज, सुरक्षित आश्रय और पात्र सरकारी योजनाओं से जोड़ने की पहल की जा सके.
पांच साल की आकांक्षा भी इलाज से वंचित
मेरले के बांध टोली की रहने वाली 5 वर्षीय आकांक्षा उरांव, पिता अनुज उरांव, जन्म से ही शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं और दिव्यांगता से जूझ रही है. परिवार बच्ची का बेहतर इलाज कराना चाहता है, लेकिन आर्थिक परेशानी के कारण वह सक्षम नहीं है. परिवार के मुताबिक आकांक्षा का आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र भी नहीं बन पाया है. इसके कारण वह दिव्यांग पेंशन, आयुष्मान योजना और अन्य सरकारी सहायता का लाभ नहीं ले पा रही है.
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प्रशासन से तत्काल मदद की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि मंजू और आकांक्षा की स्थिति केवल दो परिवारों की परेशानी नहीं है, बल्कि यह भी बताती है कि दस्तावेजों और जानकारी के अभाव में जरूरतमंद लोग सरकारी योजनाओं से दूर रह जाते हैं. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और स्वास्थ्य विभाग से दोनों मामलों का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है. उन्होंने दोनों की स्वास्थ्य जांच और इलाज कराने, जरूरी दस्तावेज बनवाने, सुरक्षित देखरेख की व्यवस्था करने और पात्र सरकारी योजनाओं से जोड़ने की दिशा में जल्द कार्रवाई की अपील की है.

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