सेन्हा में आम की बंपर पैदावार की उम्मीद, किसानों के खिले चेहरे

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सेन्हा में आम की बंपर पैदावार की उम्मीद, किसानों के खिले चेहरे

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सेन्हा़ प्रखंड क्षेत्र में इस वर्ष आम के पेड़ों पर आयी मंजर की बहार से किसानों में भारी उत्साह है. पेड़ों पर पत्तों से अधिक मंजर लदे हुए हैं, जिसे देखकर बागवानी करने वाले किसान बेहतर पैदावार की उम्मीद लगाये बैठे हैं. यदि मौसम अनुकूल रहा और ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदा नहीं आयी, तो इस बार क्षेत्र में आम का बंपर उत्पादन होना तय है. बिरसा हरित ग्राम योजना से बदली तस्वीर : प्रखंड के चौकनी, उगरा, चितरी डांडू, भड़गांव, अरु और एकागुड़ी सहित कई गांवों के किसान बिरसा हरित ग्राम योजना, मनरेगा और जेएसएलपीएस के सहयोग से आम की खेती कर रहे हैं. यहां लंगड़ा, आम्रपाली, मालदा और हिमसागर जैसी उन्नत किस्मों के आम लगाये गये हैं. वर्तमान में मनरेगा के माध्यम से लगभग 200 एकड़ में आम बागवानी की गयी है, जिसमें से करीब 90 एकड़ में फल आने शुरू हो गये हैं. आर्थिक उन्नति का जरिया : यह बागवानी न केवल किसानों के लिए आमदनी का जरिया है, बल्कि ग्रामीण युवाओं को रोजगार भी दे रही है. देखरेख के लिए रखे गये युवाओं को प्रति माह 5,000 रुपये तक मिल जाते हैं. किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बाजार जाने की भी आवश्यकता नहीं पड़ती. व्यापारी फल आने के साथ ही आधा पैसा अग्रिम देकर सौदा पक्का कर लेते हैं. एक पेड़ से औसतन 40 से 45 किलो आम का उत्पादन होता है, जिसे 30 से 35 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जाता है. इस प्रकार, एक पौधे से किसान 900 से 1,000 रुपये तक कमा रहे हैं. साथ ही, आम के पेड़ों के बीच किसान आलू, गोभी, मटर, भिंडी, टमाटर और मिर्च जैसी सब्जियों की खेती कर दोहरा लाभ भी ले रहे हैं. क्षेत्र के किसानों का बागवानी के प्रति बढ़ता रुझान आत्मनिर्भरता की नयी गाथा लिख रहा है.

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