400 साल पुराना बुढ़वा महादेव मंदिर, जहां खुले आसमान के नीचे विराजे भोलेनाथ से जुड़ी है लोहरदगा की गहरी आस्था

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बुढवा महादेव मंदिर में सि्थत शिवलिंग | Prabhat Khabar

लोहरदगा के प्राचीन बुढ़वा महादेव मंदिर की महिमा और इतिहास जानें. यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है, सावन में उमड़ती है भक्तों की भारी भीड़.

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लोहरदगा से गोपी कृष्ण कुंवर की रिपोर्ट

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लोहरदगा जिले के महादेव टोली में स्थित प्राचीन बुढ़वा महादेव मंदिर लोहरदगा की धार्मिक आस्था और सनातन संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र है. स्थानीय लोकमान्यताओं और परंपराओं के अनुसार यहां विराजमान शिवलिंग करीब 400 वर्ष पुराना माना जाता है. मान्यता है कि 17वीं शताब्दी से ही इस स्थान पर भगवान शिव शिवलिंग के रूप में पूजे जाते रहे हैं.बताया जाता है कि प्रारंभिक दौर में यहां किसी भव्य मंदिर का निर्माण नहीं था. बाबा भोलेनाथ खुले आसमान के नीचे ही विराजमान थे और स्थानीय श्रद्धालु उनकी पूजा-अर्चना करते थे.

प्राचीन स्वरूप और लंबे समय से चली आ रही धार्मिक परंपरा के कारण ही भगवान शिव को श्रद्धालु आदरपूर्वक ‘बुढ़वा महादेव’ के नाम से पुकारते हैं.स्थानीय लोगों में ऐसी गहरी आस्था है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से यहां पहुंचकर बाबा का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है. इसी विश्वास के कारण लोहरदगा शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां मन्नत मांगने और जलार्पण करने पहुंचते हैं.

श्रावण में बढ़ जाता है महत्व

श्रावण मास में बुढ़वा महादेव मंदिर की रौनक देखते ही बनती है. पूरे महीने शिवभक्तों की आवाजाही बढ़ जाती है। श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. विभिन्न अवसरों पर बाबा का भव्य श्रृंगार भी किया जाता है.

1975 में हुआ मंदिर का जीर्णोद्धार

समय के साथ इस प्राचीन धार्मिक स्थल को व्यवस्थित स्वरूप देने का प्रयास किया गया। स्थानीय जानकारी के अनुसार वर्ष 1975 में जैन साहू चुन्नीलाल तथा स्थानीय समितियों और श्रद्धालुओं के सहयोग से मंदिर परिसर का जीर्णोद्धार एवं निर्माण कराया गया। इसके बाद मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं को पहले की अपेक्षा बेहतर सुविधाएं मिलने लगीं.आज बुढ़वा महादेव केवल पूजा का स्थल नहीं, बल्कि लोहरदगा की धार्मिक विरासत, लोकआस्था और सदियों पुरानी परंपरा का प्रतीक बन चुका है. मंदिर में पहुंचने वाला हर श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना करता है.

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सच्चे मन से मांगी मुराद होती है पूरी : मदन मोहन पांडेय

मंदिर से जुड़े मदन मोहन पांडेय ने बताया कि इस मंदिर के दरबार में सच्चे मन से की गई प्रार्थना और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है. यहां आने वाले श्रद्धालु बाबा का जलाभिषेक कर अपनी मनोकामना मांगते हैं और ऐसी मान्यता है कि बाबा भोलेनाथ भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं. उन्होंने कहा कि बुढ़वा महादेव लोहरदगा की प्राचीन धार्मिक धरोहर हैं.वर्षों से यहां पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है. सावन के महीने में मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है और दूर-दराज से भी भक्त बाबा के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं.

यहां लोगों की आस्था जुड़ी हुई है और भोलेनाथ लोगों की मनोकामना पूरी करते हैं. मदन मोहन पांडेय ने श्रद्धालुओं से मंदिर की धार्मिक एवं ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित रखने तथा परिसर की स्वच्छता बनाए रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि बुढ़वा महादेव के प्रति लोगों की आस्था पीढ़ी-दर-पीढ़ी मजबूत होती जा रही है और यह स्थल आने वाले समय में भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना रहेगा.

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