लीड :::7::: प्रकृति की सेवा करें : धर्मगुरु

Published at :15 Nov 2014 7:02 PM (IST)
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राष्ट्रीय सरना धर्म महासम्मेलन का आयोजन किया गयाफोटो- एलडीजीए-40 धर्मगुरु का स्वागत करती महिलाएं,एलडीजीए-41 सम्मेलन स्थल जाते धर्मगुरु, एलडीजीए-42 उपस्थित लोग, एलडीजीए-43 मंचासीन अतिथि.लोहरदगा. राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा द्वारा राष्ट्रीय सरना धर्म महासम्मेलन का आयोजन बीएस कॉलेज स्टेडियम में किया गया. मुख्य अतिथि सरना धर्म गुरु बंधन तिग्गा थे. कार्यक्रम का शुभारंभ झखरा कुंबा […]

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राष्ट्रीय सरना धर्म महासम्मेलन का आयोजन किया गयाफोटो- एलडीजीए-40 धर्मगुरु का स्वागत करती महिलाएं,एलडीजीए-41 सम्मेलन स्थल जाते धर्मगुरु, एलडीजीए-42 उपस्थित लोग, एलडीजीए-43 मंचासीन अतिथि.लोहरदगा. राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा द्वारा राष्ट्रीय सरना धर्म महासम्मेलन का आयोजन बीएस कॉलेज स्टेडियम में किया गया. मुख्य अतिथि सरना धर्म गुरु बंधन तिग्गा थे. कार्यक्रम का शुभारंभ झखरा कुंबा से किया गया. सोमनाथ उरांव के नेतृत्व में पूजा-अर्चना की गयी. इसके पूर्व समिति सदस्यों द्वारा मुख्य अतिथि बंधन तिग्गा का स्वागत आदिवासी रीति-रिवाज से करते हुए सभा स्थल तक लाया गया. धर्म गुरु की उपस्थिति में झंडा गड़ी कार्यक्रम किया गया. महासम्मेलन में धर्मगुरु बंधन तिग्गा ने कहा कि परिस्थिति जैसा भी आये मां सरना एवं प्रकृति की सेवा से कभी विमुख नहीं होना चाहिए. सरना मां की ही देन है कि झारखंड के अलावा बिहार, बंगाल, ओडि़शा, छत्तीसगढ़, असम आदि राज्यों में सरना धर्म का प्रचार हुआ. उन्होंने कहा कि सरना आदिवासी इस पृथ्वी के श्रेष्ठतम बीज हैं, जिन्होंने दुनिया को आगे बढ़ाया. इसके पहले कोई धर्म नहीं था. इसका उदाहरण मोहनजोदड़ो, सिंधु घाटी की सभ्यता है. उन्होंने मुड़मा जतरा के इतिहास पर भी प्रकाश डाला. कहा कि सरना धर्म महान है. आप विचलित न हो. संघर्ष करने की आदत डालें. आने वाला कल शुभ संदेश लेकर आयेगा. विशिष्ट अतिथि विधायक कमल किशोर भगत ने कहा कि सरना धर्म को लेकर मै शुरू से ही कर्तव्यनिष्ठ रहा हूं. मैंने समाज के विकास के लिए सरना कोड का मामला विधानसभा में उठाया. विशिष्ट अतिथि सुखदेव भगत ने कहा कि धर्म, संस्कृति की रक्षा के लिए लगातार प्रयासरत रहा हूं. जहां भी धार्मिक सम्मेलन का आयोजन हुआ है मैं वहां पहुंच कर अपने भाई बहनों का मार्गदर्शन किया हूं. विशिष्ट अतिथि मुकेश बिरुआ ने कहा कि सरना आदिवासियों द्वारा ही प्रकृति में आने वाले विपदाओं का पूर्वानुमान शुरू किया जिसे आज वैज्ञानिक भी मानते हैं. गौतम उरांव ने कहा कि आदिवासी परिवार में जन्म लिये हो, आप सब श्रेष्ठ हो. क्योंकि दुनिया के सारे धर्मो का जनक सरना धर्म है. जलेश्वर उरांव ने पहान, पुजार, महतो को गोलबंद करने के उपायों पर प्रकाश डालते हुए सामाजिक संस्था में पहान, पुजार, महतो के महत्व को बताया. सभा को सुखदेव उरांव, विगलाल उरांव, प्रकाश उरांव, फुलदेव उरांव, सोमदेव उरांव ने भी संबोधित किया. मौके पर आकाश भगत, शिवशंकर टाना भगत, बालमुनी उरांव, बिरसा उरांव, विष्णु उरांव, फुलकुमारी, नीलम आदि मौजूद थे.

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