चंदवा : आवासीय विद्यालय में रहने की जगह नहीं, बिना पढ़े परीक्षा

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
सुमित कुमार
झारखंड आवासीय बालिका विद्यालय, हेरहंज
चंदवा : हेरहंज प्रखंड मुख्यालय स्थित झारखंड आवासीय बालिका विद्यालय में छठी कक्षा के लिए सत्र 2019-20 में 47 बच्चियों का नामांकन किया गया. स्कूल में जगह नहीं होने के कारण नामांकन के बाद ही उन्हें घर वापस भेज दिया गया. नामांकन के बाद एक दिन भी इन छात्राओं ने कक्षा नहीं की. अब परीक्षा की घड़ी आ गयी है, तो वह सीधे परीक्षा देंगी.
दसवीं कक्षा की छात्राओं को परीक्षा के बाद घर भेज दिया जायेगा, जिसके बाद इन छात्राओं की बुलाकर परीक्षा ली जायेगी. सातवीं कक्षा में पहुंचने पर इन छात्राओं को स्कूल में जगह मिलेगी. हाल यही रहा, तो फिर नये सत्र में छठी कक्षा में नामांकन लेनेवाली छात्राओं को भी इसी तरह घर लौटना पड़ेगा. इसका कारण विद्यालय में कमरों का अभाव है. विद्यालय का अपना भवन नहीं बन पाया है. यह उत्क्रमित मध्य विद्यालय घुर्रे में चल रहा है.
पांच कक्षाओं में कुल 237 छात्राएं हैं नामांकित : वर्ग छह में नामांकित 47 छात्राओं में अनुसूचित जाति की 12, अनुसूचित जनजाति की 22 व ओबीसी कोटे की 13 छात्राएं शामिल हैं.
विद्यालय की वार्डन एलिजाबेथ कुमुद टोप्पो ने बताया कि वर्तमान में विद्यालय में कुल 237 छात्राएं नामांकित हैं. इनमें कक्षा छह में 47, कक्षा सात में 50, कक्षा आठ में 50, कक्षा नवम में 43 तथा कक्षा दस में 47 छात्राएं शामिल हैं. कक्षा छह की सभी 47 छात्राएं कमरों के अभाव के कारण विद्यालय में नहीं रहती हैं. पूर्व में यह बालूमाथ स्थित कस्तूरबा आवासीय बालिका उवि में संचालित हो रहा था.
वर्ष 2017 से उच्च मध्य विद्यालय घुर्रे में झारखंड आवासीय बालिका विद्यालय संचालित हो रहा है. यहां कुल 13 कमरे हैं. इनमें से आठ कमरे आवासीय विद्यालय के लिए मिले हैं. शेष पांच कमरों में उच्च मध्य विद्यालय घुर्रे की पढ़ाई होती है. मिले आठ कमरों में चार में कक्षाएं चलती हैं. वहीं तीन में बच्चियां पढ़ाई भी करती हैं और सोती भी हैं. शेष एक कमरे में हम सभी स्टाफ रहते हैं. इसी कमरे में स्टोर का भी सामान रहता है. इधर उच्च मध्य विद्यालय घुर्रे के प्राचार्य पवन कुमार ने कहा कि कमरों के अभाव में यहां की कक्षा भी प्रभावित होती है.
क्या कहती हैं वार्डेन
कमरे कम है, छात्राओं को भेजा गया है घर
छात्राओं को घर भेजने के संबंध में वार्डेन एलिजाबेथ कुमुद टोप्पो ने कहा कि विद्यालय में कमरों का अभाव है. 2019-20 में कक्षा छह में जिन छात्राओं का नामांकन किया गया था, वे सभी अपने-अपने घरों में हैं. नये भवन में जाने के बाद ही स्थिति सामान्य हो पायेगी. विद्यालय की समस्याओं को लेकर उपायुक्त और उच्चाधिकारियों को कई बार अवगत करा चुकी हूं. छात्राओं को समुचित शिक्षा नहीं दे पाने के कारण मैं खुद दुखी हूं.
ठेकेदार की लापरवाही के कारण अब तक नहीं बना भवन
प्रखंड मुख्यालय स्थित हुर मोड़ के समीप वर्ष 2016 से झारखंड आवासीय बालिका विद्यालय का निर्माण कार्य शुरू हुआ था. विभागीय उदासीनता व संवेदक की लापरवाही के कारण भवन का निर्माण कार्य अब तक अधूरा है.
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