सरहुल पर्व प्रकृति से प्रेम का प्रतीक : एसपी

Updated at : 31 Mar 2017 7:27 AM (IST)
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सरहुल पर्व प्रकृति से प्रेम का प्रतीक : एसपी

आकर्षक झांकी निकाली गयी, मांदर के थाप पर थिरके आदिवासी समुदाय के लोग कोडरमा बाजार : झारखंड का मुख्य पर्व सरहुल गुरुवार को जिले में पूरे पारंपरिक तरीके के साथ धूमधाम से मनाया गया. सरहुल को लेकर गुरुवार को सुबह नौ बजे सरना स्थल टीवी टावर सुजानपुर में पाहन नंदू उरांव द्वारा पूजा-अर्चना के बाद […]

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आकर्षक झांकी निकाली गयी, मांदर के थाप पर थिरके आदिवासी समुदाय के लोग
कोडरमा बाजार : झारखंड का मुख्य पर्व सरहुल गुरुवार को जिले में पूरे पारंपरिक तरीके के साथ धूमधाम से मनाया गया. सरहुल को लेकर गुरुवार को सुबह नौ बजे सरना स्थल टीवी टावर सुजानपुर में पाहन नंदू उरांव द्वारा पूजा-अर्चना के बाद शोभायात्रा निकाली गयी. आकषर्क रूप से सजाये गये शोभायात्रा सरना स्थल से निकल कर रांची-पटना रोड होते हुए कोडरमा बाजार गांधी चौक पहुंचा. यहां से आदिवासी युवक-युवतियां मांदर थाप पर आकर्षक नृत्य करते हुए मरियम पूर स्थित डंगरा पहाड़ तक गये. मुख्य समारोह का आयोजन किया गया.
समाज के लोगों द्वारा आगंतुक अतिथियों का स्वागत पारंपरिक तरीके से करने के बाद सभी अतिथि को पगड़ी पहनायी गयी. इस दौरान जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आये आदिवासी समुदाय के लोगों के द्वारा विविध कार्यक्रम आयोजित किये गये. बतौर मुख्य अतिथि एसपी सुरेंद्र कुमार झा ने कहा कि सरहुल का त्योहार प्रकृति से प्रेम का प्रतीक है, एक ओर जहां लोग आधुनिक युग में प्रकृति के साथ दोहन करने में लगे हुए हैं.
इससे इतर आदिवासी समुदाय इसे संरक्षित करने में लगे हुए हैं. कहा कि आदिवासी समुदाय अपने बच्चों को शिक्षित जरूर करें, ताकि वे मुख्य धारा में शामिल होकर विकास कर सकें. एसडीओ प्रभात कुमार बरदियार ने आदिवासियों के लिए चलायी जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की चर्चा करते हुए कहा कि जागरूकता के अभाव में लोग योजना के लाभ से वंचित हो जाते हैं. कहा कि शिक्षा से ही इस समाज में जागरूकता आ सकती है. श्री बरदियार ने इसके लिए शिक्षित युवकों को आगे आने का आह्वान करते हुए कहा कि उनके सहयोग से ही आदिवासी समाज में व्याप्त गलत परंपरा को दूर किया जा सकता है.
कोडरमा सीओ अनुज बांडो ने कहा कि आज भी आदिवासी समाज में शराब व हड़िया जैसे गलत परंपरा हावी है. इनके सर्वांगीण विकास में नशा बाधक बना हुआ हैं. उन्होंने आदिवासियों से नशा मुक्त समाज बनाने में युवाओं को आगे आने की जरूरत बताया. इसके पूर्व आदिवासी संघ के अध्यक्ष पवन माइकल कुजूर ने कहा कि तमाम प्रयासों के बावजूद में हमारा समाज शिक्षा, रोजगार समेत सभी क्षेत्रों में पिछड़ा हुआ है.
उन्होंने समाज की उन्नति के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए विभागीय अधिकारियों से पहल की मांग की. कार्यक्रम को सरहुल समिति के अध्यक्ष प्राण मरांडी, सचिव प्रमोद किंडो, बीडीओ मिथिलेश चौधरी आदि ने भी संबोधित किया.
मौके पर अनिल हंसदा, मिल्यानुस कुजूर, नंदू उरांव, गंगा राम मुंडा, रजनी बड़ा, बेरमेंड एक्का, जान सोरेन, फ्राशिस कोड, बेंजामिन लकड़ा, मनोज डांग, रजत लकड़ा, रवींद्र मुंडा, बेंजामिन एक्का, प्रतिमा एक्का, सलोमी तिरू, सरिता तिर्की, मरकच्चो बीडीओ, सीओ बालेश्वर राम समेत भारी संख्या में लोग मौजूद थे. संचालन उषा कांति लकड़ा ने किया.
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