आदिवासियों का हक छीन रही ही है रघुवर सरकार : दयामनी

Updated at : 01 Apr 2017 12:57 AM (IST)
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आदिवासियों का हक छीन रही ही है रघुवर सरकार : दयामनी

आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच ने निकाली रैली, सभा की सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन कर जमीन को पूंजीपतियों के हाथ गिरवी रखने की हो रही तैयारी तोरपा : आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच द्वारा शुक्रवार को तोरपा में रैली निकाली गयी व सभा का आयोजन किया गया. विभिन्न गांवों के लोग कोटेंगसेरा स्थित पेट्रोल पंप […]

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आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच ने निकाली रैली, सभा की
सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन कर जमीन को पूंजीपतियों के हाथ गिरवी रखने की हो रही तैयारी
तोरपा : आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच द्वारा शुक्रवार को तोरपा में रैली निकाली गयी व सभा का आयोजन किया गया. विभिन्न गांवों के लोग कोटेंगसेरा स्थित पेट्रोल पंप के पास जमा हुए. यहां से रैली निकाली गयी. रैली खसुवाटोली, कर्रा मोड़, मेन रोड होते तोरपा ब्लॉक परिसर पहुंच कर सभा में परिणत हो गयी. सभा को संबोधित करते हुए मंच की संयोजिका दयामनी बरला ने कहा कि आज आदिवासी मूलवासी का अस्तित्व खतरे में हैं. इसे बचाने के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन कर यहां की जमीन को पूंजीपतियों के हाथ गिरवी रखने की तैयारी की जा रही है. देश-विदेश के उद्योगपतियों को बुलाकर यहां की जमीन उन्हें सौंपी जा रही है, जो गलत है. मोमेंटम झारखंड का आयोजन इसी के लिए किया गया था. दयामनी ने कहा कि यहां की पारंपरिक शासन व्यवस्था को खत्म किया जा रहा है. रघुवर सरकार आदिवासी-मूलवासी का हक व अधिकार छीनने का काम कर रही है. सभा की अध्यक्षता दयाल कोनगाड़ी तथा संचालन वेलेंटीन तोपनो ने किया. मौके पर तुरतन तोपनो, बिरसा तोपनो, राजू लोहरा, मोजेज तोपनो, एनेम तोपनो, ललिता देवी, बुधवा पाहन, रेजन तोपनो आदि उपस्थित थे.
सीअो को सौंपा गया मांग पत्र : सभा की समाप्ति के बाद तोरपा सीअो को मांग पत्र सौंपा गया. मांग पत्र में सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन वापस लेने, स्थानीय नीति का निर्धारण भाषा-संस्कृति के आधार पर करने, गांव की सभी प्रकार की जमीन को भूमि बैंक में नहीं डालने, रैयतों की खतियानी जमीन व ग्राम सभा की जमीन को ऑनलाइन नहीं करने, खेतों में लिफ्ट एरिगेशन के माध्यम से पानी पहुंचाने, मनरेगा मजदूरी दर पांच सौ रुपये करने तथा 2015-16 में किसानों द्वारा कराये गये फसल बीमा का भुगतान शीघ्र करने की मांग शामिल है.
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