कामगारों ने रोका कारखाने से कोयले का कारोबार

Updated at : 09 Feb 2017 9:40 AM (IST)
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कामगारों ने रोका कारखाने से कोयले का कारोबार

खलारी : खलारी सीमेंट फैक्टरी के कामगारों ने कारखाने से चल रहे कोयला कारोबार पर रोक लगा दी. बुधवार की सुबह कामगार कारखाने से बाहर निकल कर फैक्टरी के मुख्य द्वार पर आ गये और प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की. उल्लेखनीय है कि फैक्टरी प्रबंधन कोयले के कारोबार के लिए सीमेंट कारखाना परिसर और फैक्टरी […]

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खलारी : खलारी सीमेंट फैक्टरी के कामगारों ने कारखाने से चल रहे कोयला कारोबार पर रोक लगा दी. बुधवार की सुबह कामगार कारखाने से बाहर निकल कर फैक्टरी के मुख्य द्वार पर आ गये और प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की. उल्लेखनीय है कि फैक्टरी प्रबंधन कोयले के कारोबार के लिए सीमेंट कारखाना परिसर और फैक्टरी के रेलवे साइडिंग का उपयोग करती है.
कामगारों का कहना है कि सीमेंट कारखाना अब केवल ग्रांइडिंग यूनिट बन गया है. कारखाना में अब न तो क्लीन है न ही पावर प्लांट. इसलिए अब यहां सीमेंट बनाने के लिए कोयले की कोई जरूरत नहीं है. कामगारों ने एक स्वर में कहा कि कारखाना परिसर से कोयला कारोबार नहीं चलने देंगे. कारखाना परिसर को कोयला डंप यार्ड बना दिया गया है. कामगार विवेका सिंह ने कहा कि दो वर्ष का बोनस बकाया है. जिसमें 2014-15 का 3500 रुपये तथा 2015-16 का 7500 रुपये अर्थात कुल 10500 रुपये बोनस मद में बकाया है.
विरोध कर रहे कामगारों ने यूनियन नेताओं को भी आड़े हाथों लेते हुए उनकी नियत पर सवाल उठाया. कहा कि जेनरल सेक्रेटरी फैक्टरी प्रबंधन से दो-दो वेतन लेते हैं और इसकी एवज में कामगारों का हित न देख प्रबंधन के हित का ख्याल रखते हैं. कामगारों ने स्पष्ट कहा कि कारखाना सीमेंट का है, प्रबंधन सीमेंट बनाने का काम करे. कारखाना परिसर से कोयला कारोबार की इजाजत नहीं देंगे. यूनियन नेताओं से नाराज कामगारों ने कहा कि भविष्य में यूनियन के साथ प्रबंधन की वार्ता को नहीं मानेंगे. प्रबंधन को आगे से कोई बात करना है तो कामगारों से सीधे बात करे.
इको सीमेंट द्वारा खलारी सीमेंट फैक्टरी का प्रबंधन अपने हाथों में लेने के मुद्दे पर कामगारों ने कहा कि इको सीमेंट प्रबंधन को भी यदि कामगारों से कोई समझौता करना है तो वह यूनियन से बात न कर सीधे कामगारों से बात करे. इससे पहले कामगार फैक्टरी में कोयला का काम देख रहे प्रबंधन के संजय झा से बात की. कोयला काम का विरोध करनेवाले कामगारों में विवेका सिंह, मनोज बोस, नयन कुमार दास, शिवचरण सिंह, रामेश्वर गंझू, इसराफिल, मधु, शंकर बोदरा, बनारसी, आर मिश्रा व अन्य कामगार शामिल हैं.
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