झारखंड में 26 साल से वन अधिकारियों की नियुक्ति नहीं, 61 रेंजरों के भरोसे 23 हजार वर्ग किमी जंगल की सुरक्ष

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हाथों में डॉक्यूमेंट ली हुई महिला अधिकारी (ai generated)

झारखंड में रेंजरों की नियुक्ति प्रक्रिया रद्द हो गई है, जिससे राज्य के वनक्षेत्रों पर खतरा मंडरा रहा है. स्वीकृत पदों की तुलना में मात्र 15% रेंजरों की तैनाती के कारण अवैध कटाई और शिकार जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं.

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Jharkhand Ranger Recruitment Exam Cancellation : झारखंड में रेंजर की नियुक्ति परीक्षा एक बार फिर लटक गया है. राज्य सरकार ने जेपीएससी से चल रही नियुक्ति परीक्षा रद्द कर दी है. इससे 26 साल में पहली बार हो रही परीक्षा पर ग्रहण लग गया है. झारखंड का कुल वनक्षेत्र 23,765 वर्ग किमी है, पर इसकी सुरक्षा का जिम्मा मात्र 61 वन क्षेत्र पदाधिकारियों (रेंजर) के भरोसे है, जबकि राज्य में रेंजरों के कुल 383 पद स्वीकृत हैं. राज्य में कुल स्वीकृत पदों के मुकाबले मात्र 15% रेंजर ही तैनात हैं. उधर, पड़ोसी राज्यों- छत्तीसगढ़, ओडिशा और बिहार के वनक्षेत्रों में स्वीकृत पदों के मुकाबले क्रमश: 58%, 80.9% व 79.3% रेंजर तैनात हैं. 

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रेंजरों की कमी से जंगलों पर बढ़ा खतरा 

चौंकानेवाला सच यह भी है कि झारखंड अलग राज्य गठन के बाद से लेकर आज तक नये रेजरों की बहाली भी नहीं हुई है. क्योंकि विभाग में करीब 20 साल तक रेंजर की नियुक्ति नियमावली ही नहीं बन पायी थी. इधर, रेंजरों की कमी के चलते जंगलों की अवैध कटाई, जंगली जानवरों का शिकार और अवैध पत्थर खनन बेरोकटोक जारी है. राज्य में रेंजरों की कमी की बानगी देखिए- रांची जिले में मात्र एक रेंजर गायत्री देवी पदस्थापित हैं, जो जनवरी 2027 में रिटायर हो जायेंगी. इनके पास 18 रेंज (800 वर्गकिमी वनक्षेत्र) का प्रभार है. इसमें कुछ रेंज गुमला जिले के भी हैं. इसके अलावा इनके पास बिरसा मुंडा जू, प्रशिक्षण केंद्र और प्रचारप्रसार का काम भी है. वहीं, रांची के वन प्रमंडल पदाधिकारी (आइएफएस) के जिम्मे चार रेंज (700 वर्गकिमी वनक्षेत्र) हैं. राज्य के लगभग सभी जिलों की यही स्थिति है. हर रेंजर के पास 10 से अधिक रेंज का प्रभार है. वहीं, एक डीएफओ के जिम्मे चार से पांच ही रेंज होते हैं. 

दो साल से चल रही थी बहाली प्रक्रिया, विवाद के बाद रद्द हो गयी 

राज्य में रेंजर की बहाली प्रक्रिया दो साल से चल रही थी. रेंजर नियुक्ति का जिम्मा जेपीएससी के पास है. नियमावली बनने के बाद वन विभाग ने अप्रैल 2024 में जेपीएससी से रेंजरों की नियुक्ति का आग्रह किया था. मुख्य परीक्षा के रिजल्ट के बाद अगस्त में फिजिकल परीक्षा की तैयारी चल रही थी. इसी बीच जेपीएससी विवाद होने पर परीक्षा ही रद्द कर दी गयी है. 

समकक्ष राज्यों की तुलना में झारखंड की स्थिति

राज्यवन क्षेत्र (वर्ग किमी)रेंजर के स्वीकृत पदकार्यरतप्रतिशत
झारखंड23,7653836115.9%
छत्तीसगढ़59,81648928558.0%
ओडिशा61,20460949380.9%
बिहार7,4421169279.3%
उत्तराखंड38,00030820466.2%

झारखंड के वन सचिव अबु बक्कर सिद्दीख ने कहा 

कर्मियों की कमी से परेशानी तो होती है, फिर भी विभाग में मौजूद अधिकारी-कर्मचारी और वन प्रबंधन समिति की मदद से हम वन रक्षा और विकास का काम कर रहे हैं. विभाग ने रेंजर-एसीएफ बहाली का आग्रह जेपीएससी से किया गया था. इसकी प्रक्रिया अंतिम चरण में थी. फिलहाल यह रद्द हो गयी है. 

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