बिहार की सिपाही भर्ती में जो गया था जेल, उसे ही JSSC-CGL परीक्षा की मिली जिम्मवारी
सांकेतिक तस्वीर | AI
बिहार सिपाही भर्ती में जेल जा चुका अरुण कुमार को JSSC डिप्लोमा स्तरीय भर्ती परीक्षा का काम मिला था. जेल में ही उसने झारखंड नियुक्ति घोटाले की योजना बनाई. सीआईडी ने उसे दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है.
रांची से पंकज त्रिपाठी की रिपोर्ट
आपके शहर में
रांची: JSSC डिप्लोमा स्तरीय भर्ती परीक्षा गड़बड़ी में दिल्ली से गिरफ्तार अरुण कुमार को लेकर सीआइडी को अहम जानकारियां मिली हैं. इसके अनुसार बिहार सिपाही भर्ती (सीएसबीसी) में 14.3 करोड़ गबन के आरोपी अरुण कुमार को जेल भेजा गया था, जहां उसने सिंडिकेट बनाकर झारखंड नियुक्ति घोटाले की योजना बनायी.
करीब चार साल पहले वर्ष 2022 में ही जेएसएससी परीक्षा के संबंध में हुई जांच में आरोपी अभिषेक ने पुलिस को सारी जानकारी दी थी. चौंकाने वाला तथ्य यह है कि बिहार में गबन के आरोप में जेल जा चुके अरुण कुमार की कंपनी को जेएसएससी की डिप्लोमा स्तरीय भर्ती परीक्षा से जुड़ा काम मिल गया.
जांच में सामने आया है कि टेंडर हासिल करने में भारी खर्च होने का हवाला देकर अरुण ने वसूली की नयी योजना बनायी. इसके तहत परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक कर परीक्षार्थियों से मोटी रकम वसूलने का जाल बिछाया गया.
वर्ष 2017-18 और 2018-19 में सीएसबीसी सिपाही भर्ती का टेंडर एक निजी कंपनी को मिला था. इसमें परीक्षार्थियों से एप्लीकेशन फीस के रूप में वसूली गयी रकम में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गयी. इसी मामले में अरुण को जेल भेजा गया था. वहां रहने के दौरान ही हाइकोर्ट से जमानत की प्रक्रिया के सिलसिले में अरुण का संपर्क एक अन्य व्यक्ति अभिषेक से हुआ, जो पटना हाइकोर्ट में सेक्शन अफसर के पद पर था.
हाइकोर्ट से गबन की कुल रकम का एक तिहाई हिस्सा जमा करने के बाद अरुण कुमार को जमानत मिल गयी. लेकिन इसी कानूनी प्रक्रिया के दौरान पटना में ही उक्त सेक्शन अफसर अभिषेक और अन्य कुछ लोगों के साथ मिलकर अरुण ने झारखंड में भर्तियां बेचने की पटकथा तैयार कर ली. यह जानकारी स्वयं अभिषेक ने पुलिस को दी है. यह जानकारी अब सीआइडी की जांच में सामने आयी है. जमानत के बाद भी अरुण ने जेल में बनी इसी पहचान का इस्तेमाल कर आगे की साजिश को अंजाम दिया.
वर्ष 2022 में ही दर्ज हो गया था पूरा ब्योरा
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सितंबर 2022 में इस मामले में हुई एक गिरफ्तारी के दौरान आरोपी अभिषेक ने पूछताछ में अरुण कुमार की बिहार वाली पृष्ठभूमि, जमानत की परिस्थितियां और झारखंड में मिले काम की पूरी जानकारी पुलिस को दे दी थी. यह पूरा बयान केस डायरी में दर्ज है. इसके बावजूद अरुण कुमार तब गिरफ्तारी से बचा रहा. अब अगस्त माह में सीआइडी ने उसे दिल्ली से गिरफ्तार किया. उसने पूछताछ में कई जानकारी सीआईडी को दी है.
अब जब सीआइडी ने अरुण कुमार को गिरफ्तार किया है, तो जांच एजेंसी के सामने वही तथ्य दोबारा आ रहे हैं, जो 2022 की केस डायरी में पहले से दर्ज थे. इससे यह सवाल उठ रहा है कि पुख्ता जानकारी होने के बावजूद अरुण की गिरफ्तारी में इतना वक्त क्यों लगा?
रांची और हजारीबाग के दो कोचिंग संस्थानों में सीआइडी ने की जांच
जेपीएससी की विभिन्न परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों की जांच के क्रम में सीआइडी ने रांची और हजारीबाग के कोचिंग संस्थानों की जांच की है. जांच के क्रम में सीआइडी को कुछ तथ्य मिले थे, जिसके बाद रांची के लालपुर स्थित शिवांगन की पाठशाला और इसके निदेशक संजीत कुमार के रातू रोड स्थित आवास पर जांच की गयी. इसके साथ ही हजारीबाग में संचालित मेघा कोचिंग सेंटर में भी जांच की गयी. दोनों जगहों से दस्तावेज जब्त किये गये हैं.
सीआइडी अभय तिवारी, उसके भाई और उसकी पत्नी से पूछताछ कर रही है. एक अन्य आरोपी, उत्तर प्रदेश के मो एबाद से भी पूछताछ की गयी है. उसने परीक्षा उप नियंत्रक समेत अन्य लोगों पर ओएमआर शीट में गड़बड़ी कराने का आरोप लगाया है. इसके साथ ही अन्य 18 सफल अभ्यर्थियों से भी सीआइडी ने पूछताछ की है. पूछताछ के दौरान कोचिंग संस्थानों की भूमिका संदिग्ध पाये जाने के बाद दोनों कोचिंग संस्थानों की जांच-पड़ताल की गयी.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए