चिंगड़ी मछली के पापड़ और 'जल परी' का जलवा, यहां मेले में हर चीज अनोखी, पढ़ें पूरी खबर
चिंगड़ी मछली के पापड़.
जमशेदपुर में गणेश पूजा के साथ शुरू हुए मेले में इस बार ग्रेविटी झूले, जलपरी शो और जंगल सफारी बच्चों व युवाओं को खूब भा रहे हैं. साथ ही, पारंपरिक ग्रामीण सामान और स्वादिष्ट व्यंजनों का भी लुत्फ उठा सकते हैं.
जमशेदपुर : बारीडीह, भुइयांडीह सहित अन्य जगहों में गणेश पूजा के साथ मेला शुरू हो गया. जहां आधुनिक साजो-सामान के साथ मुंशी प्रेमचंद के 'ईदगाह' की तरह ग्रामीण परिवेश के सामान भी मिल रहे हैं. दादी मां के चिमटे से लेकर लोहे और काठ के सामान, झूले, खिलौने की भरमार है. ऐसे मेले को भला कौन नहीं घूमना चाहेगा.
युवाओं की पसंद ग्रेविटी झूले
इस बार कदमा गणेश पूजा मैदान में ग्रेविटी झूला लोगों के लिए नया है. फाइबर की गोल आकृति के झूले के अंदर लोग प्रवेश कर, दीवार से चिपककर गोल-गोल घूम रहे हैं. जहां कहना न होगा युवाओं की सबसे अधिक भीड़ है. इसमें एक बार झूलने का 80 रुपये का टिकट लग रहा है. मेले में दूर से ही बड़े-बड़े बिजली-चकरी झूले पर लोगों की नजर जा रही है. इसका टिकट 100 रुपये है. ब्रेकडांस, कोलंबस (नाव) व इसी आकार के अन्य झूले का टिकट 80 रुपये है. ट्रेन व अन्य छोटे झूले में 50 रुपये लग रहे हैं.

दो-दो जगह जल परी शो
मेले में दो-दो जगह जल परी दिखाये जा रहे हैं. एक का नाम जल परी है तो दूसरे का नाम रशियन जल परी. इसका समय 6:00 से 10:00 बजे तक है. इस शो का टिकट 100 रुपये है. इसी प्रकार निशानेबाजी शौकीन के लिए 50 रुपये में 10 गोली का निशाना है. छोटे बच्चों के लिए जीप गाड़ी की सवारी है. जो रिमोट कंट्रोल से चलता है. ट्वाय जीप की सवारी के लिए 50 रुपये लग रहे हैं.
जंगल सफारी में हाथी मेरे साथी
मेले में बच्चों के लिए सबसे अच्छा है जंगल सफारी या जुरासिक पार्क. जिसमें हाथी, शेर, बाघ, दरियाई घोड़ा, कंगारू, चिंपैंजी, हिरण, बंदर जैसे जानवर के मॉडल रखे गये हैं. जो हू-ब-हू प्रतीत होते हैं. मॉडल के जरिये बच्चे इन पशुओं को देख जान पायेंगे. जंगल सफारी का टिकट 50 रुपये है.
चिंगड़ी मछली के चिप्स-पापड़
झूले-मनोरंजन से दूर हटें तो खान-पान पर नजर जाना स्वाभाविक है. मेले में चिंगड़ी मछली के चिप्स और पापड़ लोगों को लुभा रहे हैं. इस स्टॉल पर बीट, आलू, साबूदाना आदि के पापड़ और चिप्स भी मिल रहे हैं. चिंगड़ी मछली के 100 ग्राम पापड़ की कीमत 80 रुपये है. 250 ग्राम बीट चिप्स की कीमत 100 रुपये है. इसके अलावा आम, अदरक, लहसून, इमली, हरी व लाल मिर्च, मटर आदि सभी प्रकार के आचार भी मिल रहे हैं. जिसकी कीमत सामान्य तौर पर 90 से 100 रुपये पाव है.
लोहे-लकड़ी के सामान की भरमार
ग्रामीण परिवेश और घरेलू सामान में लोहे की कड़ाही की कीमत 160 रुपये शुरू हो रही है. लोहे के डोसा तवे की कीमत 450 रुपये है. सब्जी काटने के लिए लोहे का हंसुआ 100 रुपये का है. लकड़ी के चकले की कीमत 120 रुपये है. पत्थर के चकले की कीमत 240 रुपये है. लकड़ी के बेलन 50 रुपये में मिल रहे हैं. छनौटा 70 से 140 रुपये में मिल रहे हैं.
हरेक माल 30 रुपये
मेले में हर डग पर बच्चों के खिलौने और घर के साजो सामान के स्टॉल हैं. इसी में हरेक माल 30 रुपये, कप-डिश, ड्रे, गुलदस्ता मिल रहे हैं. शौकीनों के लिए टैटू कला भी मेले में है. खान-पान में डोसा, भेलपुरी, कुल्फी, चाउमिन जैसे आइटम हर मोड़ पर है. मेले के बाहर सड़कों पर भी कई सामान मिल रहे हैं. यानी मेले में प्रवेश करने से पहले ही आपको सामान मिलने लगेंगे.
लग गयी बैरिकेडिंग
मेला परिसर में गाड़ी वर्जित रखा गया है. धातकीडीह की तरफ मुखी बस्ती मोड़ के पास बैरिकेडिंग लगा दिया गया है. जहां हर तरह की गाड़ी प्रवेश पर रोक लगा दिया गया है. ऑटो आदि सवारी गाड़ी मुखी बस्ती मोड़ तक ही आ रही है. इसका मकसद मेले में लोगों की सुरक्षा है. हालांकि इससे साकची व अन्य जगह से आने-जाने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. दूसरी तरफ, 15 सितंबर की शाम तक मेला पूरी तरह सज नहीं पाया था. कई झूले जोड़े जा रहे थे. मेला परिसर में कुछ गाय भी घुस आयी थी.
सीसी टीवी कैमरे की नजर
बाल गणपति विलास के दफ्तर से मेले पर सीसीटीवी कैमरे से नजर रखी जा रही है. जहां 16 से अधिक जगहों की फोटो आ रही है. विलास के अध्यक्ष एम शिवमणि ने बताया कि लोगों की सुरक्षा के लिए सीसी टीवी कैमरा लगाया गया है. जो मेले के अंत तक लगा रहेगा.
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