टेलिंग पौंड के बीच 26 परिवारों की जिंदगी, 27 साल से मुआवजे का इंतजार…अब आयोग के हस्तक्षेप से जगी न्याय की उम्मीद

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दौरे मे डॉ आशा लकड़ा.

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राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने जादूगोड़ा का दौरा किया. चाटीकोचा के विस्थापितों ने पुनर्वास और मुआवजे की मांग को लेकर सौंपा पत्र.

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जादूगोड़ा : राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा के जादूगोड़ा दौरे के बाद यूसिल के टेलिंग पौंड से सटे चाटीकोचा गांव के 26 विस्थापित परिवारों में एक बार फिर पुनर्वास और लंबित मुआवजा राशि के भुगतान को लेकर उम्मीद जगी है. ग्रामीणों को भरोसा है कि आयोग के हस्तक्षेप से वर्षों से लंबित उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस पहल हो सकेगी. यूसिल अनुसूचित जनजाति कर्मचारी संघ के आग्रह पर दो दिवसीय दौरे पर जादूगोड़ा पहुंचीं डॉ. आशा लकड़ा ने अपने दौरे के दौरान चाटीकोचा गांव के ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली.

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ग्रामीणों ने सौंपा पांच सूत्री मांग पत्र

ग्रामीणों ने उन्हें पांच सूत्री मांग पत्र सौंपकर विस्थापन, पुनर्वास, मुआवजा और रोजगार से जुड़ी समस्याओं के समाधान की मांग की. ग्रामीणों का कहना है कि 1997 से विस्थापन से संबंधित उचित पुनर्वास राशि कोषागार में जमा होने के बावजूद उसका भुगतान अब तक नहीं हो सका है. ग्रामीणों ने मांग की कि 1997 से पूर्व जन्मे चाटीकोचा के सभी विस्थापितों को नियोजन का लाभ दिया जाये. साथ ही विस्थापित कर्मचारी की मृत्यु अथवा सेवानिवृत्ति की स्थिति में 30 दिनों के भीतर योग्य आश्रित को नौकरी देने की व्यवस्था की जाये.

समस्याओं से राहत दिलाने की मांग

ग्रामीणों ने तीसरे टेलिंग पौंड के कारण उत्पन्न समस्याओं से राहत दिलाने के लिए समुचित पुनर्वास की भी मांग की है. ग्रामीणों ने टेलिंग पौंड से कथित विकिरण के प्रभाव की आशंका जताते हुए सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास की मांग को प्रमुखता से उठाया.

सुविधाओं में भेदभाव का आरोप

दौरे के दौरान यूसिल की श्रमिक संगठन यूरेनियम कामगार यूनियन के महामंत्री भरत किस्कू ने भी कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं से आयोग की सदस्य को अवगत कराया. उन्होंने आरोप लगाया कि यूसिल में कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच सुविधाओं में असमानता है. उन्होंने कहा - जनजातीय समुदाय के कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद सीमित चिकित्सा सुविधा मिलती है. वहीं, अधिकारियों को सेवानिवृत्ति के बाद भी कंपनी की ओर से चिकित्सा खर्च का अधिक लाभ मिलता है.

ग्रुप बीमा राशि को भी बताया अपर्याप्त

उन्होंने ड्यूटी के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने पर मिलने वाली ग्रुप बीमा राशि को भी अपर्याप्त बताते हुए इसमें बढ़ोतरी की मांग की. इसके अलावा कर्मचारियों की धीमी पदोन्नति नीति, विस्थापित आदिवासी परिवारों के मृतक आश्रितों को नौकरी तथा पीढ़ी-दर-पीढ़ी नियोजन सहित कई मुद्दे भी डॉ. आशा लकड़ा के समक्ष रखे गये.

हर तीन माह में समीक्षा बैठक के दिए निर्देश

यूसिल अनुसूचित जनजाति कर्मचारी संघ ने भी अपनी विभिन्न समस्याओं को आयोग की सदस्य के समक्ष रखा. संघ के प्रतिनिधियों के अनुसार, डॉ. आशा लकड़ा ने समस्याओं के समाधान को लेकर यूसिल प्रबंधन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये. उन्होंने कंपनी प्रबंधन को प्रत्येक तीन महीने में यूसिल अनुसूचित जनजाति कर्मचारी संघ के साथ समीक्षा बैठक आयोजित करने की बात कही, ताकि कर्मचारियों की समस्याओं और विवादों का समय पर समाधान किया जा सके.

बैठक में ये हुए शामिल

इस दौरान यूसिल के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक डॉ. कंचन आनंद राव, उप महाप्रबंधक (कार्मिक) राकेश कुमार, तुरामडीह माइंस के प्रबंधक (कार्मिक) संजीव रंजन, तकनीकी निदेशक विक्रम केसरी दास, महाप्रबंधक मनोज कुमार, कार्यकारी निदेशक एम.के. सिंघई सहित कंपनी के अन्य अधिकारी मौजूद रहे. वहीं यूसिल अनुसूचित जनजाति कर्मचारी संघ के अध्यक्ष मनोरंजन महाली, महासचिव दीपतेन्दु हांसदा, कार्यकारी महासचिव श्रीजन टुडू, दामू नाईक, हीरा टुडू, बगजाता माइंस के सह सचिव शांखो मुर्मू, जादूगोड़ा मिल के सह सचिव सुरजीत कुमार सोरेन, तुरामडीह माइंस के सह सचिव सुनील दिग्गी, तुरामडीह मिल के सह सचिव मानिक चांद मुर्मू, महुलडीह माइंस के सह सचिव लखन टुडू समेत बड़ी संख्या में कर्मचारी एवं ग्रामीण उपस्थित थे. चाटीकोचा के ग्राम प्रधान मेघराई सोरेन, सालूका हेंब्रम, पिथो माझी, अर्जुन हेंब्रम सहित अन्य ग्रामीण भी बैठक में शामिल हुये.

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