इंफेक्शन के कारण अधिक नवजातों की होती हैं मौतें : डॉ साहा

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जमशेदपुर : इंफेक्शन के कारण देश में अधिकतर नवजात की मौत हो रही है. ब्लड कल्चर टेस्ट कर नवजात की हो रही मौत को रोका जा सकता है. इसकी जांच के लिए देश में नयी तकनीक भी आयी है. इससे तीन से पांच दिनों के अंदर इसकी रिपोर्ट आ जाती है. उसके बाद नवजात को […]

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जमशेदपुर : इंफेक्शन के कारण देश में अधिकतर नवजात की मौत हो रही है. ब्लड कल्चर टेस्ट कर नवजात की हो रही मौत को रोका जा सकता है. इसकी जांच के लिए देश में नयी तकनीक भी आयी है. इससे तीन से पांच दिनों के अंदर इसकी रिपोर्ट आ जाती है. उसके बाद नवजात को होने वाले इंफेक्शन का पता चल जाता है. इलाज कराने में काफी सहायता मिलती है.

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उक्त बातें रविवार को साकची स्थित एक होटल में इंडियन एकेडमी ऑफ पेडियाट्रिक्स एसोसिएशन जमशेदपुर शाखा की ओर आयोजित वार्षिक कॉन्फ्रेंस में उपस्थित कोलकाता के प्रोफेसर शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ विजन साहा ने कही.
उन्होंने कहा कि कल्चर जांच करने की सुविधा सभी हायर सेंटर में होना चाहिए. उन्होंने कहा कि जब तक नवजात की जांच रिपोर्ट नहीं आ जाती है, तब तक डॉक्टरों को अपने अनुभव के अनुसार एंटीबायोटिक का उपयोग करना चाहिए, क्योंकि नवजात की स्थिति गंभीर होने पर उसको एनआइसीयू में रखा जाता है, जहां पर समय पर इलाज होना बहुत जरूरी है.
उस दौरान अगर डॉक्टर रिपोर्ट आने का इंतजार करते हैं, तो बच्चे की स्थिति और खराब होती जायेगी. इससे इलाज कराने में भी परेशानी होगी. उन्होंने कहा कि इंफेक्शन के इलाज से संबंधित सभी प्रकार की सुविधा होना बहुत जरूरी है.
उन्होंने कहा कि नवजात को कम से कम इंटरवेशन करने तथा एक बेड पर एक ही बच्चे को रखने से काफी हद तक इंफेक्शन से नवजात को बचाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जहां नवजात का वजन 1.5 किलोग्राम या इससे कम है और वह प्रीमेच्योर है, तो उसे तत्काल हायर सेंटर रेफर करना चाहिए, क्योंकि ऐसे बच्चों में इंफेक्शन के खतरे की संभावना अधिक होती है.
समय पर इलाज नहीं होने से इनकी मौत भी हो जाती है. उन्होंने कहा कि पहले यह जांच रिपोर्ट आने में कम से कम 21 दिन लगाता था, जिससे मरीज को जांच का अधिक लाभ नहीं मिलता था. इसके पहले इस काॅन्फ्रेंस में उपस्थित डॉ बीआर मास्टर, डॉ आरके अग्रवाल, डॉ अखौरी मंटू सिन्हा, डॉ जॉय भादुड़ी सहित अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से किया.
इस कॉफ्रेंस में उपस्थित टीएमएच के डॉ अभिषेक शर्मा, डॉ प्रमीला, डॉ नीलांजन, टाटा मोटर्स के डॉ निशांत कुमार व डॉ गजला यशमीन ने फ्री पेपर प्रस्तुत किया. इस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित अन्य डॉक्टरों ने शिशु रोग से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा के साथ उसकी नयी तकनीक की जानकारी दी.
वहीं शाम में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस दौरान मुख्य रूप से डॉ केके चौधरी, डॉ आरके अग्रवाल, डॉ बीआर मास्टर, डॉ अखौरी मिंटू सिन्हा, डॉ जय भादुड़ी, डॉ मिथलेश कुमार, डॉ एसपी झा, डॉ आशित मिश्र, डॉ सुधीर मिश्रा, डॉ यू लुकतुके, डॉ स्मृति नाथ सहित एसोसिएशन के कई पदाधिकारी व सदस्य मौजूद थे.
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