जमशेदपुर : मर कर जाऊंगा, तो बेटे को क्या जवाब दूंगा, नौ साल से गायब है रंजन सीबीआइ भी कर चुकी है जांच

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Feb 2019 8:04 AM

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मनीष सिन्हा, जमशेदपुर : मर कर जाऊंगा, तो बेटे को क्या जवाब दूंगा? यह दर्द है बारीडीह के विजया गार्डेन निवासी रतींद्र नाथ भट्टाचार्य का. रतींद्र नाथ भट्टाचार्य का पुत्र रंजन भट्टाचार्य 25 जनवरी 2010 से गायब है. उसे गायब करने का आरोप पुलिस पर लगा है. इंसाफ के लिए श्री भट्टाचार्य पिछले नौ साल […]

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मनीष सिन्हा, जमशेदपुर : मर कर जाऊंगा, तो बेटे को क्या जवाब दूंगा? यह दर्द है बारीडीह के विजया गार्डेन निवासी रतींद्र नाथ भट्टाचार्य का. रतींद्र नाथ भट्टाचार्य का पुत्र रंजन भट्टाचार्य 25 जनवरी 2010 से गायब है. उसे गायब करने का आरोप पुलिस पर लगा है. इंसाफ के लिए श्री भट्टाचार्य पिछले नौ साल से कानूनी लड़ रहे हैं.

उनकी याचिका पर झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर सीबीआइ तक मामले में जांच कर विशेष न्यायालय को रिपोर्ट सौंप चुकी है. इसमें रंजन का पता लगा पाना संभव नहीं होने की बात कही गयी है. लेकिन उन्हें इंतजार है फैसले का अौर वे चाहते हैं कि उनके बेटे को गायब करने वाले पुलिस पदाधिकारियों को सजा मिले अौर कार्रवाई हो.

प्रभात खबर से बातचीत में श्री भट्टाचार्य बताते हैं कि 25 जनवरी 10 को रंजन डयूटी जाने के लिए घर से निकला था. उसके बाद से वह लौट कर नहीं आया. सीबीआइ जांच में रंजन को गायब करने के कई प्रमाण मिले हैं. मामले की सुनवाई विशेष न्यायालय में विचाराधीन है.
सीबीआइ की जांच में क्या मिला था
सीबीआइ की पूछताछ में कबीर ने स्वीकार किया था कि उसकी निशानदेही पर विजया गार्डेन के पास रंजन को पकड़ा गया था अौर वैगन आर कार में बैठाया गया था.
पंकज दूबे ने सीबीआइ को दिये बयान में स्वीकार किया था कि रंजन को आमने-सामने पूछताछ के लिए उसके सामने बिष्टुपुर साउथ पार्क क्वार्टर नंबर सी 177 में लाया गया था. पूछताछ के दौरान उसे डंडे से मारा गया था, जिससे वह बेहोश हो गया था अौर उसके बाद उसे कहीं ले जाया गया था.
बाद में कबीर व पंकज दूबे अपने बयान से मुकर गया, पंकज दूबे ने बयान देकर बताया कि रंजन के नेपाल में होने की सूचना है
सुरक्षा ड्यूटी में तैनात जवान राजेंद्र राम ने सीबीआइ को दिये बयान में सभी लोगों को क्वार्टर नंबर सी -173 में रखने की बात कही थी अौर फोटो देख कर रंजन की पहचान करते हुए उसे लाने की बात कही थी. बाद में सिपाही अपने बयान से मुकर गया अौर उसे मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया गया.
सेंट्रल फोरेंसिक लेबोरेटरी (सीएफएसएल) के अधिकारियों को क्वार्टर नंबर सी 173 एवं सी 177 में दस स्थानों पर मानव खून के निशान मिले थे, जिसे जांच के लिए सेंटर फॉर डीएनए फिंगर प्रिंट एंड डायग्नोस्टिक (सीडीएफडी) भेजा गया था, लेकिन कोई नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका.
रंजन के मोबाइल का इस्तेमाल बिष्टुपुर थाना के तत्कालीन प्रभारी पीके सिंह के भाई नरेंद्र सिंह ने किया था अौर रंजन का सिम निकाल कर एयरटेल का सिम उसमें डाला गया था.
घटना के 22 माह बाद सीबीआइ को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गयी अौर मोबाइल के सर्विस प्रोवाइडर इतने लंबे समय का सीडीआर नहीं रखते हैं, इस लिए उसकी डिटेल नहीं मिल पायी.
जमशेदपुर : सीरियल क्राइम के बाद से गायब है रंजन भट्टाचार्य
जमशेदपुर : 2009 के अंत अौर 2010 के शुरू में शहर में सीरियल क्राइम की घटनाअों ने शहर को दहशत में डाल दिया था. पुलिस ने पंकज दूबे, हेसामुद्दीन उर्फ कबीर एवं उसके साथियों को गिरफ्तार किया था. उसी दौरान रंजन भट्टाचार्य अौर कदमा निवासी जावेद गायब हो गये थे. पुलिस ने दोनों को फरार बताया था, रंजन के पिता आरएन भट्टाचार्य ने पुलिस पर रंजन को गायब करने का आरोप लगाते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी.
कोर्ट के आदेश पर सीबीआइ की रांची अौर दिल्ली की टीम ने जांच की थी अौर पिछले साल जांच रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी थी. सीबीआइ की जांच में रंजन भट्टाचार्य को अपार्टमेंट के कैंपस से बिष्टुपुर स्थित गुणवत्ता आश्वासन निदेशालय के खाली क्वार्टर में ले जाने, रंजन का मोबाइल फोन थाना प्रभारी के भाई के पास से बरामद होने तथा डंडे से मारने, क्वार्टर से मानव खून मिलने के प्रमाण मिले थे.
लेकिन गवाहों के मुकर जाने से सीबीआइ ने तथ्यों को अमान्य करते हुए कोर्ट में अंतिम रिपोर्ट सौंप कर कहा था कि लापता का पता लगाना संभव नहीं है. श्री भट्टाचार्य ने याचिका दायर कर सीबीआइ की रिपोर्ट को चुनौती दी है अौर उन्हें अब फैसले का इंतजार है.
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