रजिस्ट्रेशन खत्म होने के 24 घंटे पहले पीएचडी कोर्स वर्क परीक्षा व प्री सबमिशन वाइवा कराया

By Prabhat Khabar Digital Desk
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जमशेदपुर : यूजीसी की नियमावली को ताक पर रखकर कोल्हान विवि में नेताआें और प्रशासनिक अधिकारियों की पैरवी पर पीएचडी की डिग्रियां बांटी जा रही हैं. राज्य के एक पूर्व केंद्रीय मंत्री की पैरवी पर विवि के कॉमर्स विभाग में तीन छात्रों का रजिस्ट्रेशन खत्म होने के महज 24 घंटे पहले एक साथ पीएचडी कोर्स वर्क परीक्षा और प्री सबमिशन वाइवा कराने का नया कारनामा कर दिखाया गया है.

आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि वर्ष 2013 में पंजीकृत किये गये तीनों शोध छात्रों के मामले में यूजीसी की वर्ष 2009 की नियमावली को ताक पर रखकर पहले शोध के लिए पंजीकृत किया गया. फिर कोर्स वर्क के नाम पर कागजी औपचारिकता पूरी की गयी. पंजीकरण के लिए निर्धारित पांच वर्ष की अवधि खत्म होने के महज 24 घंटे पहले गुरुवार को बेहद गुपचुप तरीके से पीएचडी कोर्स वर्क की परीक्षा और प्री सबमिशन वाइवा की औपचारिकता पूरी कर पैरवी पुत्रों के पीएचडी उपाधि प्रदान करने की औपचारिकता पूरी कर दी गयी.
विवि के एक प्रशासनिक पदाधिकारी के निर्देशन में पंजीकृत हैं तीनों छात्र : काॅमर्स विभाग से मिली जानकारी कि माने तो यह तीनों छात्र कोल्हान विवि के एक प्रशासनिक पदाधिकारी के निर्देशन में अपना शोध कार्य कर रहे हैं. विभागीय सूत्रों की माने तो इन तीनों में एक छात्रा तथा दो छात्र हैं.
कुछ ऐसा है नियम : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से वर्ष 2009 में शोध को लेकर जारी गाइड लाइन के अनुसार शोध के लिए सबसे पहले विवि की ओर से शोध प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की शर्त रखी गयी. इस परीक्षा में सफल होने वाले छात्रों का पंजीकरण छह महीने के कोर्स वर्क के लिये किये जाने का प्रावधान रखा गया. छह माह का कोर्स वर्क करने के बाद फिर संबंधित छात्रों की परीक्षा होनी हैं. संबंधित परीक्षा में सफल होने के बाद ही छात्रों का शोध पंजीकरण डीआरसी व पीजीआरसी होने का प्रावधान है. शोध के अंतिम में प्री सबमिशन वाइवा व फाइनल वाइवा कराने का प्रावधान है.
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