हहारो नदी की तेज धार में बह गयी 5 एकड़ से अधिक फसल लगी जमीन, किसानों को करीब 15 लाख का नुकसान
अत्यधिक बारिश के कारण खेतों से बहा मिट्टी व फसलें : प्रभात खबर
पंडरिया में हहारों नदी की तेज धार ने किसानों की कमर तोड़ दी. 5 एकड़ से अधिक खेत व फसलें बह गईं, जिससे लाखों का नुकसान हुआ.
संजय सागर की रिपोर्ट
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बड़कागांव (हजारीबाग). कृषि प्रधान बड़कागांव प्रखंड के पंडरिया गांव में बरसात के दौरान हहारो नदी की तेज धार ने किसानों की मुश्किल बढ़ा दी है. नदी का जलस्तर बढ़ने से करीब 5 एकड़ से अधिक फसल लगी जमीन और पेड़-पौधे बह गये. इससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है. किसानों के अनुसार, करीब 15 लाख रुपये की क्षति का अनुमान है.
नदी किनारे स्थित खेतों में लगी थी फसल
कृषक विनोद कुमार महतो और कमलनाथ महतो ने बताया कि नदी किनारे स्थित इन खेतों में धान, मक्का और ओल की फसल लगायी गयी थी. बारिश के बाद नदी का जलस्तर बढ़ गया और तेज बहाव के कारण खेतों की मिट्टी और फसल बह गयी. इससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया.
गार्डवाल की मांग पर नहीं हुई पहल
किसानों ने बताया कि खेतों को नदी की तेज धार से बचाने के लिए गार्डवाल निर्माण की मांग को लेकर जिला परिषद सदस्य, सांसद और विधायक को ज्ञापन दिया गया था. इसके बावजूद अब तक गार्डवाल का निर्माण नहीं हो सका. किसानों का कहना है कि समय रहते सुरक्षा दीवार बन जाती, तो खेतों को बहने से बचाया जा सकता था.
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कई किसानों के खेत हुए प्रभावित
किसानों के अनुसार, हहारो नदी का जलस्तर बढ़ने से पंडरिया गांव में कमलनाथ महतो का पांच कट्ठा, धनराज महतो का चार कट्ठा, मनोज महतो का दो कट्ठा, बालेश्वर महतो का तीन कट्ठा, बिहारी महतो का एक कट्ठा, राजू महतो का एक कट्ठा, विजय महतो का दो कट्ठा, बजरंग राणा का दो कट्ठा, केदार राणा का दो कट्ठा और विनोद राणा का दो कट्ठा खेत बह गया.
वहीं, चोरका गांव के मोहर साव का पांच कट्ठा, टेभा साव का दो कट्ठा, बीटल साव का दो कट्ठा, बासो महतो का पांच कट्ठा, लालदेव महतो का पांच कट्ठा और जगन महतो का तीन कट्ठा समेत अन्य किसानों की फसल लगी जमीन भी नदी की धार में बह गयी. किसानों ने प्रशासन से तत्काल क्षति का आकलन कर मुआवजा देने और नदी किनारे गार्डवाल का निर्माण कराने की मांग की है.
जिला परिषद सदस्य क्या कहना है ?
जिला परिषद सदस्य यासमीन निशा ने बताया कि अब तक इस संबंध में कोई आवेदन ग्रामीण द्वारा मुझे प्राप्त नहीं है .लेकिन मामला दुखद है किसानों का मुख्य स्रोत खेती बारी है. बरसात में फसल लगा हुआ खेत बह जाने से काफी नुकसान हुआ है .बाकी खेतों को बचाने के लिए गार्डवाल निर्माण के लिए जिला परिषद बैठक में प्रस्ताव रखूंगी.
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