जन संवाद में पहुंचा प्रमंडलीय कार्यालय हटाने का मामला

Published at :12 Jan 2017 8:13 AM (IST)
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जन संवाद में पहुंचा प्रमंडलीय कार्यालय हटाने का मामला

हजारीबाग : उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल, हजारीबाग को हटाने का विरोध तूल पकड़ता जा रहा है. इसकी शिकायत बार एसोएिसशन के सचिव अधिवक्ता राजकुमार राजू ने मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र में की है. सचिव ने शिकायत पत्र में प्रमंडल कार्यालय के हटने से होनेवाले नुकसान व परेशानी का जिक्र किया है. उन्होंने कहा है कि सरकार की […]

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हजारीबाग : उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल, हजारीबाग को हटाने का विरोध तूल पकड़ता जा रहा है. इसकी शिकायत बार एसोएिसशन के सचिव अधिवक्ता राजकुमार राजू ने मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र में की है.
सचिव ने शिकायत पत्र में प्रमंडल कार्यालय के हटने से होनेवाले नुकसान व परेशानी का जिक्र किया है. उन्होंने कहा है कि सरकार की शक्तियों की विकेंद्रीकरण की मूल भावना के विपरीत यह निर्णय होगा. उन्होंने कहा है कि आयुक्त न्यायालय के हटने से अत्यंत सस्ता स्थानीय सुलभ जनप्रिय न्याय व्यवस्था का विकल्प समाप्त हो जायेगा. आयुक्त स्तर के अधिकारियों के मार्गदर्शन से भी उपायुक्त वंचित रहेंगे. प्रमंडलीय आयुक्त वरीय अधिकारी होते हैं. स्थानीय स्तर पर जनता के पास प्रशासन का एक विकल्प है, जो समाप्त हो जायेगा. जिला स्तरीय कार्यालयों में समय-समय पर विकास कार्य, राजस्व कार्य, विधि व्यवस्था, सुरक्षा संबंधी कार्यों का औचक निरीक्षण बंद हो जायेगा. उपायुक्त और इनके कार्यालयों के विरुद्ध स्थानीय स्तर पर जनता अपील आयुक्त के समक्ष नहीं कर पायेगी.
लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए रांची जाना पड़ेगा. प्रमंडल के विघटन की स्थिति में राजधानी के प्रशासनिक कार्यों के उत्तरदायित्व में वृद्धि होगी, जिससे प्रशासन के कार्य प्रभावित होंगे. प्रमंडलीय आयुक्त विकास से संबंधित कई कार्यों के प्रमुख रहते हैं. ऐसे में नक्सलवाद, उग्रवाद की रोकथाम के कार्य भी प्रभावित होंगे. प्रमंडलीय कार्यालय में पर्यटन, कला संस्कृति एवं खेलकूद, मंत्रिमंडल निगरानी विभाग, पेयजल एवं स्वच्छता-विभाग, वन-विभाग जैसे विभाग को उचित मार्ग दर्शन नहीं मिल पायेगा. स्थानीय अधिवक्ताओं की आजीविकाओं पर भी इसका असर पडेगा.
सीएनटी एक्ट कानून के तहत प्रमंडलय आयुक्त के पास लोग फरियाद नहीं कर पायेंगे. भाजपा शासित पड़ोसी राज्य छतीसगढ में भी प्रमंडलीय कार्यालय को हटाने का प्रयोग किया गया था. चार प्रमंडलों का विघटन किया गया था, लेकिन कुछ वर्षो के बाद विपरीत परिणाम आने लगे, जनता और प्रशासन दोनों की कठिनाइयां बढ़ने लगी. इसके समाधान के रूप में सरगुजा के रूप में नये प्रमंडल का निर्माण कर पुराने चार प्रमंडल को बहाल भी किया गया. बार सचिव ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रशासन और जनता के बीच दूरी न बढ़े. कार्मिक विभाग ने जो प्रस्ताव भूमि-राजस्व विभाग को भेजा है, उसे रद्द किया जाये.
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