हजारीबाग : हजारीबाग जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग

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हजारीबाग : जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने, पारा शिक्षकों की मांग पूरी करने तथा सरकारी विद्यालयों की विलय नीति के विरोध में एसयूसीआइ कम्यनिुष्ट पार्टी ने एक दिवसीय धरना बुधवार को समाहरणालय के समक्ष दिया. धरना की अध्यक्षता जिला कमेटी सदस्य दिलीप कुमार व संचालन रवींद्र मेहता ने किया. जिला सचिव राजेश रंजन ने कहा […]

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हजारीबाग : जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने, पारा शिक्षकों की मांग पूरी करने तथा सरकारी विद्यालयों की विलय नीति के विरोध में एसयूसीआइ कम्यनिुष्ट पार्टी ने एक दिवसीय धरना बुधवार को समाहरणालय के समक्ष दिया. धरना की अध्यक्षता जिला कमेटी सदस्य दिलीप कुमार व संचालन रवींद्र मेहता ने किया.
जिला सचिव राजेश रंजन ने कहा कि जब हजारीबाग और अन्य जिलों में सामान्य वर्षा हुई है तो फिर हजारीबाग को छोड़ दूसरे जिलों को सरकार ने सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है. एसयूसीआइ सरकार की इस दोहरी नीति का विरोध करती है. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का खामियाजा जिले के लोग भुगत रहे हैं.
झारखंड में पारा शिक्षक अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं. इनकी यह लड़ाई ऐतिहासिक है. पार्टी इनके इस आंदोलन को अपना समर्थन देती है. वक्ताओं ने कहा कि पारा शिक्षक समेत अनुबंध पर काम करनेवाले सभी कर्मी का मानदेय बहुत कम है. इतनी कम राशि में बढ़ती महंगाई को देखते हुए इनका जीवनयापन मुश्किल हो रहा है.
सरकार स्कूल बंद कर शराब की दुकान खुलवाने में ज्यादा दिलचस्पी ले रही है. अधिकारियों से शराब बेचवायी जा रही है. धरना को आशीष कुमार, निर्मला शर्मा, जीवन यादव, नीतू मेहता,पूजा कुमारी, ज्ञानचंद ने भी संबोधित किया. धरना में जिले के सभी प्रखंड व पंचायतों से काफी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए.
हजारीबाग : जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने, पारा शिक्षकों की मांग पूरी करने तथा सरकारी विद्यालयों की विलय नीति के विरोध में एसयूसीआइ कम्यनिुष्ट पार्टी ने एक दिवसीय धरना बुधवार को समाहरणालय के समक्ष दिया. धरना की अध्यक्षता जिला कमेटी सदस्य दिलीप कुमार व संचालन रवींद्र मेहता ने किया.
जिला सचिव राजेश रंजन ने कहा कि जब हजारीबाग और अन्य जिलों में सामान्य वर्षा हुई है तो फिर हजारीबाग को छोड़ दूसरे जिलों को सरकार ने सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है. एसयूसीआइ सरकार की इस दोहरी नीति का विरोध करती है.
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का खामियाजा जिले के लोग भुगत रहे हैं. झारखंड में पारा शिक्षक अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं. इनकी यह लड़ाई ऐतिहासिक है.
पार्टी इनके इस आंदोलन को अपना समर्थन देती है. वक्ताओं ने कहा कि पारा शिक्षक समेत अनुबंध पर काम करनेवाले सभी कर्मी का मानदेय बहुत कम है.
इतनी कम राशि में बढ़ती महंगाई को देखते हुए इनका जीवनयापन मुश्किल हो रहा है. सरकार स्कूल बंद कर शराब की दुकान खुलवाने में ज्यादा दिलचस्पी ले रही है. अधिकारियों से शराब बेचवायी जा रही है. धरना को आशीष कुमार, निर्मला शर्मा, जीवन यादव, नीतू मेहता,पूजा कुमारी, ज्ञानचंद ने भी संबोधित किया. धरना में जिले के सभी प्रखंड व पंचायतों से काफी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए.
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