17 साल की बेटी की शादी कराने पर अड़ा था परिवार, डीएलएसए की पहल से बदला फैसला

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गुमला में 17 वर्षीय छात्रा ने बाल विवाह के दबाव के खिलाफ आवाज उठाई. डीएलएसए की मदद से परिजनों को समझाया गया और शादी रुकवाई गई. जानें पूरी खबर.

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गुमलाः गुमला नगर भवन में आयोजित जागरूकता कैंप में मिली कानूनी जानकारी एक 17 वर्षीय छात्रा के लिए बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाने का हौसला बनी. शादी के दबाव के बीच छात्रा ने बालिका वधू बनने से इनकार कर दिया और अपने अधिकारों की जानकारी लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए), गुमला पहुंची. छात्रा ने डीएलएसए को बताया कि वह अभी पढ़ाई करना चाहती है, लेकिन परिवार की ओर से शादी के लिए दबाव बनाया जा रहा है.

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छात्रा के अनुसार, उसके पिता शराब के नशे में उसके साथ मारपीट करते हैं और शादी से इनकार करने पर जान से मारने की धमकी भी देते हैं. परिवार के दबाव से परेशान होकर वह स्कूल से निकलने के बाद रांची के नामकुम स्थित अपनी सहेली के घर चली गई. उसके अचानक लापता होने पर परिजनों ने थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी.

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शादी के डर से घर लौटने में थी झिझक

चार दिन बाद छात्रा खुद डीएलएसए कार्यालय पहुंची और अपनी आपबीती सुनाई. उसने कहा कि वह पढ़-लिखकर अपना भविष्य बनाना चाहती है और कम उम्र में शादी नहीं करना चाहती. डीएलएसए में अपनी बात रखने के बाद वह गुमला में रहने वाली सहेली के पास चली गई. घर लौटने की इच्छा के बावजूद शादी के दबाव के कारण वह डरी हुई थी.

डीएलएसए ने परिजनों को समझाया

18 अगस्त को छात्रा दोबारा डीएलएसए कार्यालय पहुंची. मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएलएसए ने उसके माता-पिता और अन्य परिजनों को बुलाया. उन्हें बाल विवाह से जुड़े कानूनी प्रावधानों और इसके दुष्परिणामों की जानकारी दी गई. समझाइश के बाद परिजनों ने फिलहाल छात्रा की शादी नहीं कराने का भरोसा दिया. इसके बाद परिजन छात्रा को लेकर थाना पहुंचे और उसके सुरक्षित मिलने की जानकारी पुलिस को दी. साथ ही पूर्व में दर्ज गुमशुदगी की शिकायत भी वापस ले ली.


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दुर्जय पासवान

लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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