गुमला जिले की लाइफ लाइन नदियां सूखी, गांव के लोग चुआं, झरना व नदी का पझरा पानी पीने को विवश
Author Prabhat khabar digital desk
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गुमल : गुमला जिले की लाइफ लाइन नदियां, तालाब, कुआं, चेकडैम सूखने से जल संकट गहरा गया है. कई गांव में पानी खत्म हो गया है. लोग प्यास बुझाने व घरेलू काम के लिए जहां-तहां से पानी जुगाड़ कर रहे हैं. स्थिति भयावह होती जा रही है. गहराते जल संकट से निबटने के लिए प्रशासन […]
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गुमल : गुमला जिले की लाइफ लाइन नदियां, तालाब, कुआं, चेकडैम सूखने से जल संकट गहरा गया है. कई गांव में पानी खत्म हो गया है. लोग प्यास बुझाने व घरेलू काम के लिए जहां-तहां से पानी जुगाड़ कर रहे हैं. स्थिति भयावह होती जा रही है. गहराते जल संकट से निबटने के लिए प्रशासन द्वारा अभी तक किसी प्रकार की पहल नहीं की गयी है.
नतीजा, शहर से लेकर गांव तक पीने के पानी का संकट बढ़ गया है. सभी गांव के लोग पीने का पानी मांग रहे है. गांवों में शुद्ध पानी की सुविधा नहीं है. लोग चुआं, झरना व नदी का पझरा पानी पी रहे हैं. नौ से 10 मीटर पानी जमीन के नीचे चला गया. नदियां सूख गयी है. तालाब में कहीं-कहीं बूंद भर पानी है. कई चेकडैम पूरी तरह सूख चुका है, जिससे लोगों को पानी जुगाड़ करने में कठिनाई हो रही है. लाइफ लाइन शंख, कोयल, लावा, बासा, कांजी, लफरी, खटवा, पुग्गू, देवाकी, बाघमुंडा, तोरपा नदी सूख चुकी है. करोड़ों रुपये से बने कई जलाशयों में बहुत कम मात्रा में पानी है. मनरेगा व विभिन्न योजनाओं से बने चेकडैम व तालाब में पानी खत्म हो गया है और जमीन फटने लगी है. कुओं का जल स्तर रसातल में खिसक गया है. पीएचइडी के अनुसार जिले में 15974 चापानल है. इसमें 3299 चापानल खराब पड़े हैं.
चालू स्थिति में 12675 चापानल है. जिन प्रखंडों में जलमीनार नहीं बनी है, उन प्रखंडों के लोग कुओं व चापानल पर आश्रित हैं. वहीं जिन प्रखंडों में जलमीनार है, वे भी हाथी के दांत साबित हो रहे हैं. गुमला शहर को 10 लाख गैलन पानी की जरूरत है, परंतु पाइप लाइन व जलमीनार की कमी के कारण दो लाख गैलन पानी ही गुमला शहरी क्षेत्र को सप्लाई हो रही है.
गुमला शहर के कई इलाकों में सप्लाई पानी बंद है. लोगों को दो बाल्टी पानी के लाले पड़ने लगे हैं. सुबह से शाम तक हर उम्र के लोग पानी के लिए भटकते देखे जा रहे हैं. अगर यही हाल रहा, तो गुमला की क्या स्थिति होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. पशु-पक्षियों को भी पानी के लिए भटकना पड़ रहा है.
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