पूर्व माओवादी बॉबी मुंडा पर हमला, बाल- बाल बचे

Published at :23 Oct 2017 12:52 PM (IST)
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पूर्व माओवादी बॉबी मुंडा पर हमला, बाल- बाल बचे

भरनो (गुमला): भरनो थाना क्षेत्र के बटकुरी गांव निवासी भाकपा माओवादी के पूर्व सबजोनल कमांडर बॉबी मुंडा पर शांति सेना के सदस्यों ने जानलेवा हमला किया. परंतु बॉबी बाल बाल बच गया. बॉबी मुंडा ने बताया कि शनिवार को तेतरबीरा गांव में कार्तिक जतरा लगा था. जतरा में नागपुरी प्रोग्राम चल रहा था. बॉबी अपने […]

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भरनो (गुमला): भरनो थाना क्षेत्र के बटकुरी गांव निवासी भाकपा माओवादी के पूर्व सबजोनल कमांडर बॉबी मुंडा पर शांति सेना के सदस्यों ने जानलेवा हमला किया. परंतु बॉबी बाल बाल बच गया. बॉबी मुंडा ने बताया कि शनिवार को तेतरबीरा गांव में कार्तिक जतरा लगा था. जतरा में नागपुरी प्रोग्राम चल रहा था. बॉबी अपने परिवार के साथ प्रोग्राम देख रहा था.

तभी 20-25 की संख्या में कामडारा, नगर, करंज, कुम्हारी, कुरा, सलकेया गांव के शांति सेना के लोग हथियार लेकर पंहुचे और प्रोग्राम के दौरान 50-60 राउंड हवाई फायरिंग की. उनमें से एक शांति सेना सदस्य ने पिस्टल व राइफल से बॉबी मुंडा पर गोली चलाया. परंतु उसके साथियों ने हथियार उपर कर दिया. जिससे मिस फायर हो गया और बॉबी बच गया. बॉबी ने बताया कि जिस शांति सेना के सदस्य ने गोली चलायी थी, वह पारही गांव में शांति सेना चलाता है. पुरानी रंजिश के कारण मुझे मारना चाहता है.


बॉबी ने बताया कि 15 साल पहले जब मैं भाकपा माओवादी में था. तब माओवादियों ने धनेश्वर गोप के पिता फूलचंद गोप की हत्या करने का फरमान जारी किया था. तब मैंने ही उन्हें बचाया था. परंतु कुछ लड़कों ने उनके साथ मारपीट की थी. जिसका जिम्मेवार धनेश्वर मुझे मानता है. इसी वजह से मुझ पर हमला किया गया. बॉबी मुंडा ने यह भी कहा की प्रोग्राम से घर वापस आने के क्रम में धनेश्वर गोप और उसके साथियों ने पीछा किया था. परंतु क्षेत्र में अच्छी पहचान होने की वजह से मेरी जान बच गयी. जब धनेश्वर ने मुझ पर गोली चलायी तब शांति सेना के लोगों ने ही उससे हथियार छीना और मुझे बचाया. शांति सेना से मुझे कोई खतरा नहीं है.

सिर्फ एक सदस्य धनेश्वर गोप मुझे दुश्मन मानता है. बॉबी मुंडा ने कहा की पुलिस के संरक्षण में शांति सेना के कुछ लोग हथियार के बल पर लोगों को धमकाने का काम कर रहे हैं. पुलिस ने शांति सेना को छूट दे रखी है. जतरा में अंधाधुंध फायरिंग की गयी. जिससे ग्रामीणों में दहशत है.


एक साल पहले जेल से छूटने के बाद मैं समाज के मुख्यधारा से जुड़ कर जीवन यापन कर रहा हूं. अगर पुलिस प्रशासन मुझे संरक्षण नहीं देगी तो मजबूरन मुझे वापस संगठन की शरण में जाना होगा. अगर मैं दुबारा संगठन में चला गया तो मेरे साथ सैकड़ों नौजवान भी संगठन
से जुडेंगे. जिसका जिम्मेवार प्रशासन होगा.
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