गोड्डा में पानी टंकी का ऐसा हाल:15 साल से जमा गाद, रांची से 3 बार आदेश फिर भी इंतजार
मोतिया गांव का जलमीनार | Prabhat Khabar Network
मोतिया गांव के बाशिंदे 15 साल से दूषित पानी पीने को मजबूर. टंकी में 4-6 फीट गाद, खुले कुएं से सप्लाई. रांची से 3 आदेश, फिर भी जांच जारी.
निरभ किशोर: गोड्डा.गोड्डा जिले के सबसे विकसित गांवों में शुमार मोतिया के ग्रामीण पिछले करीब डेढ़ दशक से दूषित पानी पीने को मजबूर होने का आरोप लगा रहे हैं. ग्रामीण आयुष चौधरी की ओर से राज्य सरकार को भेजी गई शिकायत और उसके बाद रांची से जारी हुए लगातार तीन सरकारी आदेशों ने गांव की पेयजल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
आपके शहर में
ग्रामीणों का दावा है कि गांव में वर्ष 2008-09 में बनी 1 लाख 25 हजार लीटर क्षमता वाली जलमीनार की आज तक एक बार भी समुचित सफाई या डी-सिल्टिंग नहीं हुई. शिकायत के अनुसार टंकी के अंदर करीब 4 से 6 फीट तक गाद जमा है और इसी पानी की आपूर्ति ग्रामीणों के घरों तक की जा रही है.
2008-09 में बनी टंकी, आज तक नहीं हुई डी-सिल्टिंग
ग्रामीणों के अनुसार मोतिया गांव में पेयजल आपूर्ति के लिए वर्ष 2008-09 में 1.25 लाख लीटर क्षमता की पानी टंकी का निर्माण कराया गया था. आरोप है कि निर्माण के बाद से अब तक टंकी की सफाई नहीं कराई गई.
टंकी के अंदर लगातार गाद जमा होने से इसकी स्थिति जर्जर हो गई है. ग्रामीणों का कहना है कि गादयुक्त पानी की आपूर्ति के कारण जलजनित बीमारियों का खतरा बना हुआ है. शिकायत में टाइफाइड समेत अन्य बीमारियों की आशंका जताई गई है.
खुले कुएं से टंकी तक पहुंच रहा पानी, फिल्टर की भी व्यवस्था नहीं
ग्रामीणों ने पानी के स्रोत को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं. शिकायत के अनुसार जलमीनार को पानी उपलब्ध कराने वाला कुआं गांव से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित है और पूरी तरह खुला हुआ है.
ग्रामीणों का आरोप है कि खुले कुएं में अक्सर सांप, चूहे, मेंढक और पक्षी गिरकर मर जाते हैं. यह कुआं एक तालाब के समीप है और बारिश के दौरान तालाब का गंदा पानी कुएं में पहुंचने की बात कही गई है.
सबसे गंभीर आरोप यह है कि इस पानी को किसी फिल्टर या ट्रीटमेंट प्लांट से शुद्ध किए बिना सीधे जलमीनार में पहुंचाया जाता है और फिर पाइपलाइन के जरिए ग्रामीणों के घरों तक सप्लाई की जाती है.
मुख्य सचिव से शिकायत के बाद रांची से लगातार जारी हुए आदेश
मामले को लेकर ग्रामीण आयुष चौधरी ने ई-मेल के माध्यम से तत्कालीन मुख्य सचिव अलका तिवारी को शिकायत भेजी थी. शिकायत के बाद मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए गए. इसके बाद नए मुख्य सचिव अविनाश कुमार के स्तर से भी मामले को संज्ञान में लेकर जिला पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, गोड्डा को कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है.
मामले में रांची से लगातार तीन महत्वपूर्ण आदेश जारी किए गए हैं, जिनमें जलमीनार, पाइपलाइन और जलस्रोत से जुड़ी शिकायतों की जांच कर कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई है.
पहला आदेश : जलमीनार और पाइपलाइन की जांच का निर्देश
नगर विकास विभाग की ओर से 2 फरवरी 2026 को जारी पत्रांक 323 में उप सचिव अनवर हुसैन ने प्रशासक/कार्यपालक पदाधिकारी, गोड्डा नगर परिषद को जलमीनार और पाइपलाइन की जर्जर स्थिति की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने तथा विभाग को अवगत कराने का निर्देश दिया.
दूसरा आदेश : गाद और जैविक कचरे की शिकायत की जांच
इसके बाद 23 मई 2026 को राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन, रांची की ओर से कार्यपालक अभियंता, गोड्डा को निर्देश दिया गया कि जलमीनार में 4 से 5 फीट गाद जमा होने और खुले कुएं में जैविक कचरा होने संबंधी शिकायत की जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए.
तीसरी बार फिर मांगी गई कार्रवाई रिपोर्ट
इसके बाद आयुष चौधरी की ओर से 6 जुलाई 2026 को दोबारा शिकायत की गई. इस शिकायत के आधार पर राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन, रांची की ओर से 6 अगस्त 2026 को पत्रांक 8/JJM(Complain)-417/2024-867/SWSM जारी किया गया.
इस पत्र में गोड्डा प्रमंडल को शिकायत में वर्णित तथ्यों के आलोक में नियमानुसार कार्रवाई कर कृत कार्रवाई प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. पत्र की प्रतिलिपि अधीक्षण अभियंता, देवघर और मुख्य अभियंता, दुमका को भी भेजी गई है.
यह भी पढ़ें:
फरक्का में एक फीट धंसा रेलवे ट्रैक, कई ट्रेनें प्रभावित: स्टेशनों पर बढ़ी यात्रियों की भीड़
विभाग ने कहा : रखरखाव की जिम्मेदारी मुखिया की
मामले में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, गोड्डा के कार्यपालक अभियंता संजय शर्मा ने कहा कि वर्ष 2008 की योजना के तहत जलमीनार की सफाई और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी मुखिया को दी गई है. इसके लिए गांव में एक कमेटी भी गठित की गई है.
उन्होंने बताया कि इस संबंध में गांव की कमेटी को पत्र लिखा गया है. साथ ही सफाई और मेंटेनेंस के लिए बजट तैयार कर सरकार के पास रिपोर्ट भेजी गई है.

ग्रामीणों का सवाल : स्वच्छ पानी कब मिलेगा?
मोतिया के ग्रामीणों का सवाल है कि जब पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा के लिए योजनाएं और बजट मौजूद हैं, तो उन्हें वर्षों से साफ पानी क्यों नहीं मिल रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी आदेश पर आदेश जारी होने के बावजूद यदि जलमीनार की सफाई और जलस्रोत की व्यवस्था दुरुस्त नहीं होती है, तो इन आदेशों का कोई व्यावहारिक लाभ नहीं होगा.
अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि रांची से जारी तीसरे आदेश के बाद विभाग वास्तव में जलमीनार में वर्षों से जमा गाद निकलवाता है या मामला एक बार फिर सरकारी फाइलों में दबकर रह जाता है. मोतिया के लोग साफ पानी और सुरक्षित पेयजल व्यवस्था के लिए कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए