20 साल से एक ही कुर्सी पर जमे लिपिक, अब उठे स्थानांतरण के सवाल
AI-generated प्रतीकात्मक तस्वीर
गोड्डा भवन प्रमंडल में एक लिपिक के 20 साल से एक ही पद पर बने रहने का मामला सामने आया है. आरटीआई कार्यकर्ता ने सरकारी स्थानांतरण नीति का हवाला देते हुए इस पर सवाल उठाया है और तबादले की मांग की है. यह मामला सरकारी दफ्तरों में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है.
गोड्डा : भवन प्रमंडल, गोड्डा कार्यालय में कार्यरत लिपिक राजेश कुमार के करीब 20 वर्ष 7 माह 8 दिन से एक ही कार्यालय में पदस्थापित रहने का मामला सामने आया है. इसको लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सह आरटीआई कार्यकर्ता रंजीत कुमार ने अधीक्षण अभियंता, भवन अंचल, दुमका को पत्र भेजकर संबंधित कर्मी के पदस्थापन की नियमसंगत समीक्षा करते हुए स्थानांतरण की मांग की है.
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रंजीत कुमार ने कहा कि सरकारी कार्यालयों में किसी कर्मी का लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थापन प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े करता है. उन्होंने झारखंड सरकार के कार्मिक विभाग की ओर से जारी स्थानांतरण नीति दिनांक 05.07.2016 का हवाला देते हुए संबंधित कर्मी के लंबे समय से एक ही कार्यालय में पदस्थापन की समीक्षा की मांग की है.
स्थानांतरण नीति के अनुपालन पर उठाया सवाल
रंजीत कुमार का कहना है कि सरकार ने सरकारी कर्मियों के स्थानांतरण को लेकर स्पष्ट नीति निर्धारित की है, तो उसका पालन सभी कर्मियों पर समान रूप से होना चाहिए. वर्षों तक किसी कर्मी को एक ही कार्यालय में बनाए रखने से आम लोगों के बीच प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है.
उन्होंने भवन प्रमंडल, गोड्डा की कार्यप्रणाली को लेकर समय-समय पर सामने आने वाली शिकायतों और अनियमितताओं के आरोपों का भी उल्लेख किया. उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में लंबे समय से एक ही कार्यालय में पदस्थापित कर्मियों के कार्यकाल और भूमिका की निष्पक्ष प्रशासनिक समीक्षा आवश्यक है.
निष्पक्ष जांच और स्थानांतरण की मांग
रंजीत कुमार ने संबंधित अधिकारी से मांग की है कि राजेश कुमार के लंबे समय से एक ही कार्यालय में पदस्थापन की नियमसंगत समीक्षा कर उनका स्थानांतरण अन्यत्र किया जाए. साथ ही, यदि उनके विरुद्ध किसी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता से संबंधित शिकायतें लंबित हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए.
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक अनुशासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से है.
रंजीत कुमार ने कहा कि यदि मामले में नियमों के अनुरूप कार्रवाई नहीं होती है, तो वे सक्षम उच्चाधिकारियों अथवा उच्च न्यायालय के समक्ष मामला उठाने के लिए बाध्य होंगे.
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