जांच कर लौटी डीजीएमएस की टीम

Updated at : 06 Sep 2017 5:14 AM (IST)
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जांच कर लौटी डीजीएमएस की टीम

निरीक्षण . सुरक्षा, ब्लास्टिंग व खुदाई कार्य पर रिपोर्ट तैयार बोआरीजोर : राजमहल परियोजना इसीएल क्षेत्र में मंगलवार को डीजीएमएस के पदाधिकारी मो नियाज ने औचक निरीक्षण किया. इस दौरान सीएचपी कार्यालय, ओसीपी कार्यालय के अलावा लोहंडिया साइट में चल रहे खनन कार्य का भी जायजा लिया. करीब दो घंटे तक खदान क्षेत्र का निरीक्षण […]

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निरीक्षण . सुरक्षा, ब्लास्टिंग व खुदाई कार्य पर रिपोर्ट तैयार

बोआरीजोर : राजमहल परियोजना इसीएल क्षेत्र में मंगलवार को डीजीएमएस के पदाधिकारी मो नियाज ने औचक निरीक्षण किया. इस दौरान सीएचपी कार्यालय, ओसीपी कार्यालय के अलावा लोहंडिया साइट में चल रहे खनन कार्य का भी जायजा लिया. करीब दो घंटे तक खदान क्षेत्र का निरीक्षण कर लौटने के बाद उन्होंने कहा कि रिपोर्ट वरीय पदाधिकारी को दी जायेगी.
उन्होंने बताया कि खनन कार्य माइंस एक्ट, माइंस रूल्स व माइंस रेगुलेशन के तहत किया जाता है. नियम का हर पदाधिकारी को पालन करना पड़ता है. राजमहल परियोजना खदान 15 किमी के दायरे में पड़ता है. परियोजना क्षेत्र में बने मकान से 50 मीटर दूरी पर खनन कार्य होना चाहिए. साथ ही 15 से 20 किलोग्राम बारूद से ही खदान क्षेत्र में ब्लास्टिंग करनी चाहिए. उन्होंने सड़कों का भी हाल जाना. परियोजना कर्मी जो खदान क्षेत्र में काम करते हैं उनकी सुरक्षा के बाबत भी पूछताछ की.
खनन कार्य किस ढंग से किया जा रहा है. उसे भी देखा गया है. खदान निरीक्षण से संबंधित सभी रिपोर्ट डीजीएमएस प्रधान ऑफिस धनबाद के वरीय पदाधिकारी को दी जायेगी. टीम ने पत्रकारों को कुछ भी जानकारी देने से इनकार किया है. हादसे पर हादसे हो रहे हैं. लेकिन अब तक यहां सुरक्षा के कोई ठोस उपाय नहीं निकाले जा सके हैं.
सीएचपी, ओसीपी कार्यालय व लोहंडिया साइट का लिया जायजा
30 दिसंबर को भी हुआ था हादसा, 18 की गयी थी जान
राजमहल इसीएल ओपन कोल माइंस में 30 दिसंबर 2016 को सबसे बड़ा हादसा कोयला खनन कार्य के दौरान हुआ था. हादसे में करीब 18 लोगों की जान चली गयी थी, जबकि पांच अब तक लापता हैं. भोड़ाय साइट के डीप माइनिंग साइट में खनन कार्य के दौरान घटना हुई थी. सुरक्षा मानक को ताक पर रख कर परियोजना की महालक्ष्मी कंपनी के द्वारा रात में कोयला उत्खनन कार्य किया जा रहा था. मिट्टी कटाई के दौरान धंसान हो जाने से कार्य में लगे ऑपरेटर, माइनिंग सुपरवाइजर, खलासी सहित 18 की मौत दम घुटने से हो गयी थी. मृतक सभी मध्य प्रदेश, गुजरात, बिहार, झारखंड के पलामू, गढ़वा निवासी थे.
चार दिन पूर्व भोड़ाय साइट में हुआ था धंसान
परियोजना के कोल माइंस क्षेत्र भोड़ाय साइट में अभी चार दिन पूर्व धंसान हुआ था. इस साइट में बिरला कंपनी का हाइवा 30 फीट गड्ढे में गिर गया था. ऑपरेटर ने छलांग लगा कर अपनी जान बचायी थी.कुछ भी कहने से टीम का इनकार
चेयरमैन के निर्देश पर मंगलवार को डीजीएमएस के पदाधिकारी मो नियाज निरीक्षण करने पहुंचे थे. सूत्रों के अनुसार मो नियाज ने भोड़ाय डीप माइनिंग साइट का भी निरीक्षण किया है. हालांकि इस संबंध में उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार किया है.
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