करोड़ों खर्च के बाद भी बिरनी मॉडल डिग्री कॉलेज बदहाल, शिक्षक नहीं होने से पढ़ाई ठप
बिरनी का मॉडल डिग्री कालेज
बिरनी मॉडल डिग्री कॉलेज में शिक्षकों की नियुक्ति न होने से छात्रों का भविष्य अधर में है. करोड़ों की लागत से बना भवन अब बदहाली के आंसू बहा रहा है.
बिरनी. प्रखंड के युवाओं को गांव में ही गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये खर्च कर बनाया गया मॉडल डिग्री कॉलेज बिरनी आज बदहाली का शिकार है. भवन तैयार है, आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की गयी हैं, लेकिन शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से कॉलेज में पढ़ाई सुचारू रूप से शुरू नहीं हो सकी है. ऐसे में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार कॉलेज भवन विद्यार्थियों के लिए अपेक्षित लाभ नहीं दे पा रहा है.
वर्ष 2014 में करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये की लागत से डिग्री कॉलेज भवन निर्माण का शिलान्यास कोडरमा के तत्कालीन सांसद रविंद्र कुमार राय और पूर्व विधायक बिनोद कुमार सिंह ने किया था. शिलान्यास के दौरान ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को गांव में रहकर उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने की बात कही गयी थी. विभागीय अधिकारियों के अनुसार, कॉलेज भवन वर्ष 2019 में बनकर तैयार हो गया था.
इसके बाद वर्ष 2022 में सरकार की ओर से कॉलेज में पढ़ाई शुरू करने की मंजूरी मिली. इस बीच सरकार ने करीब तीन करोड़ रुपये खर्च कर भवन को सुसज्जित करने, आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने और कॉलेज की चहारदीवारी का निर्माण कराया. लेकिन शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से कॉलेज का उद्देश्य अब तक पूरा नहीं हो सका है.
शिक्षकों के अभाव में पढ़ाई प्रभावित
कॉलेज कर्मियों और स्थानीय लोगों के अनुसार विभिन्न संकायों में शिक्षकों के पद खाली हैं. शिक्षक नहीं होने के कारण नियमित पढ़ाई नहीं हो पा रही है. वर्ष 2022 से अब तक शिक्षकों की बहाली को लेकर आश्वासन तो मिलता रहा, लेकिन धरातल पर स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया.
शिक्षकों की कमी का सीधा असर उन विद्यार्थियों पर पड़ रहा है, जिन्होंने उच्च शिक्षा के लिए इसी कॉलेज में नामांकन कराया है. स्थानीय स्तर पर कॉलेज खुलने की उम्मीद से विद्यार्थियों ने यहां दाखिला लिया, लेकिन शिक्षकों के अभाव में उन्हें पढ़ाई को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
2026 में 80 विद्यार्थियों ने लिया नामांकन
शिक्षकों की कमी के बावजूद चालू शैक्षणिक वर्ष 2026 में बिरनी क्षेत्र के 80 छात्र-छात्राओं ने कॉलेज में नामांकन कराया है. इनमें दो विद्यार्थियों ने विज्ञान और 78 विद्यार्थियों ने कला संकाय में नामांकन लिया है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कॉलेज में पर्याप्त शिक्षक और कर्मचारी उपलब्ध हों, तो आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा.
आउटसोर्स कर्मियों के भरोसे कॉलेज संचालन का आरोप
आइसा के छात्र प्रतिनिधि सह सिमराढाब निवासी रंजीत बैठा ने कहा कि बिरनी डिग्री कॉलेज पूरी तरह उपेक्षित है. उनके अनुसार कॉलेज में सरकारी कर्मियों की नियुक्ति नहीं हुई है और आउटसोर्सिंग के माध्यम से काम कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि एक ही प्राचार्य को राजधनवार और बिरनी दोनों कॉलेजों का प्रभार दिया गया है.
रंजीत बैठा ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को विद्यार्थियों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने मांग की कि जिन अंगीभूत कॉलेजों में पर्याप्त शिक्षक और कर्मचारी उपलब्ध हैं, वहां से दो-चार शिक्षकों और क्लर्क को प्रतिनियुक्ति के आधार पर बिरनी भेजा जाये, ताकि यहां पढ़ाई शुरू हो सके.
उन्होंने कहा कि छात्रहित के मुद्दे पर जल्द ही आइसा की बैठक होगी. इसमें आंदोलन की रूपरेखा तय की जायेगी और जरूरत पड़ने पर बड़ा आंदोलन किया जायेगा.
प्राचार्य से नहीं हो सका संपर्क
इस संबंध में कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ अनिल कुमार बरनवाल से उनका पक्ष जानने के लिए मोबाइल पर संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया. लिहाजा कॉलेज में शिक्षकों की नियुक्ति और पढ़ाई की स्थिति को लेकर उनका पक्ष नहीं मिल सका.
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