श्री बंशीधर नगर में भागवत कथा के चौथे दिन गूंजा भक्ति और मर्यादा का संदेश

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प्रवचन करते रामानुजाचार्य स्वामी रत्नेश प्रपन्नाचार्य | Prabhat Khabar Network

श्री बंशीधर नगर में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान स्वामी रत्नेश प्रपन्नाचार्य ने कहा कि धर्म की कथा तभी सार्थक है जब उसके आदर्श हमारे आचरण का हिस्सा बनें.

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गौरव पांडेय की रिपोर्ट

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श्री बंशीधर नगर. ऐतिहासिक श्री राधा-कृष्ण बंशीधर मंदिर परिसर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के चौथे दिन श्रद्धालुओं को भगवान के विभिन्न अवतारों और भक्तों के चरित्र के माध्यम से धर्म, भक्ति, समर्पण और मर्यादित जीवन का संदेश दिया गया.

अयोध्या धाम से पहुंचे श्रीमद् जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी रत्नेश प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने कथा के दौरान प्रह्लाद चरित्र, वामन भगवान और राजा बलि के प्रसंग, भगवान श्रीराम के जीवन आदर्श तथा भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य और जन्मोत्सव का विस्तार से वर्णन किया.

प्रह्लाद से सीखें अटूट विश्वास

स्वामी रत्नेश प्रपन्नाचार्य ने कहा कि धर्म की कथा सुनना तभी सार्थक है, जब उसके आदर्श हमारे आचरण का हिस्सा बनें. प्रह्लाद का चरित्र सिखाता है कि भक्ति परिस्थितियों की अनुकूलता पर निर्भर नहीं होती, बल्कि अटूट विश्वास पर टिकी होती है.

उन्होंने कहा कि जीवन में कितनी भी विपरीत परिस्थितियां आयें, परमात्मा पर विश्वास रखने वाला व्यक्ति भय से पराजित नहीं होता. कठिन समय में भगवान से विमुख होने के बजाय उनकी शरण में और दृढ़ता से जाना चाहिए.

अहंकार पर विजय जरूरी

वामन भगवान और राजा बलि के प्रसंग की चर्चा करते हुए स्वामी रत्नेश ने कहा कि मनुष्य को सबसे पहले अपने भीतर के अहंकार पर विजय प्राप्त करनी चाहिए. धन, पद और प्रतिष्ठा मिलने के बाद भी विनम्र बने रहना ही वास्तविक साधना है.

उन्होंने कहा कि आज मनुष्य अपने अधिकारों के लिए तो संघर्ष करता है, लेकिन कर्तव्यों को भूलता जा रहा है. भगवान श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि परिवार और समाज में शांति केवल अधिकारों से नहीं, बल्कि कर्तव्यबोध और मर्यादित आचरण से स्थापित होती है.

श्रीकृष्ण जन्म का बताया आध्यात्मिक अर्थ

भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का आध्यात्मिक अर्थ समझाते हुए स्वामी रत्नेश ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्म का संदेश केवल बाहरी उत्सव तक सीमित नहीं है. जब मनुष्य के हृदय से अज्ञान दूर होता है और उसमें भक्ति का प्रकाश आता है, तभी वास्तविक आध्यात्मिक जागरण होता है.

कथा के दौरान मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे. भक्ति और धार्मिक वातावरण से पूरा परिसर भक्तिमय बना रहा.

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ये लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम में प्रधान ट्रस्टी राजेश प्रताप देव, नगर पंचायत अध्यक्ष साधना देवी, वैजनाथ तिवारी, धीरेंद्र चौबे, मनीष जायसवाल, वीरेंद्र प्रसाद कमलापुरी, मनदीप कमलापुरी, रजनीकांत मधुर उर्फ भोलू, सुजीत लाल अग्रवाल, सुरेश विश्वकर्मा समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे.

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