कागज पर तेजी, बैंक में सुस्ती: पीएम विश्वकर्मा में 5207 आवेदन आये, 1164 हुए रिजेक्ट
गढ़वा में पीएम विश्वकर्मा और खाद्य उद्योग योजना के आवेदनों पर बैंकों की धीमी रफ्तार से लाभुक परेशान हैं। प्रशासन ने त्वरित निष्पादन का अल्टीमेटम दिया है।
डीसी ने बैंकों को लंबित आवेदनों के त्वरित निष्पादन का अल्टीमेटम दिया
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अविनाश की रिपोर्ट
गढ़वा. केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जिले के लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रशासन की ओर से प्रयास किये जा रहे हैं. इसके बावजूद बैंक स्तर पर आवेदनों के निष्पादन की धीमी रफ्तार चिंता का कारण बनी हुई है. गढ़वा जिले में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के आंकड़े इसकी तस्वीर साफ करते हैं.
केवल सात आवेदनों पर ऋण स्वीकृत
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए गढ़वा जिले को 26 लाभुकों का लक्ष्य मिला है. इसके मुकाबले जिला प्रशासन ने 66 आवेदन विभिन्न बैंकों को भेजे हैं. यानी लक्ष्य से 40 अधिक आवेदन बैंकों को भेजे गये. इसके बावजूद अब तक केवल सात आवेदनों पर ऋण स्वीकृत हुआ है. इनमें चार लाभुकों को ऋण की राशि भी मिल चुकी है.
56 आवेदन अभी भी बैंक स्तर पर लंबित
इन चार लाभुकों को कुल 94.05 लाख रुपये का भुगतान किया गया है. वहीं सात आवेदन बैंकों ने अस्वीकृत कर दिये हैं. सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि 56 आवेदन अभी भी बैंक स्तर पर लंबित हैं. आवेदन लंबित रहने के कारण पात्र लाभुकों को योजना का लाभ मिलने में देरी हो रही है.
छोटे कारोबारियों को मिलती है 35 प्रतिशत तक सब्सिडी
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना का उद्देश्य छोटे खाद्य प्रसंस्करण कारोबारियों को आर्थिक और तकनीकी मदद देना है. इस योजना के तहत आटा मिल, तेल मिल, बेकरी, अचार-पापड़ निर्माण तथा फल और सब्जी प्रसंस्करण जैसे छोटे उद्योगों से जुड़े लोगों को सहायता दी जाती है. व्यक्तिगत उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और एफपीओ को परियोजना लागत का 35 प्रतिशत तक क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी देने का प्रावधान है. इसकी अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये तक है. इससे छोटे कारोबारियों को अपना व्यवसाय बढ़ाने और आधुनिक बनाने में मदद मिल सकती है.
पीएम विश्वकर्मा में 5207 आवेदन प्राप्त
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत गढ़वा जिले में अब तक 5207 आवेदन प्राप्त हुए हैं. इनमें 190 आवेदन अभी ग्राम पंचायत स्तर पर लंबित हैं. जिला स्तर पर 5017 आवेदन पहुंचे हैं. इनमें से 79 आवेदनों की जांच अभी जारी है. जांच के दौरान निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करने या तकनीकी कमियों के कारण जिला स्तर पर 1164 आवेदन अस्वीकृत किये गये हैं. वहीं जांच पूरी होने के बाद 3774 आवेदनों को योजना के तीसरे चरण यानी स्टेज-3 के लिए अनुशंसित किया गया है.
18 पारंपरिक व्यवसायों के कारीगरों को मिलता है लाभ
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों और शिल्पकारों को सहायता दी जाती है. इनमें बढ़ई, लोहार, ताला बनाने वाले, राजमिस्त्री, मोची, नाई, धोबी, दर्जी और मूर्तिकार समेत अन्य पारंपरिक काम करने वाले लोग शामिल हैं. पात्र लाभुकों को बिना गारंटी के रियायती ब्याज दर पर ऋण देने का प्रावधान है. पहली किस्त में एक लाख रुपये और दूसरी किस्त में दो लाख रुपये तक ऋण मिल सकता है. इसके अलावा 15 हजार रुपये तक टूलकिट प्रोत्साहन और प्रशिक्षण की सुविधा भी दी जाती है.
बैंकों की धीमी रफ्तार पर डीसी नाराज
केंद्र सरकार की योजनाओं की समीक्षा के दौरान बैंकों में लंबित आवेदनों का मामला सामने आने पर उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने नाराजगी जतायी. उन्होंने संबंधित बैंकों के कामकाज पर असंतोष व्यक्त करते हुए लंबित आवेदनों का जल्द निष्पादन करने का निर्देश दिया. उपायुक्त ने कहा कि योजनाओं के तहत प्राप्त आवेदनों को बिना कारण लंबित रखना उचित नहीं है. उन्होंने बैंकों को अगली समीक्षा बैठक तक निर्धारित लक्ष्य पूरा करने का निर्देश दिया है. प्रशासन अब बैंक स्तर पर लंबित आवेदनों की संख्या कम करने और पात्र लाभुकों को समय पर ऋण एवं सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने पर जोर दे रहा है.
हालांकि, सूक्ष्म खाद्य उद्योग योजना में लक्ष्य से अधिक आवेदन बैंकों को भेजे जाने के बावजूद 56 आवेदन लंबित रहना बैंक स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन की गति पर सवाल खड़ा कर रहा है.
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