वनतुलसी व चकवड़ के दाने बेचते हैं, तो जलता है चूल्हा

Published at :03 Dec 2014 9:02 PM (IST)
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वनतुलसी व चकवड़ के दाने बेचते हैं, तो जलता है चूल्हा

जंगल में वनतुलसी का दाना निकाल कर जीवन यापन कर रहे हैं गरीबबच्चे भी चकवड़ व वनतुलसी काटने में करते हैं मदद3जीडब्ल्यूपीएच11- माता के साथ वनतुलसी का दाना निकालते बच्चे हेडलाइन…गरीबी की दास्तां कह रहा है भंडरिया प्रतिनिधि, भंडरिया (गढ़वा). भंडरिया प्रखंड के विभिन्न गांवों में गरीब परिवार के सदस्यों के लिए वनतुलसी व चकवड़ […]

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जंगल में वनतुलसी का दाना निकाल कर जीवन यापन कर रहे हैं गरीबबच्चे भी चकवड़ व वनतुलसी काटने में करते हैं मदद3जीडब्ल्यूपीएच11- माता के साथ वनतुलसी का दाना निकालते बच्चे हेडलाइन…गरीबी की दास्तां कह रहा है भंडरिया प्रतिनिधि, भंडरिया (गढ़वा). भंडरिया प्रखंड के विभिन्न गांवों में गरीब परिवार के सदस्यों के लिए वनतुलसी व चकवड़ का दाना जीवन यापन का सहारा बना हुआ है. गरीब परिवार के महिला व बच्चे सुबह होते ही हंसुआ लेकर जंगल की ओर निकल पड़ते हैं. वे वहां से वनतुलसी एवं चकवड़ काट कर घर लाते हैं. इसके बाद दाना निकाल कर वे बाजार में बेच कर अपनी आय का सहारा बनाते हैं. वनतुलसी काट रही महिलाएं बताती हैं कि प्रति व्यक्ति दो से तीन किग्रा चकवड़ का दाना दिन भर में जमा कर लेते हैं. इस दाने को बेचने से उनका घर का गुजारा किसी तरह हो जाता है. गौरतलब है कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले दर्जनों बच्चे भी इस काम में माता- पिता का हाथ बंटाते हैं. वनतुलसी काटने में जुटी कक्षा चार में पढ़नेवाली खुशबू कुमारी से पूछे जाने पर उसने कहा कि घर में खाने को कुछ नहीं है. जंगल में मां का मदद करने से जो दाना निकाला जायेगा, उससे कुछ रुपया आ जायेगा. इसी से घर का चूल्हा जलेगा. गांव में कोई काम- धंधा नहीं हो रहा है. खेती भी इस बार नहीं हुई. इसके कारण इस वर्ष विशेष रूप से मजबूरी में चकवड़ जमा करना पड़ रहा है. चकवड़ काटने में कई बुजुर्ग महिलाएं भी शामिल रहती है. पार्वती कुंवर, दुलपाती कुंवर, फुलकुमारी देवी आदि की शिकायत है कि मजदूरी कोई देता नहीं है और कई महीने से उनकी पेंशन भी नहीं मिल रही है. इससे उनके सामने पेट भरने के लिए२ कुछ न कुछ करना मजबूरी है.

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