19 साल बाद भी लागू नहीं हुई खेल नीति

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गढ़वा : गढ़वा में जन्मे व दिल्ली में पले बढ़े कुश्ती के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुके ट्रेडिशनल स्टाइल कुश्ती के भारतीय महासंघ के महासचिव शैलेंद्र पाठक ने प्रभात खबर के साथ बातचीत में कहा कि राज्य बनने के 19 साल बाद भी खेल नीति का नहीं बनना काफी अफासोस जनक है. उल्लेखनीय है […]

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गढ़वा : गढ़वा में जन्मे व दिल्ली में पले बढ़े कुश्ती के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुके ट्रेडिशनल स्टाइल कुश्ती के भारतीय महासंघ के महासचिव शैलेंद्र पाठक ने प्रभात खबर के साथ बातचीत में कहा कि राज्य बनने के 19 साल बाद भी खेल नीति का नहीं बनना काफी अफासोस जनक है. उल्लेखनीय है कि श्री पाठक वर्ष 2002 से गढ़वा में कुश्ती संघ का गठन कर झारखंड राज्य में खेल को बढ़ावा देने का काम शुरू किया और राज्य में महिला कुश्ती की शुरुआत का श्रेय भी उन्हीं के नाम है.

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जिला प्रशासन द्वारा वर्ष 2005 में उन्हें गढ़वा गौरव से सम्मानित किया गया. श्री पाठक अब तक नेशनल गेम्स, इंटरनेशनल स्पोर्ट्स गेम्स व कॉमनवेल्थ गेम्स में देश की ओर से शामिल रहे हैं. वर्तमान में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लेवल पर खेलों को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान प्राकृतिक संसाधन सौंदर्य कला संस्कृति और खेल की रही है.
इसमें हम खेल की बात करें तो झारखंड राज्य जब से बिहार से अलग हुआ. सबसे ज्यादा इसकी पहचान राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों ने दी है. खेल एक ऐसा क्षेत्र है, जो सामाजिक समरसता को बढ़ाता है. प्रतिस्पर्द्धा को बढ़ाता है. नौजवानों को जूझने और जीवन में कुछ प्राप्त करने का एक अलग पहचान बनाने का शुभ अवसर प्रदान करता है.
झारखंड में ऐसे बहुत सारे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने कई खेलों में राष्ट्रीय स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य को गौरवान्वित करने का काम किया. झारखंड राज्य में खेल युवाओं के आत्मा में बसता है और राज्य के छोटे स्तर से लेकर बड़े स्तर तक यहां तक कि मुख्यमंत्री तक खिलाड़ियों के कभी-कभार पीठ थपथपाते हुए अपनी पीठों को ज्यादा थपथपाते हैं. लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य गठन के 19 वर्ष बाद भी खेल नीति का नहीं होना, अभी तक सिर्फ फाइलों में झूलते रहना, इस मुद्दे को वे स्थानीय एवं राज्य स्तर पर उठाते रहे हैं.
विद्यालय स्तर से ही हमें यह प्रयास करना होगा कि जब विद्यालय का कोई खिलाड़ी खेल कर आता हो, तो उसे मार्क्स मिलने चाहिए और नामांकन में प्राथमिकता मिलनी चाहिए. खेल और खिलाड़ियों के लिए झारखंड राज्य में सुव्यवस्थित सुविधा होनी चाहिए. यथाशीघ्र खेल नीति लागू होना चाहिए तथा राज्य में राज्य के खिलाड़ियों को रोजगार मिलना चाहिए.
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