गढ़वा : अगस्त की बारिश ने धान की खेती को दी संजीवनी, रोपनी 85 फीसदी तक पहुंची

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धान के खेत | Prabhat Khabar Network

अगस्त में हुई अच्छी बारिश के कारण धान की रोपनी में 80 फीसदी का उछाल आया है। जिले में अब तक 85 फीसदी धान की रोपनी पूरी हो चुकी है, जिससे किसानों को राहत मिली है।

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जून-जुलाई में मानसून की बेरुखी से 4.27 फीसदी तक सिमटी थी रोपनी, एक महीने में करीब 80 फीसदी का उछाल

जितेंद्र सिंह की रिपोर्ट गढ़वा. जून-जुलाई में मानसून की बेरुखी से पिछड़ गयी धान की खेती को अगस्त की बारिश ने संजीवनी दे दी है. शुरुआती दो महीनों में बारिश की कमी के कारण जहां धान की रोपनी को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गयी थी, वहीं अगस्त में लगातार हुई बारिश के बाद रोपनी ने अचानक रफ्तार पकड़ ली. एक अगस्त तक जिले में धान की रोपनी लक्ष्य के महज 4.27 फीसदी तक सिमटी थी, जो अब बढ़कर करीब 85 फीसदी पहुंच गयी है. यानी एक महीने के भीतर ही रोपनी में करीब 80 फीसदी का उछाल आया है. खेतों में पानी और पर्याप्त नमी मिलने के बाद किसान दिन-रात रोपनी में जुटे रहे. अब अधिकांश खेतों में धान की हरियाली नजर आने लगी है.

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बारिश ने बदला पूरा परिदृश्य

इस खरीफ सीजन की शुरुआत किसानों के लिए अच्छी नहीं रही. जून में जिले में मात्र 15.6 मिलीमीटर बारिश हुई. जुलाई में बारिश का आंकड़ा 212.7 मिलीमीटर तक पहुंचा, लेकिन यह भी धान की खेती के लिए पर्याप्त नहीं रहा. नतीजा यह हुआ कि एक अगस्त तक धान की रोपनी लक्ष्य के महज 4.27 फीसदी तक ही पहुंच सकी थी. नौ अगस्त तक यह आंकड़ा बढ़कर 12.18 फीसदी हुआ, जबकि 13 अगस्त तक रोपनी करीब 31 फीसदी तक पहुंची थी.

आंकड़ा 31 फीसदी से बढ़कर करीब 85 फीसदी

इसके बाद अगस्त के दूसरे और तीसरे सप्ताह में बारिश ने जोर पकड़ा और खेती की तस्वीर तेजी से बदलने लगी. खेतों में पानी जमा होने और मिट्टी में पर्याप्त नमी आने के बाद किसानों ने रोपनी तेज कर दी. देखते ही देखते रोपनी का आंकड़ा 31 फीसदी से बढ़कर करीब 85 फीसदी तक पहुंच गया.

एक महीने में 80 फीसदी का उछाल

धान की रोपनी के आंकड़े में अगस्त के दौरान आया उछाल मानसून की भूमिका को साफ दिखाता है. एक अगस्त को जहां जिले में मात्र 4.27 फीसदी रोपनी हुई थी, वहीं अब करीब 85 फीसदी खेतों में धान की रोपनी पूरी हो चुकी है. इस तरह करीब एक महीने में रोपनी के आंकड़े में लगभग 80 फीसदी का उछाल आया है.

बारिश ने न सिर्फ किसानों की चिंता कम की है, बल्कि खरीफ की उम्मीदों को भी दोबारा जगा दिया है.

लगभग सभी प्रखंडों में स्थिति संतोषजनक

जिला कृषि पदाधिकारी खुशबू पासवान ने बताया कि प्रखंडों से मिली जानकारी के अनुसार जिले में अब तक करीब 85 फीसदी धान की रोपनी पूरी हो चुकी है. अगस्त में अच्छी बारिश होने के बाद रोपनी में तेजी आयी. खेतों में पर्याप्त पानी और नमी मिलने से किसानों ने तेजी से रोपनी का काम पूरा किया है.

उन्होंने बताया कि जिले के लगभग सभी प्रखंडों में धान की रोपनी की स्थिति संतोषजनक है. मझिआंव प्रखंड में करीब 80 फीसदी रोपनी होने की जानकारी मिली है. अन्य प्रखंडों में भी किसान शेष खेतों में रोपनी का काम पूरा करने में जुटे हुए हैं.

1.41 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य

जिले में इस खरीफ मौसम में करीब 1.41 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान आच्छादन का लक्ष्य रखा गया है. मानसून की शुरुआत में बारिश की कमी को देखते हुए लक्ष्य हासिल करना मुश्किल लग रहा था, लेकिन अगस्त की बारिश ने स्थिति को काफी हद तक संभाल लिया है.

उत्पादन पर मौसम का असर

हालांकि, देर से हुई रोपनी अब भी चुनौती बनी हुई है. देर से रोपे गये धान को फसल तैयार होने के लिए अपेक्षाकृत कम समय मिलेगा. ऐसे में उत्पादन पर मौसम का असर पड़ सकता है. ऊंचे और पूरी तरह वर्षा आधारित खेतों में भी किसानों को अभी पर्याप्त बारिश की जरूरत है.

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शुरुआती बारिश की कमी का असर बरकरार

अगस्त में बारिश ने भले ही धान की खेती को संभाल लिया हो, लेकिन जून-जुलाई में हुई बारिश की कमी का असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. शुरुआती बारिश कम होने के कारण कई जलस्रोतों और खेतों में पानी की उपलब्धता प्रभावित हुई थी. इसका असर खरीफ की शुरुआती खेती पर भी पड़ा.

अब किसानों की निगाह सितंबर के मौसम पर टिकी है. सितंबर में पर्याप्त बारिश हुई तो देर से रोपी गयी फसल को बढ़ने के लिए जरूरी नमी मिलती रहेगी और उत्पादन में संभावित नुकसान को कम किया जा सकेगा.

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चार आंकड़े बदलते मौसम की कहानी कहते हैं

  • 1 अगस्त : 4.27 फीसदी धान की रोपनी
  • 9 अगस्त : 12.18 फीसदी रोपनी
  • 13 अगस्त : करीब 31 फीसदी रोपनी
  • अब तक : करीब 85 फीसदी रोपनी

अगस्त की बारिश ने महज कुछ सप्ताह में धान की खेती की पूरी तस्वीर बदल दी है. शुरुआत में सूखे जैसे हालात से जूझ रहे किसानों के खेत अब धान की हरियाली से गुलजार हैं. हालांकि, फसल का भविष्य अब सितंबर की बारिश और आगे के मौसम पर निर्भर करेगा.

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