गढ़वा : अभिकर्ता बन मुखिया पति ने निकाले 14 लाख रुपये

Updated at : 16 Jun 2018 8:27 AM (IST)
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गढ़वा : अभिकर्ता बन मुखिया पति ने निकाले 14 लाख रुपये

जिला परिषद के डीपीएम ने जांच में पकड़ी गड़बड़ी, कार्रवाई की अनुशंसा नियमानुसार मुखिया, उप मुखिया, वार्ड पार्षद का रिश्तेदार नहीं बन सकता अभिकर्ता पीयूष तिवारी गढ़वा : मेराल प्रखंड की गेरूआ पंचायत में 14वें वित्त की राशि से ली गयी योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितता पकड़ में आयी है़ इस अनियमितता के आलोक […]

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जिला परिषद के डीपीएम ने जांच में पकड़ी गड़बड़ी, कार्रवाई की अनुशंसा
नियमानुसार मुखिया, उप मुखिया, वार्ड पार्षद का रिश्तेदार नहीं बन सकता अभिकर्ता
पीयूष तिवारी
गढ़वा : मेराल प्रखंड की गेरूआ पंचायत में 14वें वित्त की राशि से ली गयी योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितता पकड़ में आयी है़ इस अनियमितता के आलोक में उपविकास आयुक्त के आदेश पर हुई जांच के पश्चात मुखिया व मुखिया पति के ऊपर कार्रवाई की अनुशंसा की गयी है़
जांच अधिकारी के रूप में प्रतिनियुक्त जिला परिषद के डीपीएम ने जिला पंचायती राज पदाधिकारी को कार्रवाई के लिए जांच रिपोर्ट भेजा है़
इस रिपोर्ट में 14वें वित्त की राशि से चापाकल अधिष्ठापन व आंगनबाड़ी भवन निर्माण में नियम विरुद्ध तरीके से मुखिया पति को ही अभिकर्ता बनाने एवं उनके खाते में 14.80 लाख रुपये का भुगतान करने की बात कही गयी है़ जांच रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय साल 2016-17 में गेरूआ पंचायत के गेरूआ व देवगाना गांव में चापाकल लगाया गया़
इसका अभिकर्ता मुखिया पति अनिल चौधरी को बनाया गया और 13 चेक के माध्यम से कुल 17 चापाकल के लिए 8,75,148 रुपये का भुगतान उनके खाते में कर दिया गया़ इसी तरह गेरूआ पंचायत के ही गेरूआ व कजराठ गांव में चार आंगनबाड़ी निर्माण का अभिकर्ता भी मुखिया पति को ही बनाते हुए चार चेक के माध्यम से कुल 6,05,644 रुपये का भुगतान कर दिया गया है़ जबकि ग्रामीण विकास विभाग झारखंड सरकार के आदेश संख्या 297 एवं ज्ञापांक 3961 के कंडिका के अनुसार योजना का अभिकर्ता मुखिया, उप मुखिया या वार्ड सदस्यों के निजी रिश्तेदार, उच्चतर संस्था के प्रतिनिधि व सरकारीकर्मी को अभिकर्ता नहीं बनाया जा सकता है़
बताया गया कि गेरूआ पंचायत में अन्य योजनाओं में भी मुखिया पति को अभिकर्ता बनाया गया है़ अभिकर्ता चयन को लेकर नियमानुसार पंचायत कार्यकारिणी की बैठक बुलायी जाती है, जिसमें उसमें से बाहर के किसी व्यक्ति को कार्य का अभिकर्ता बनाया जाता है़ लेकिन इस मामले में बिना बैठक के ही मुखिया पति को अभिकर्ता बना दिया गया और भुगतान भी कर दिया गया़
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