पोटका : युवती को अविवाहित माना, युवक पर जुर्माना

Updated at : 01 May 2017 8:05 AM (IST)
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पोटका : युवती को अविवाहित माना, युवक पर जुर्माना

पोटका : पोटका के बांधुवा गांव की युवती की मांग में समाज के ही युवक द्वारा जबरन सिंदूर भरने के मामले में रविवार को रसुनचोपा गांव स्थित शिशु मंदिर प्रांगण में संताल समाज की सामाजिक बैठक हुई. इसकी अध्यक्षता हल्दीपोखर तोरोफ परगाना सुशील हांसदा ने की. युवती द्वारा उसके मांग में सिंदूर भरने वाले युवक […]

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पोटका : पोटका के बांधुवा गांव की युवती की मांग में समाज के ही युवक द्वारा जबरन सिंदूर भरने के मामले में रविवार को रसुनचोपा गांव स्थित शिशु मंदिर प्रांगण में संताल समाज की सामाजिक बैठक हुई. इसकी अध्यक्षता हल्दीपोखर तोरोफ परगाना सुशील हांसदा ने की. युवती द्वारा उसके मांग में सिंदूर भरने वाले युवक से शादी करने से इनकार कर देने के बाद बैठक में समाज ने बेहद अहम निर्णय लेते हुए युवती को अविवाहित माना और युवक पर शादी का पूरा खर्च वहन करने के साथ-साथ दो मवेशी, तीन मुर्गा व 16 हजार जुर्माना भी लगाया.बैठक में धाड़ दिशोम, कुचुंग दिशोम के परगाना, माझी बाबा समेत करीब 50 गांवों के लोग व विचारक शामिल हुए.
सामाजिक बैठक में राजनगर के झुमाल गांव के युवक और पोटका के छोटा बांधुवा गांव की युवती को लेकर चल रहे विवाद का निबटारा किया गया. गौरतलब है कि करीब छह माह पहले युवक ने युवती की मांग में जबरन सिंदूर डाल दिया था. समाज के अगुवाओं ने पहले युवक और युवती को आपसी सहमति से विवाह करने पर भी विचार करने को कहा. इस पर युवक तैयार हो गया, जबकि युवती ने साफ इनकार कर दिया.
समाज के लोगों ने कहा कि किसी युवती की मांग में जबरन सिंदूर डालना बिल्कुल उचित नहीं है. इस तरह की घटना को समाज प्रश्रय नहीं देगा. शादी विवाह कोई खेल नहीं है.
इसमें दोनों की रजामंदी होनी चाहिए. बैठक में कहा गया कि युवती विवाहित तब मानी जाती जब वह युवक के घर जाती और पारंपरिक तरीके से उसका पांव धोया जाता, उसे चूड़ी पहनायी जाती. इस मामले में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है, इसलिए इसे सिर्फ एक घटना के रूप में देखा जाना चाहिए और युवती पहले जिस रूप में थी, उसी रूप में (अविवाहित) माना जाये. संताल समाज के स्वशासन व्यवस्था के अगुवाओं ने घटना को गंभीरता से लेते हुए युवक को दंडित किया. सामाजिक दंड स्वरूप मांगा गया हर्जाना समाज के बीच देना पड़ा.
बैठक में कालिकापुर तोरोफ परगाना पुन्ता मुर्मू, जुगसलाई तोरोफ परगाना दसमत हांसदा, जुमाल माझी बाबा माझीराम हांसदा, छोटा बांदुआ माझीबाबा दासो टुडू, रसुनचोपा माझी बाबा शशोधर हांसदा, तालसा माझी बाबा दुर्गा चरण मुर्मू, गालुसिंगी माझी बाबा आइंठु हांसदा, सारजामदा माझी बाबा भुगलू सोरेन, रामगढ़ माझीबाबा गगन मार्डी, लखीपोस माझी बाबा बोयला हांसदा, बिरवाद माझीबाबा मानसिंह सोरेन, बड़ाबागलता माझीबाबा नरेंद्र हांसदा, जुड़ीपहाड़ी माझीबाबा बबलू मुर्मू, दुबराजपुर माझीबाबा सुनील सोरेन समेत पचास से अधिक गांव के लोग उपस्थित थे.
क्या-क्या लगा दंड
कासा बाटी (कांसा का बर्तन)- 2, सोना ठिपी (सोने की बाली)-1, सोना फूली (सोने की नथुनी)-1, रूपा माला (चांदी का जेवर)-1, गोन-पोन: झींगा बाहा (शादी में रिश्तेदारों का पारंपरिक वस्त्र)-31, सोसरोज झोड़ा (पारंपरिक वस्त्र)- 25, गाते कुड़ी (सहेलियों का वस्त्र)- 5, हेडे (मां का वस्त्र)- 1, बोंगा बुढ़ी (दादी को वस्त्र)- 1, घेंट हेरमेद (चाचा-चाची का वस्त्र) -1, ताड़ाम गांडे (दीदी का वस्त्र)-1, गेलबार भारी बुसूब गिड़ी (लालन-पालने करनेवाले का वस्त्र)- 1, कासी टांडी ओता दाड़े-2, बुनुम दानांग आर तोलान को (एक जोड़ा मवेशी),धोरोम सोझे लागिद मिदटांग बोदा व गोराम सोझे लागिद पेया सिम (धर्म तोड़ने और गांव की नीतियों को नहीं मानने के कारण तीन मुर्गी), काई रेनाअ (गुनाह करने के लिए)- 10 हजार रुपये, सांवता लेवड़ा (समाज को गंदा करने के लिए)- 6 हजार रुपये
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