नक्सली हमले की गोली का दर्द झेलते रहे पुलिसकर्मी मजबूल, इलाज के दौरान निधन

Updated:
विज्ञापन

मृतक पुलिस जवान के घर जुटी भीड़ | Prabhat Khabar Network

झारखंड पुलिस के जवान मजबूल अंसारी का निधन हो गया. 2012 में नक्सली हमले के दौरान गोली लगने से घायल हुए थे. वर्धमान में चल रहा था इलाज.

विज्ञापन

प्रतिनिधि, काठीकुंड : दुमका जिले के काठीकुंड प्रखंड के मधुबन गांव निवासी एवं झारखंड पुलिस में कार्यरत करीब 46 वर्षीय मजबूल अंसारी का इलाज के दौरान निधन हो गया. उन्होंने वर्धमान में अंतिम सांस ली. निधन की खबर मिलते ही मधुबन गांव और आसपास के इलाके में शोक की लहर दौड़ गयी. बड़ी संख्या में ग्रामीण, परिजन, रिश्तेदार और परिचित गांव पहुंचे और नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी.

आपके शहर में

विज्ञापन

2008 से झारखंड पुलिस में दे रहे थे सेवा

मजबूल अंसारी वर्ष 2008 से झारखंड पुलिस में सेवा दे रहे थे. वर्तमान में उनकी पदस्थापना धनबाद जिले में थी. पुलिस सेवा के दौरान उन्होंने कई कठिन परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया.

वर्ष 2012 में तोपचांची क्षेत्र में हुए नक्सली कांड के दौरान ड्यूटी पर रहते हुए उन्हें गोली लगी थी. गोली लगने के बाद से वह लगातार शारीरिक दर्द से परेशान रहते थे. इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और अपनी सेवा जारी रखी.

पीलिया से भी थे पीड़ित, वर्धमान में चल रहा था इलाज

परिजनों के अनुसार, हाल के दिनों में मजबूल अंसारी पीलिया से भी पीड़ित थे. स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद वर्धमान में उनका इलाज चल रहा था. इसी दौरान रविवार सुबह करीब पांच बजे उनका निधन हो गया.

उनके निधन की खबर मिलते ही मधुबन गांव में बड़ी संख्या में लोग पहुंचने लगे. परिवार के साथ-साथ पूरे गांव में शोक का माहौल छा गया.

मजबूल अंसारी मधुबन गांव के पूर्व प्रधान स्वर्गीय आजाद मियां के पुत्र थे. अपने पीछे मां, पत्नी, एक पुत्री और दो पुत्र समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गये हैं. उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है.

सैकड़ों लोगों ने दी अंतिम विदाई

रविवार को मधुबन गांव में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और आसपास के लोग अंतिम संस्कार में शामिल हुए. लोगों ने पार्थिव शरीर को मिट्टी देकर अंतिम विदाई दी और शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की.

ग्रामीणों ने कहा कि पुलिस सेवा के दौरान मजबूल अंसारी ने कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से निर्वहन किया. वर्ष 2012 के नक्सली कांड में गोली लगने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और सेवा जारी रखी. ग्रामीणों ने उनके निधन को परिवार के साथ-साथ पूरे गांव के लिए अपूरणीय क्षति बताया. अंतिम विदाई के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी से माहौल गमगीन रहा.

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola