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छठ महापर्व का पहला अर्ध्य आज, छठ व्रतियों ने खरना किया प्रतिनिधि, बासुकिनाथसूर्य उपासना का महापर्व छठ को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में है. भक्तों की अटल आस्था के अनूठे पर्व छठ में सूर्य की पहली किरण और सायंकाल में अंतिम किरण को अर्ध्य देकर भगवान सूर्य को नमन किया जायेगा. मंगलवार को विभिन्न छठ […]
छठ महापर्व का पहला अर्ध्य आज, छठ व्रतियों ने खरना किया प्रतिनिधि, बासुकिनाथसूर्य उपासना का महापर्व छठ को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में है. भक्तों की अटल आस्था के अनूठे पर्व छठ में सूर्य की पहली किरण और सायंकाल में अंतिम किरण को अर्ध्य देकर भगवान सूर्य को नमन किया जायेगा. मंगलवार को विभिन्न छठ घाटों में छठ व्रतियों द्वारा अस्ताचल गामी भगवान भास्कर को पहला अर्घ्य दिया जायेगा. छठ व्रत पुत्र-पौत्र, धन संपदा एवं अखंड सुख को देने वाली है. ———————– छठ व्रतियों ने खरना किया——————- बासुकिनाथ. छठ व्रतियों ने सोमवार को खरना किया जिसमें दूध, चावल व गुढ़ से बने खीर का भोग लगाकर भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया. इसे लोहंडा भी कहा जाता है. छठ का अर्थ होता है छह चरणों की यौगिक प्रक्रिया. इसमें हठ योग द्वारा सौर ऊर्जा को आत्मसात कर शारीरिक एवं मानसिक शुद्धि की जाती है. सूर्य उपासना के इस पर्व में पूजारी की आवश्यकता नहीं पड़ती है. उतम स्वास्थय की कामना और लंबी उम्र के लिए नियमित सूर्य की पूजा करनी चाहिए.————————— छठ पर्व प्रकृति का सम्मान एवं आस्था का उच्चतम नैतिक मूल्य ————————-बासुकिनाथ. कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के षष्ठी व सप्तमी को अर्ध्य देकर अस्ताचलगामी एवं उगते सूर्य को अर्ध्य देने से भगवान प्रसन्न होते हैं. इनके द्वादश नाम क्रमश: आदित्य, रवि, कमलेषु, इंद्र, भास्कर, दिवाकर, प्रभाकर, शिवम, विष्णु, ब्रम्हा, भानु एवं दिनेश है. मान्यता के अनुसार छठ पर्व की शुरूआत महाभारत काल में ही हुई थी. सबसे पहले सूर्य पूत्र कर्ण ने सूर्य देव की पूजा शुरू की. कर्ण भगवान सूर्य का परम भक्त थे. वह प्रतिदिन घंटों कमर तक पानी में खड़ा रहकर भगवान सूर्य को अर्ध्य देते थे. लोक आस्था के इस पर्व में एक दूसरे के साथ सहयोग और प्रकृति का सम्मान आस्था का उच्चतम नैतिक मूल्य है. ——————–फोटो-16 बासुकिनाथ खरना करती महिलाएं————————
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