बिना एप्रोच लाखों के पुल बने डेड असेट्स

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Jun 2018 5:11 AM

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दुमका : जिले में हाल के दशक में विकास से जुड़े निर्माण कार्यों में तेजी आयी है. पर इन निर्माण कार्यों के बीच जब हमने गांवों-पंचायतों में बने पुल-पुलियों की पड़ताल की. तो सैकड़ों ऐसे पुल-पुलिया बने दिखे. इसके बनने से लोग लाभान्वित हो रहे हैं. आवागमन सुलभ हुआ है. लेकिन विभिन्न प्रखंडों में अलग-अलग […]

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दुमका : जिले में हाल के दशक में विकास से जुड़े निर्माण कार्यों में तेजी आयी है. पर इन निर्माण कार्यों के बीच जब हमने गांवों-पंचायतों में बने पुल-पुलियों की पड़ताल की. तो सैकड़ों ऐसे पुल-पुलिया बने दिखे. इसके बनने से लोग लाभान्वित हो रहे हैं. आवागमन सुलभ हुआ है. लेकिन विभिन्न प्रखंडों में अलग-अलग विभागों से दर्जनों पुल ऐसे भी दिखे. जिनका निर्माण तो वर्षों से अधर में लटका हुआ है. किसी का निर्माण पूरा हो चुका है, पर एप्रोच नहीं बना, तो कई पुल आकार लेने से पहले ही जमींदोज होने की स्थिति में पहुंच गये हैं. प्रभात खबर की दुमका टीम द्वारा की गयी पड़ताल पर पर प्रस्तुत है ये रिपोर्ट….

कहीं बिना उपयोग के पहले हीं जमींदोज हो गया पुल

ग्रामीणों के विरोध व शिकायत के बाद भी पहल नहीं

दो दशक में नहीं बन पायी पुलिया

मसलिया : प्रखंड के उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र के आमगाछी पंचायत अंतर्गत सिमुलडीह गांव जानेवाले ग्रामीण सड़क के ऊपर पुलिया निर्माण कार्य दो दशक से अपूर्ण है. अब तो यह स्ट्रक्चर भी किसी दिन जमींदोज हो जाने की स्थिति में पहुंच गया है. ग्रामीणों ने बताया कि जवाहर रोजगार योजना से इस पुलिया का निर्माण हो रहा था. पुलिया निर्माण कार्य जैसी-तैसे आधा-अधूरा किया गया, पर उसकी उपयोगिता सुनिश्चित कराने की पहल आज तक नहीं की गयी. दोनों तरफ मिट्टी की भराई कर एप्रोच नहीं तैयार किये जाने के कारण लोगों को बरसात के समय आने जाने में काफी परेशानी हो रही है.

वर्षों से अधूरा है कोनियाडोभा जरिया का पुल

दलाही. प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत सहारडीह से कोलाबागान पथ पर कोनिया डोभा में पुल निर्माण कार्य वर्षों से अधूरा है. ग्रामीण राधानाथ किस्कू, शिव ठाकुर मुर्मू, शिवचरण, प्रोफेसर मरांडी, शक्ति सोरेन, प्रधान टुडू, अलोधन हेंब्रम, मिस्त्री सोरेन आदि ने बताया कि इस सड़क का निर्माण कार्य वर्ष 2013 से शुरू हुआ था. सड़क की लंबाई नौ किमी है. सड़क के बीच कोनियाडोभा जरिया का पुल निर्माण संवेदक की लापरवाही से पांच साल से अधूरा है. निर्माण कार्य की अवधि बीत चुकी है. बावजूद भी पुल व अधूरा हुआ है. राहगीरों को पथ पर यात्रा करने में काफी कष्ट उठाना पड़ रहा है. बरसात के दिनों में जोरिया में पानी भर जाता है, तो आवागमन पूर्ण रूप से ठप हो जाता है. वैकल्पिक व्यवस्था से किसी तरह यातायात किया जाता है.

20 वर्ष बाद भी गरड़ी गांव में बने पुल का

नहीं बना एप्रोच

नोनीहाट. रामगढ़ प्रखंड के लतवैरवा पंचायत के गरड़ी गांव में बने पुल का एप्रोच नहीं है. एक दशक से पुल की यही स्थिति है. बताया जा रहा है कि पुल का एप्रोच बना था, पर ध्वस्त हो गया था. जिससे लोगों काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. यह स्थिति एक दशक से बनी हुई है. एप्रोच बन जाये तो गरड़ी, मधुबन, गरड़ी बीच टोला से प्रखंड मुख्यालय रामगढ़ का संपर्क बेहतर हो जायेगा. मुरको नदी पर बने इस पुल का निर्माण विशेष प्रमंडल से कराया गया था. पुल का निर्माण 20 साल पहले हुआ था. ग्रामीण बताते हैं कि कई बार मौखिक व लिखित रूप से उनलोगों ने इसकी शिकायत की, पर कोई लाभ नहीं हुआ. दुमका-भागलपुर मुख्य पथ पीडब्लूडी नोनीहाट से यह पथ रामगढ़ मुख्यालय को जोड़ता है, इसलिए इस पुल को उपयोग के लायक तो बनाना ही चाहिए.

एप्रोच के लिए नहीं मिली जमीन

एक करोड़ का पुल बेकार

रानीश्वर. दुमका से कोलकाता जानेवाली सड़क पर ही पथ निर्माण विभाग की ओर से रानीश्वर व सुखजोड़ा गांव के बीच झुमरी जोरिया में करीब एक करोड़ की लागत से एक दशक पहले उच्च स्तरीय पुल निर्माण कराया गया था. यहां पुराने पुल के दोनों ओर तीखा मोड़ है. जहां अक्सर सड़क दुर्घटना घटते रहती है. दुर्घटना कम करने के लिए नये पुल निर्माण कर सड़क को सीधा किया जाना है, पर पुल के दोनों ओर जमाबंदी जमीन अधिग्रहण नहीं किये जाने से लंबे समय से पुल के दोनों ओर रास्ता नहीं बन पाने से पुल बेकार पड़ा हुआ है.

5.5 लाख का पुलिया, पांच साल से अधूरा

मसलिया. प्रखंड के बास्कीडीह पंचायत अंतर्गत भोक्ताडीह-कर्माटांड़ गांव के बीच पुलिया निर्माण कार्य पांच साल से अधूरा है. ग्रामीणों ने बताया कि आरइओ विभाग द्वारा जोरिया के दोनों तरफ पक्की सड़क का निर्माण कार्य चार वर्ष पूर्व पूरा कराया गया था. भोक्ताडीह-कर्माटांड़ गांव के बीच दो स्पेन पुलिया निर्माण कार्य आरइओ विभाग के अभियंता सह क्रियान्वयन एजेंसी नित्यानंद सिंह को लगभग पांच लाख 49 हजार रुपये से कराना था. पांच साल के दौरान सिर्फ पुलिया की दीवार खड़ी की गयी. ढलाई निर्माण कार्य पूरा नहीं कराया गया. इस कारण प्रखंड क्षेत्र के घांसीमारनी, आस्ताजोड़ा, धुरमुदनी, रांगामटिया, कर्माटांड़, भोक्ताडीह, जेरूवा, गंदलिया, खेरबोना, गुमरो, सिंगटूटा गांव के लोगों को बरसात के समय आवागमन में परेशानी झेलनी पड़ती है.

25 लाख का पुल बनकर 15 साल से बेकार

रानीश्वर. प्रखंड के आसनबनी से तिलाबुनी होते हुए मुरालपुर जानेवाले रास्ते पर तिलाबुनी नदी पर करीब डेढ़ दशक पहले करीब 25 लाख रुपये खर्च कर आरइओ विभाग से उच्च स्तरीय पुल बनाया था. पर पुल के पूर्वी ओर रास्ता नहीं बनाया गया है. पुल के पूर्वी ओर रास्ता बनाने के लिए दो सौ फीट तक सरकारी नक्शे में रास्ता नहीं है. जमाबंदी जमीन है. जमीन अधिग्रहण नहीं किये जाने से सड़क नहीं बन पा रही है. इस सड़क के बन जाने से आसनबनी व आसपास के गांवों का बंगाल के मुरालपुर तथा सिउड़ी, सैंथिया तक जाने का रास्ता सुलभ हो जायेगा.

अनुपयोगी जगह में बना दिया पुलिया

रामगढ़. प्रखंड के धोबा पंचायत के जोगिया गांव के बाहर माउंट ओसीसी विद्यालय जोगिया के रास्ते विरान मैदान में विगत चार वर्ष पूर्व विधायक निधि से तीन लाख की लागत से पुलिया और गार्ड वाल का निर्माण कराया गया है. जो किसी काम का नहीं है. जोगिया गांव के ग्रामीणों का कहना है कि बिचौलिये जेइ की मिलीभगत से गांव के बाहर में पुलिया व गार्ड वाल बना दिया जो किसी काम का नहीं है.

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