धनबाद में प्रिंस खान गिरोह पर पुलिस का शिकंजा, 100 बैंक खाते फ्रीज और दर्जनों गिरफ्तार
प्रिंस खान की फाइल फोटो
धनबाद में प्रिंस खान गिरोह के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. 100 बैंक खाते फ्रीज किए है. उसके सात गुर्गे घायल है, जिससे नेटवर्क कमजोर हुआ है.
कभी फोन की घंटी बजते ही कारोबारियों के चेहरों पर डर छा जाता था. रंगदारी की मांग, फिरौती का दबाव और फायरिंग की घटनाओं से धनबाद में दहशत फैलाने वाला प्रिंस खान गिरोह अब खुद संकट में घिरता नजर आ रहा है. पुलिस के लगातार प्रहार से गिरोह का नेटवर्क कमजोर पड़ने का दावा किया जा रहा है.
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पिछले एक वर्ष में पुलिस कार्रवाई के दौरान गिरोह से जुड़े सात गुर्गे पांच अलग-अलग एनकाउंटर में घायल हुए हैं. दर्जनों संदिग्धों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है. गिरोह से जुड़े करीब 100 बैंक खातों को फ्रीज कर आर्थिक नेटवर्क पर भी चोट की गयी है. वासेपुर और आसपास के इलाकों में लगातार छापेमारी कर स्थानीय नेटवर्क को खंगाला जा रहा है.
नन्हें खान की हत्या के बाद बदली तस्वीर
बैंक मोड़ थाना क्षेत्र के नया बाजार निवासी नन्हें खान की हत्या के बाद वासेपुर से फरार हुए प्रिंस खान पर कई आपराधिक घटनाओं में शामिल होने के आरोप लगे. इसके बाद उसने धनबाद समेत झारखंड के कई जिलों के कारोबारियों को फोन कर रंगदारी मांगने और फायरिंग कराने का नेटवर्क खड़ा किया.

पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क का संचालन विदेश से, खासकर पाकिस्तान से किए जाने का दावा रहा है. अब पुलिस ने इसी नेटवर्क पर शिकंजा कस दिया है. लगातार कार्रवाई के कारण स्थानीय स्तर पर गिरोह के लिए नए लड़कों की भर्ती और नेटवर्क को मजबूत करना मुश्किल होता जा रहा है.
पांच मुठभेड़ में सात गुर्गे घायल
पिछले एक वर्ष में पुलिस कार्रवाई के दौरान गिरोह से जुड़े सात गुर्गे पांच अलग-अलग एनकाउंटर में घायल हुए हैं. पुलिस के अनुसार, पलामू के अमन सिंह से लेकर चाईबासा के भानू मांझी तक कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गयी.
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पुलिस का दावा है कि लगातार दबाव के कारण गिरोह के स्थानीय नेटवर्क की गतिविधियों पर असर पड़ा है. नए युवकों को जोड़ने और स्थानीय स्तर पर आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने के लिए नेटवर्क तैयार करना भी गिरोह के लिए चुनौती बन गया है.
सुजीत सिन्हा की मौत से टूटी एक और कड़ी
पुलिस के अनुसार, जेल में रहते हुए गैंगस्टर सुजीत सिन्हा प्रिंस खान का सहयोगी बना था. आरोप है कि वह रांची, रामगढ़ और आसपास के कारोबारियों के मोबाइल नंबर उपलब्ध कराता था और अपने गुर्गों के जरिये घटनाओं को अंजाम दिलवाता था.

पिछले माह जामताड़ा में एनकाउंटर में सुजीत सिन्हा के मारे जाने के बाद पुलिस मान रही है कि गिरोह की एक महत्वपूर्ण कड़ी टूट गयी है. इससे प्रिंस खान के नेटवर्क पर दबाव और बढ़ने का दावा किया जा रहा है.
100 बैंक खातों पर पुलिस ने की कार्रवाई
गिरोह को आर्थिक मदद पहुंचाने वालों के करीब 100 बैंक खातों को पुलिस ने फ्रीज कराया है. वासेपुर और आसपास के इलाकों में दो बड़े अभियान चलाकर गिरोह के स्थानीय लिंक खंगाले गये.
कार्रवाई के दौरान दर्जनों लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया. कई संदिग्ध अपराधियों की पुलिस परेड भी करायी गयी. पुलिस की कोशिश गिरोह के आर्थिक और स्थानीय नेटवर्क को कमजोर करने की है.
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सैफी की वापसी से बढ़ा दबाव
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सैफी का भारत लौटना और उसके भाई गोपी तथा साला ऋतिक के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किए जाने की कार्रवाई का भी असर पड़ा है.
एक तरफ आर्थिक नेटवर्क पर चोट की गयी है. दूसरी तरफ स्थानीय सहयोगियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है. इन दोनों मोर्चों पर दबाव बढ़ने से गिरोह की गतिविधियां कमजोर पड़ने का दावा किया जा रहा है.
अब पूरे नेटवर्क को खत्म करने की चुनौती
लगातार पुलिस कार्रवाई के बावजूद प्रिंस खान गिरोह का पूरा नेटवर्क खत्म होना अभी चुनौती बना हुआ है. पुलिस के सामने गिरोह के आर्थिक स्रोतों, स्थानीय सहयोगियों और आपराधिक नेटवर्क पर लगातार नजर बनाए रखने की चुनौती है.

इसको लेकर एसएसपी प्रभात कुमार ने कहा कि संगठित अपराध के खिलाफ धनबाद पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है. जब तक संगठित अपराध पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, कार्रवाई जारी रहेगी.
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