2021 से बंद बराकर इंजीनियरिंग वर्कशॉप के फिर शुरू होने की जगी उम्मीद, जर्मन टीम ने लिया जायजा

Updated:
विज्ञापन

मौके पर मौजूद टीम के सदस्य

जर्मन टीम के दौरे से बराकर इंजीनियरिंग वर्कशॉप के फिर से शुरू होने की उम्मीद जगी है. जानिए क्या है पूरी योजना और स्थानीय लोगों को इससे क्या लाभ होगा.

विज्ञापन

साल 2021 से बंद पड़े इसीएल के प्रमुख बराकर इंजीनियरिंग वर्कशॉप के दिन बेहतर होने की उम्मीद जगी है. बुधवार की सुबह जर्मनी की एक टीम ने इसीएल मुगमा एरिया के वरीय अधिकारियों के साथ सिंदरी कॉलोनी स्थित वर्कशॉप का दौरा किया. टीम ने यहां उपलब्ध संसाधनों, आधारभूत संरचना और भविष्य की संभावनाओं का जायजा लिया.

आपके शहर में

विज्ञापन

कोल इंडिया और इसीएल के संपर्क में है जर्मन कंपनी

बताया गया कि कोल इंडिया और इसीएल के संपर्क में जर्मन कंपनी जीआइजेड वर्कशॉप में निवेश और अन्य संभावनाओं की तलाश कर रही है. कोयला उद्योग तथा इससे जुड़ी आनुषंगिक इकाइयों में निवेश की संभावनाओं को देखते हुए कोल इंडिया की ओर से जर्मन कंपनी को आमंत्रित किए जाने की बात सामने आ रही है.

कई विकल्पों पर हो रहा मंथन

जर्मन टीम के दौरे के बाद बराकर इंजीनियरिंग वर्कशॉप को लेकर संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गयी है. सूत्रों के अनुसार, वर्कशॉप को आधुनिक रूप देकर दोबारा शुरू करने, यहां किसी अन्य उद्योग की स्थापना करने अथवा जर्मन कंपनी को वर्कशॉप की जमीन और अन्य परिसंपत्तियां लीज पर देने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है.

विशेषज्ञ कर रहे संभावनाओं का आकलन

इसीएल के अधिकारियों का कहना है कि विदेशी विशेषज्ञ वर्कशॉप का निरीक्षण कर भविष्य की संभावनाओं का आकलन कर रहे हैं. दौरे के दौरान जीआइजेड के टेक्निकल एडवाइजर फिलिप्स योहानस, शरत सिंह, इसीएल मुगमा एरिया के जीएम राज किशोर सिंह, वर्कशॉप के अभिकर्ता केपी द्विवेदी समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे.

स्थानीय लोगों में बढ़ी उम्मीद

जर्मन टीम के दौरे की खबर से सिंदरी कॉलोनी और आसपास के लोगों में खुशी है. स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि वर्षों से बंद पड़े इस ऐतिहासिक वर्कशॉप का फिर से कायाकल्प होगा और क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. मौके पर हरे राम, अफताब आलम, कमल लोहार, आरपी सिंह, शीतल मंडल और अनूप चक्रवर्ती समेत अन्य लोग मौजूद थे.

1952 में थापर कंपनी ने की थी स्थापना

बराकर इंजीनियरिंग वर्कशॉप का इतिहास काफी पुराना है. वर्ष 1952 में थापर कंपनी के मालिक करमचंद थापर ने इसकी स्थापना की थी. बाद में तत्कालीन विधायक कृपा शंकर चटर्जी के प्रयासों से वर्कशॉप को ईसीएल के अधीन लाया गया. इसीएल के अधीन आने के बाद यह कंपनी की विभिन्न परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण मशीनरी और कलपुर्जे तैयार करने वाला प्रमुख केंद्र बन गया.

21 मई 2021 को कर्मचारियों का हुआ था तबादला

वर्कशॉप में वर्षों तक मशीनरी और कलपुर्जों का निर्माण होता रहा. 21 मई 2021 को प्रबंधन ने यहां कार्यरत सभी कर्मचारियों का दूसरी कोलियरियों में तबादला कर दिया. इसके बाद से वर्कशॉप बंद पड़ा है. हालांकि परिसर की सुरक्षा और कॉलोनी में पानी तथा बिजली की व्यवस्था बनाए रखने के लिए संबंधित कर्मचारी अब भी तैनात हैं.

इसीएल के साथ बीसीसीएल और सीसीएल को भी होती थी आपूर्ति

वर्कशॉप में लोहे को गलाकर ढलाई के जरिये मजबूत कलपुर्जे तैयार किए जाते थे. यहां बने उपकरणों की आपूर्ति इसीएल के अलावा बीसीसीएल और सीसीएल को भी होती थी. हेड गियर, जेएस कवर, एसएस कवर, पिनियन, जीआई पाइप, रूफ बोल्ट, केज और टेंडन केज समेत कई महत्वपूर्ण कलपुर्जों का निर्माण यहां होता था.

पांच वर्षों से बंद है औद्योगिक परिसर

लगभग पांच वर्षों से बंद इस औद्योगिक परिसर में जर्मन टीम के दौरे ने फिर उम्मीद जगायी है. यदि वर्कशॉप का पुनरुद्धार या यहां नये उद्योग की स्थापना होती है, तो इससे औद्योगिक संसाधनों का उपयोग बढ़ने के साथ स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल सकती है.

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola