किसी करार और भरोसे से नहीं हुआ ‘सीपीपी’ का उद्धार

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कथारा : सीसीएल कथारा क्षेत्र अंतर्गत कैप्टिव पावर प्लांट (सीपीपी)के बंद हुए 18 माह बीत गये. प्लांट की बंदी से आसपास के सैकड़ों ग्रामीण मजदूर बेरोजगार हो गये. इस दौरान न किसी भरोसा और न ही किसी करार पर पहल हुई. एक तरफ मजदूरों का पांच माह का बकाया लंबित है तो दूसरी ओर उन्हें […]

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कथारा : सीसीएल कथारा क्षेत्र अंतर्गत कैप्टिव पावर प्लांट (सीपीपी)के बंद हुए 18 माह बीत गये. प्लांट की बंदी से आसपास के सैकड़ों ग्रामीण मजदूर बेरोजगार हो गये. इस दौरान न किसी भरोसा और न ही किसी करार पर पहल हुई. एक तरफ मजदूरों का पांच माह का बकाया लंबित है तो दूसरी ओर उन्हें जीविका की तलाश में दूसरे प्रदेशों का रुख करना पड़ रहा है. प्लांट के चालू रहने से क्षेत्र को चौबीसों घंटे बिजली मिलती थी, पर यहां बीटीपीएस से जलापूर्ति हो रही है.

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11 साल चला सकी सीसीएल : वर्ष 1994 में सौ करोड़ से अधिक लागत से तैयार 20 मेगावाट की दो यूनिट का यह प्लांट प्रबंधन बमुश्किल किसी तरह 2005 तक ही चला सका. अंतत: प्लांट के परिचालन के लिए 14 अक्तूबर 2005 को इंपीरियल पावर फास्टनर्स प्रा लि के बीच 20 सालों के लिए एक करार हुआ.
करार के एवज में कंपनी को प्रति माह बतौर रेंट 32 लाख रु भुगतान तथा क्षेत्र को सस्ती दरों पर बिजली मुहैया करानी थी. इसी आलोक में कंपनी की देखरेख में एक फरवरी 2006 से प्लांट से बिजली का उत्पादन शुरू हुआ.
निजी हाथ में भी नहीं रहा सुरक्षित : निजी हाथों में लगातार 12 वर्षों से भी अधिक समय तक प्लांट चला. जुलाई 2018 से जीएसटी बिल का बढ़ते जाना, रिजेक्ट कोयले की खराब क्वालिटी के कारण उत्पादन लागत बढ़ने जैसी समस्याओं से कंपनी को दो-चार होना पड़ा. अंततः कंपनी प्लांट को एक अगस्त 2018 से बंद करने का निर्णय लेना पड़ा.
किसी आश्वासन पर अमल नहीं : ज्वलंत बिंदुओं पर सकारात्मक पहल के लिए क्षेत्र से मुख्यालय स्तर पर कंपनी एवं सीसीएल प्रबंधन के बीच कई वार्ताएं हुईं, पर नतीजा सिफर रहा. दो माह पूर्व सीसीएल सीएमडी गोपाल सिंह से प्लांट के मजदूरों का एक प्रतिनिधि मंडल भी मिला. उन्होंने प्लांट को चालू करने तथा मजदूरों के बकाया भुगतान का आग्रह किया था. किसी आश्वासन पर आज तक अमल नहीं हुआ.
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