रुनकी-झुनकी बेटी मांगी ल, पढ़ल पंडितवा दामाद हे छठी मइया...

Updated at : 12 Nov 2018 6:36 AM (IST)
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रुनकी-झुनकी बेटी मांगी ल, पढ़ल पंडितवा दामाद हे छठी मइया...

सत्या राज, धनबाद :सदियों से चला आ रहा है लोक आस्था का महापर्व छठ. सूर्योपासना कर अन्न, धन लक्ष्मी, खुशहाल परिवार के साथ व्रती रूनकी झुनकी बेटी भी छठी मइया से मांगती हैं. एक आेर जहां हमारे समाज में कन्या भ्रूण हत्या का ग्राफ बढ़ा है तो दूसरी और व्रतियों द्वारा रूनकी झुनकी बेटियों का […]

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सत्या राज, धनबाद :सदियों से चला आ रहा है लोक आस्था का महापर्व छठ. सूर्योपासना कर अन्न, धन लक्ष्मी, खुशहाल परिवार के साथ व्रती रूनकी झुनकी बेटी भी छठी मइया से मांगती हैं. एक आेर जहां हमारे समाज में कन्या भ्रूण हत्या का ग्राफ बढ़ा है तो दूसरी और व्रतियों द्वारा रूनकी झुनकी बेटियों का मइया से मांगा जाना इस बात को सार्थक करता है कि बेटियां अभिशाप नहीं, बल्कि आंगन की खुशबू होती है.
उनसे सारा घर चहकता है. बाबुल का आंगन खिलखिलाता है. कई छठ व्रतियों ने कहा कि बेटा-बेटी दोनों हमारे लिए समान हैं. हमारी दो आंखें हैं. रूनकी झुनकी बेटी तो आंगन की शोभा होती हैं. उनका आदर कीजिए, सम्मान कीजिए और दीजिए ढेरों प्यार-दुलार…
कई सालों से छठ कर रही हूं. बचपन से ही छठ को लेकर मेरी आस्था है. मां को छठ करते देखती थी. रूनकी झुनकी बेटियों पर मां का स्नेह बरसता था. हमारे पारंपरिक गीत में भी छठी मां से बेटियां मांगी जाती रही है.
आज जब छठ में बेटी साथ लगी रहती है तो अपना बचपन याद आता है. बेटियों से घर आंगन के साथ ही संसार रोशन होता है. मेरी बेटी श्रुति सिन्हा पटना से पढ़ाई कर रही है.
जॉली शर्मा, विकास नगर
छठ करते मेरा तीसरा साल है. बेटी अपराजिता शरण जब छठ के काम में हाथ बंटाती है, बरबस शारदा सिन्हा के छठ गीत ‘रूनकी झुनकी बेटी मांगी ल…’ कानों में गूंज उठता है. जब मैं छोटी थी, तभी से यह गीत सुन रही हूं. बेटियों का मान गीत में सुनकर अच्छा लगता है. वैसे आज बेटियों ने हर क्षेत्र में परचम लहराया है. छठी मइया से यही मांगती हूं बेटियों के कामयाबी का फलक सदा चमकता रहे.
मंजरी शरण, कुसुम विहार
संतान की सलामती, अखंड सुहाग के लिए व्रती छठी मइया की उपासना करती हैं. हमारे समाज में करीब करीब पर्व पति, पुत्र और भाई के दीर्घायु, सलामती के लिए किये जाते हैं. एकमात्र छठ ही ऐसा पर्व है जहां सुख समृद्धि, अन्न धन नैहरा ससुराल की खुशहाली के साथ ही बेटियां भी मांगी जाती हैं. मेरा मानना है बेटियां जीवन का त्योहार होती हैं. जब भी उसे देखो खुशी मिलती है.
बबीता सिंह, धैया
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