बैंकों में न डिसप्ले बोर्ड, न अलग काउंटर, कोई न कोई बहाना बनाकर ग्राहकों को लौटा देते हैं बैंककर्मी

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धनबाद : कोयलांचल में सिक्का जी का जंजाल बन गया है. पिछले डेढ़ साल से लोगों को सिक्के से राहत नहीं मिली है. न तो दुकानदार सिक्का लेते हैं और न ही बैंक. बेचारी जनता पिस रही है. आखिर सिक्कों को लेकर धनबाद में अराजक स्थिति क्यों है? इसे जानने के लिए प्रभात खबर की […]

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धनबाद : कोयलांचल में सिक्का जी का जंजाल बन गया है. पिछले डेढ़ साल से लोगों को सिक्के से राहत नहीं मिली है. न तो दुकानदार सिक्का लेते हैं और न ही बैंक. बेचारी जनता पिस रही है. आखिर सिक्कों को लेकर धनबाद में अराजक स्थिति क्यों है? इसे जानने के लिए प्रभात खबर की टीम ने शहर के प्रमुख चार बैंकों की पड़ताल की. पाया गया कि आरबीआइ के सख्त निर्देश के बावजूद धनबाद के बैंकों में न तो सिक्का लेने संबंधित कोई डिसप्ले बोर्ड लगाया गया है और न ही अलग से कोई काउंटर खोला गया है. अगर कोई ग्राहक बैंकों में सिक्का लेकर आता है तो उन्हें बैंक कर्मी कोई न कोई बहाना बनाकर वापस लौटा देते हैं.
सिक्का एक्सचेंज करने में दलाल भी सक्रिय
सिक्का एक्सचेंज को लेकर दलाल भी सक्रिय हो गये हैं. बाजार से सिक्का एकत्र कर बैंक में एक्सचेंज कराते हैं. इसके बदले दलाल को मोटा कमीशन मिलता है. हालांकि दलाल के साथ कुछ बैंककर्मियों की भी सांठगांठ है. आम ग्राहकों से बैंककर्मी सिक्का नहीं लेते हैं. लेकिन दलाल सिक्का लेकर आते हैं तो उनसे आसानी से सिक्का एक्सचेंज कर लेते हैं.
15 दिनों में व्यवस्था नहीं सुधरी तो धरना देगा चेंबर
15 दिनों में व्यवस्था नहीं सुधरी तो बैंक के सामने चेंबर के पदाधिकारी धरना-प्रदर्शन करेंगे. जिला चेंबर अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने कहा : जब बैंक ने सिक्के दिये हैं तो वापस लेना उनकी जिम्मेवारी है. सिक्के कहां रखे जायें, यह बैंक की समस्या है. आरबीआइ की जो गाइड लाइन है, उसके अनुसार बैंकों को सिक्का लेना है.
बैंक ऑफ इंडिया : सिक्के से फुल है चेस्ट, कहां रखें
बैंक ऑफ इंडिया, एसएमइ हीरापुर शाखा में तीन काउंटर है, जहां कैश का लेन-देन होता है. सिक्का से संबंधित न तो डिसप्ले है और न ही अलग से काउंटर. ग्राहक आते हैं और लौट जाते हैं. अगर ग्राहक बैंक कर्मी से पूछते हैं कि सिक्का लेकर आये हैं तो उन्हें बैंककर्मी कोई न कोई बहाना बनाकर वापस लौटा देते हैं.
एसबीआइ : एक हजार तक सिक्के लेते हैं
एसबीआइ हीरापुर ब्रांच में दर्जनों काउंटर है. लेकिन न तो सिक्का से संबंधित कोई डिसप्ले है और न ही अलग से कोई काउंटर. शुरुआती दौर में यहां सिक्का लिये गये. चेस्ट में पचास लाख से अधिक सिक्का होने के कारण बैंक कर्मी थोड़ी आना-कानी करते हैं. हालांकि कोई ग्राहक सिक्का लेकर आता है तो एक हजार मूल्य का सिक्का ले लिया जाता है.
सिक्के का बोझ नहीं ढो पा रहे हैं बैंक
सिक्के का बोझ बैंक नहीं ढो पा रहे हैं. नोटबंदी के दौरान आरबीआइ से लगभग आठ करोड़ का सिक्का धनबाद आया. नोट की कमी बता कर बैंक ने ग्राहकों को सिक्का दिया. लेकिन जब एक्सचेंज की बारी आयी तो बैंक हाथ खड़े कर रहे हैं. बैंक अधिकारी कहते हैं कि सिक्कों से चेस्ट भर गया है. आरबीआइ सिक्का नहीं ले रहा है. आखिर रखें तो कहां रखें. शुरुआती दौर में बैंकों ने सिक्के लिये. लगभग चार करोड़ रुपये का सिक्का बैंक पहुंच गया है. अब भी रोटेशन में है चार करोड़.
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